Thursday , August 18 2022

टूटा पड़ा है शासन और होम्‍योपैथिक विभाग को जोड़ने वाला सेतु

-सात माह से होम्‍योपैथिक निदेशक की कुर्सी खाली, कार्य अवरुद्ध

-कोरोना से जंग में अहम् भूमिका निभा सकती थी होम्‍योपैथी

डॉ अनुरुद्ध वर्मा

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। भारत वर्ष सहित सम्‍पूर्ण विश्‍व इस समय कोरोना महामारी से जूझ रहा है, सभी अपनी-अपनी तरह से इससे निपटने में लगे हैं। जहां होम्‍योपैथिक दवा से इम्‍युनिटी बढ़ने की बात सामने आयी है, जिससे कोरोना से बचाव में भी लाभ हो सकता है। कोरोना के अलावा दूसरे प्रकार के रोगों पर उतना फोकस नहीं हो पा रहा है जितना साधारण काल में होता है। आधुनिक चिकित्‍सा पद्धति के अलावा अगर बात करें तो आयुष पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने आयुष मंत्रालय का गठन किया था, उसी तर्ज पर राज्‍यों में भी आयुष पद्धतियों को बढ़ावा दिया जाना है, लेकिन उत्‍तर प्रदेश में आयुष विभाग की एक विधा होम्‍योपैथी का हाल यह है कि बीते सात महीने यानी कोरोना की शुरुआत के दौर से ही राज्‍य में होम्‍योपैथिक निदेशक की नियुक्ति नहीं हो सकी है। इसका नतीजा यह है कि मरीजों को दी जाने वाली दवाओं की उपलब्‍धता सुनिश्चित करने जैसे अनेक ऐसे निर्णय, जो नियमित निदेशक द्वारा लिये जाने होते हैं, वे सब लम्बित हैं।

केंद्रीय होम्‍योपैथी परिषद के पूर्व सदस्‍य व हाल ही में सेवानिवृत्‍त होम्‍योपैथिक चिकित्‍सा अधिकारी डॉ अनुरुद्ध वर्मा ने इस सम्‍बन्‍ध में मुख्‍यमंत्री को एक पत्र लिखा है। जिसमें उन्‍होंने बीते सात महीने से प्रदेश में निदेशक की नियुक्ति न होने की बात कही है। पत्र में डॉ वर्मा ने लिखा है कि प्रदेश में होम्योपैथिक निदेशालय के अंतर्गत 9 राजकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एवम लगभग 1600 होम्योपैथिक चिकित्सालय कार्य कर रहे है जो प्रदेश में होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति को जन जन तक पहुंचने के लिए कार्य कर रहे हैं। निदेशक इनका नियंत्रक अधिकारी होता है तथा शासन एवं विभाग के मध्य सेतु का कार्य करता है एवं शासन को विभाग की आवश्यकताओं एवं योजनाओं के बारे में जानकारी दे कर उनको मूर्त रूप प्रदान कराने का प्रयास करता है।

डॉ वर्मा ने लिखा है कि कोरोना काल में होम्योपैथिक विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती थी, लेकिन निदेशक न होने के कारण कोरोना की रोकथाम के लिए होम्योपैथिक औषधियों का पर्याप्त वितरण भी नहीं हो पाया जिससे जनता को पद्धति का पूरा लाभ भी नहीं मिल पाया जबकि इस महामारी में होम्योपैथिक औषधियां ज्यादा लाभप्रद साबित हो सकती थीं।

डॉ वर्मा ने लिखा है कि निदेशक की तैनाती न होने के कारण सेवानिवृत्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों के देयकों का भुगतान नहीं हो पा रहा है तथा विभाग में लगभग जड़ता की स्थिति है जिससे विकास संबंधी कार्य अवरुद्ध हैं।

डॉ वर्मा ने मुख्‍यमंत्री से अनुरोध किया है कि प्रदेश मेँ होम्योपैथिक विभाग में निदेशक की शीघ्र तैनाती करने की कृपा करें जिससे विभाग पूरी गति से जनता की सेवा कर सके और होम्योपैथी जैसी सरल, सुलभ, हानिरहित सम्पूर्ण स्वास्थ्य उपलब्ध कराने वाली पद्धति का पूरा लाभ जनता को मिल सके। डॉ वर्मा ने इस पत्र की प्रतिलिपि आयुष मंत्री स्‍वतंत्र प्रभार व विभागीय अपर मुख्‍य सचिव को भी भेजी है।