-इस प्रक्रिया से सर्जरी के दौरान नहीं होती है कृत्रिम हड्डी की आवश्यकता

सेहत टाइम्स
लखनऊ। टेरिगॉइड इम्प्लांट कम रिज में बहुत सहायक होते हैं। मैक्सिलरी रिसोर्ब्ड रिज कम घनत्व वाली हड्डी और मैक्सिलरी साइनस के कारण चुनौती होती है, इसलिए जिन रिसोर्ब्ड रिज मामलों में सामान्य प्रत्यारोपण प्रक्रिया नहीं की जा सकती, उनमे टेरिगॉइड प्रत्यारोपण अच्छा विकल्प है। इसमें कम लागत आती है क्योंकि इसमें सर्जरी के दौरान कृत्रिम हड्डी की आवश्यकता नहीं होती है।
यह जानकारी केजीएमयू के प्रोस्थोडॉन्टिक्स विभाग के प्रभारी और आईडीए लखनऊ शाखा द्वारा 23 जनवरी को मैक्सिलरी रिसोर्ब्ड रिज में टेरिगॉइड प्रत्यारोपण पर आयोजित कार्यशाला में आयोजन सचिव डॉ. कमलेश्वर सिंह ने दी।
दंत चिकित्सा संकाय के डीन प्रोफेसर रंजीत पाटिल ने कार्यशाला का उद्घाटन किया। उन्होंने विभाग के संकाय सदस्यों को नियमित कार्यक्रम आयोजित करने और केजीएमयू को विभिन्न स्तरों पर गौरवान्वित करने के लिए बधाई दी। आयोजन अध्यक्ष डॉ. पूरन चंद ने कहा कि आई.डी.ए. लखनऊ शाखा रोगी उत्थान के लिए बेहतरीन कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि विभाग लगातार छात्र उत्थान के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।
आयोजन अध्यक्ष डॉ. पूरन चंद ने कहा कि आई.डी.ए. लखनऊ शाखा रोगी उत्थान के लिए बेहतरीन कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि विभाग लगातार छात्र उत्थान के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। अतिथि वक्ता डॉ. दिव्या मल्होत्रा ने मैक्सिलरी रिज में टेरिगॉइड और जाइगोमैटिक प्रत्यारोपण के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि यह कम समय में रोगी की चबाने की क्षमता और सौंदर्य को बहाल करने में मदद करता है।
कार्यशाला मे प्रदीप टंडन, डॉ. अमित नागर, डॉ. नंदलाल, डॉ. जीके सिंह, डॉ. हरिराम, डॉ. उमेश, डॉ. पवित्र रस्तोगी, डॉ. राजीव सिंह, डॉ. संजीव श्रीवास्तव, डॉ. रमेश भारती, डॉ. रामाशकर, डॉ. धीरेंद्र, डॉ. शुचि, डॉ. लक्ष्य, डॉ भास्कर, कौशल, डॉ. मयंक, डॉ. मोहन, डॉ. रोहित, डॉ. आकांक्षा, डॉ. आयुषी, डॉ. हुस्बाना, डॉ. अंशू, डॉ. अपूर्वा, डॉ. अक्षी, डॉ. पुष्पा और उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए अन्य प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
