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सावधान! पायरिया से हो सकती है डायबिटीज : डॉ रामेश्‍वरी सिंघल

-केजीएमयू के पीरियोडोन्‍टोलॉजी  विभाग में आयोजित किया जा रहा चार दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम

डॉ रामेश्वरी सिंघल

सेहत टाइम्‍स

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के दंत संकाय के पीरियोडोन्‍टोलॉजी  विभाग में विश्व डायबिटीज दिवस के मौके पर 15 नवम्‍बर से 18 नवम्‍बर तक चार दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य आम जनमानस के साथ ही दंत चिकित्‍सा के लिए आने वाले मरीजों को मुख स्‍वास्‍थ्‍य में डायबिटीज की भूमिका को लेकर महत्‍वपूर्ण जानकारियां देना है। उनको यह बताना है कि  डायबिटीज और मुख स्वास्थ्य का परस्पर एक दूसरे पर कितना असर होता है।

इस अभियान के अंतर्गत आज पहले दिन विभागाध्यक्ष प्रो नन्दलाल ने मरीजों को मुख स्वास्थ्य और उसका शरीर के अन्य हिस्सों पर होने वाले प्रभाव पर जागरूक किया। इसके अतिरिक्‍त प्रो पवित्र रस्तोगी ने डायबिटीज पर अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम की मुख्य संयोजक डॉ रामेश्वरी सिंघल ने यह जानकारी देते हुए बताया कि मुख शरीर का दर्पण है। मुख में पायरिया होना शरीर में कई प्रकार के विकार पैदा करता है। उन्‍होंने बताया कि डायबिटीज के उपचार और रोकथाम में मुख स्वास्थ्य की अहम भूमिका है, डॉ रामेश्‍वरी का कहना है कि अधिकतर लोगों को पता ही नहीं होता कि‍ वे मधुमेह से ग्रस्त हैं और जब तक पता चलता है तब तक बीमारी शरीर में और विकार पैदा कर चुकी होती है।

उन्‍होंने बताया कि पायरिया के मरीजों में डायबिटीज होने की संभावना अधिक है और डायबिटीज की वजह से पायरिया भी हो सकता है। उन्‍होंने बताया कि इसकी जांच के लिए इंडियन सोसाइटी ऑफ पीरियोडोन्‍टोलॉजी  के साथ पीरियोडोन्‍टोलॉजी विभाग ने मुफ्त मरीजों की रेंडम ब्लड शुगर की जांच एवं मुख स्वास्थ्य का परीक्षण की व्‍यवस्‍था की है। मरीजों को इन दोनों बीमारियों और इनके आपस के संबंध के बारे में भी उचित ज्ञान दिया जायेगा।

इसी संदर्भ में इसी वर्ष इंडियन सोसायटी ऑफ पीरियोडोन्‍टोलॉजी  एवं रिसर्च सोसायटी ऑफ स्टडी ऑफ डायबिटीज इन इंडिया का जॉइंट वक्तव्य इन्हीं सोसाइटी की शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुका है। यह गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस डायबिटीज और पार्टियों के मरीजों के उपचार एवं रोकथाम के लिए मेडिकल एवं डेंटल चिकित्सकों के लिए एक उपयोगी दस्तावेज है। डॉ रामेश्‍वरी सिंघल सहित भारतवर्ष के 40 पीरियोडोन्‍टोलॉजी एवं मधुमेह चिकित्‍सकों की टीम ने गहन चिंतन के उपरांत यह दस्तावेज बनाया है।

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