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अटल बिहारी को श्रद्धांजलि देकर मॉरीशस में शुरू हुआ विश्‍व हिन्‍दी सम्‍मेलन

  • विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज, मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रवीण जगन्‍नाथ सहित कई केंद्रीय मंत्रियों के साथ भारतीय दल ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

 

  • चिकित्‍सा जगत में हिन्‍दी के योगदान के लिए प्रो सूर्यकांत को भी किया गया है आमंत्रित

 

विश्‍व हिन्‍दी सम्‍मेलन को सम्‍बोधित करतीं विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज।

मॉरीशस की राजधानी पोर्ट लुईस में विदेश मंत्रालय और मॉरीशस सरकार के सहयोग से 18 अगस्त से 20 अगस्‍त तक 11वां ‘विश्व हिंदी सम्मेलन’ तीन दिवसीय विश्व हिंदी सम्मेलन शुरू हो चुका है।

 

इस सम्‍मेलन में भाग लेने के लिए भारतीय प्रतिनिधिमंडल विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज व अन्‍य मंत्रियों के साथ गया हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार भारत रत्‍न अटल बिहारी वाजपेयी के निधन का दुख लेकर भारी मन से समारोह में अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि दी गयी। श्रद्धांजलि देने वालों में केन्‍द्रीय मंत्री सुषमा स्‍वराज, वीके सिंह, एमजे अकबर, किरण रिजिजू, किंग जॉर्ज चिकित्‍सा विश्‍व विद्यालय (केजीएमयू) के प्रो सूर्यकांत, मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रवीण कुमार जगन्‍नाथ, मॉरीशस की शिक्षा मंत्री लीला देवी सहित बड़ी संख्‍या में लोग शामिल रहे।

सम्‍मेलन में अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि देते प्रो सूर्यकांत।

आपको बता दें केजीएमयू के प्रोफेसर डा0 सूर्यकान्त को उनके द्वारा चिकित्सा क्षेत्र में हिन्दी भाषा को बढ़ावा देने के लिए मॉरीशस में 18 से 20 अगस्‍त को होने वाने त्रिदिवसीय विश्व हिन्दी सम्मेलन में भारत के सरकारी प्रतिनिधि के रूप में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। केजीएमयू के इतिहास में डा0 सूर्यकान्त पहले चिकित्सक हैं जिन्हें किसी भी विश्व हिन्दी सम्मेलन में भाग लेने हेतु सरकारी प्रतिनिधि के रूप में अमंत्रित किया गया है। इस सम्मेलन में दुनिया भर के तकरीबन सभी देशों के हिन्दी शोध छात्र साहित्यकारक और अकादमिक व्यक्ति भागीदारी करेंगे।

इस सम्मेलन का आयोजन हिंदी भाषा का विश्व स्तर प्रचार करने और समय के अनुसार हिंदी भाषा के विकास में योगदान देने के लिए किया जाता है।  इस साल सम्मेलन की थीम ‘हिंदी विश्व और भारतीय संस्कृति’ रखी गई है। आपको बता दें कि सन 1972 में हिंदी प्रचार समिति के अध्‍यक्ष रहते श्री मधुकरराव चौधरी ने कहा था कि हिंदी को राष्‍ट्रीय से अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर ले जाने के लिए समिति को प्रयास करना चाहिए और अपना कार्यक्षेत्र बढ़ाना चाहिए। इस कार्य के लिए विश्‍व हिंदी सम्‍मेलन का आयोजन होना चाहिए। चौधरी जी का यह विचार सबको अच्‍छा लगा और वहीं से विश्‍व हिंदी सम्‍मेलन के आयोजन का सिलसिला प्रारंभ हुआ।

 

 

 

 

 

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