जरूरी है कि मेडिसिनल प्लांट्स की बनी दवाओं को केजीएमयू अपनाये और ट्रायल करे
केजीएमयू के स्थापना दिवस पर विशेषज्ञों ने रखे महत्वपूर्ण विचार
लखनऊ. लखनऊ। जिन औषधीय पौधों का इस्तेमाल भारत में हजारों वर्षों से आयुर्वेद और अन्य पारम्परिक चिकित्सा पद्धतियों की दवाओं को बनाने में कर रहे हैं उन औषधीय पौधों को अमेरिका अब अमेजन के जंगलों में खोज रहा है। विभिन्न रोगों के उपचार में इन दवाओं के इस्तेमाल के लिए आवश्यक है कि किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय जैसे संस्थान इन पौधों से बनी दवाओं को अपनायें और इनका ट्रायल करे। यह उन बातों का सार है जो रविवार को केजीएमयू के स्थापना दिवस समारोह में आये देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के प्रतिनिधियों ने अपने सम्बोधन में कहीं।
किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के 113 वें स्थापना दिवस समारोह पर मुख्य अतिथि के रूप में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक प्रोफ़ेसर रनदीप गुलेरिया और विशिष्ट अतिथि के रूप में केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौध संस्थान (सीमैप) के निदेशक प्रोफेसर अनिल कुमार त्रिपाठी व वर्ल्ड एकेडमी ऑफ ऑथेंटिक हीलिंग साइंसेज कर्नाटक के चेयरमैन पद्म भूषण प्रोफ़ेसर बीएम हेगड़े मौजूद रहे। स्थापना दिवस के अवसर पर 69 गोल्ड मेडल, 49 सिल्वर मेडल, 8 ब्राउंज मेडल, सर्टिफिकेट ऑफ ऑनर विथ डिस्टिंक्शन 67 विद्यार्थियों को, सर्टिफिकेट ऑफ आनर 8 विद्यार्थियों को, 08 बुक प्राइज, 9 श्री डीडी ट्रस्ट बुक प्राइज रुपये 10000 एवं नर्सिंग के विद्यार्थियों के लिए एक गोल्ड मेडल एवं एक कैश प्राइज प्रदान किया गया।
एक दायरे में अपने को संकुचित न करें छात्र
प्रोफ़ेसर हेगड़े ने छात्रों को समझाया कि आप अपने आप को किसी एक क्षेत्र में संकुचित न करें। उन्होंने कहा कि अमेरिका में लोग अब मेडिसिनल प्लांट्स की तरफ जा रहे है, वो लोग विभिन्न प्रकार के मेडिसिनल यानी औषधीय पौधों को खोजने अमेजन के जंगलों मे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता उसी को मिलती है जो कभी भी हार मानकर अपना रास्ता नहीं बदलता।
नये शोध करने की सलाह
एम्स के निदेशक प्रो रनदीप गुलेरिया ने अपने व्याख्यान मे कहा कि इस चिकित्सा विश्वविद्यालय का नाम देश के साथ ही विदेशों में भी काफी प्रचलित हैं। यहां के पढ़े हुए विद्यार्थी विश्व के हर कोने मे फैले हुए है। उन्होंने मेडल प्राप्त करने वाले मेधावियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि यह मेडल आप लोगों को मिला है, वह आप लोगों को यह जिम्मेदारी देता है कि आप इस संसार में कुछ नया करें, कुछ नये शोध करें।
मरीजों से सही इंटरैक्शन करेगा डायग्नोसिस में मदद
प्रो गुलेरिया ने कहा कि जीवन में आगे आप लोगों के लिए यह महत्वपूर्ण हैं कि आप लोग मरीजों के साथ कैसे इण्टरैक्ट करते है, आपका व्यवहार उनके प्रति क्या होता है। अगर आप मरीजों के साथ सही तरीके से इण्टरैक्ट करेंगे तो आप मरीजों की बीमारी को जल्द पहचान सकेंगे। उन्होंने कहा कि आपका यह व्यवहार आप को डायग्नोसिस में मदद देता है। उन्होंने कहा कि सबसे जरूरी है कि आप लोग मेडिसिन को पैसा कमाने का जरिया न बनाएं। यह एक आदर्श व्यवसाय है, इसके माध्यम से आप लोग समाज की और मरीजों की सेवा कर सकते हैं।
बहुत सारे रोगों की दवा आयुर्वेद व अन्य पारम्परिक दवाओं में
अपने सम्बोधन में सीमैप के निदेशक प्रो अनिल कुमार त्रिपाठी ने कहा कि किसी भी संस्थान को लगातार 112 वर्षो तक मेनस्ट्रीम में बनाए रखना एक बड़ी उपलब्धि है। इसके लिए मै सम्पूर्ण केजीएमयू टीम को बधाई देता हूँ। इस संस्थान के एल्मुनाई पूरे विश्व में फैले हुए हैं। विश्व में बहुत सारे पैथ हैं, जैसे होमियोपैथ, आयुर्वेद, यूनानी, माडर्न मेडिसिन आदि। पारम्परिक विधि की मेडिसिन विभिन्न प्रकार के मेडिसिनल पौधों पर आधारित है। आयुर्वेद द्वारा 4000 वर्षो से हम भारतीय अपने स्वास्थ संबंधी समस्याओं से निजात पा रहे है। बहुत सारे मर्जों की दवाएं आयुर्वेद एवं अन्य ट्रेडिशनल मेडिसिन में है। बस जरूरत है तो यह कि केजीएमयू जैसे संस्थान इनको अपनाएं और इनका ट्रायल करें।
इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत कुलपति प्रो मदनलाल ब्रह्म भट्ट के स्वागत सम्बोधन के साथ हुई। इस अवसर पर कुलपति ने केजीएमयू की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। कुलपति ने अपने सम्बोधन में कहा कि चिकित्सा विश्वविद्यालय 100 वर्षो से ज्यादा पुराना चिकित्सा शिक्षा संस्थान है। चिकित्सा विश्वविद्यालय को 2017 के लिए 5वां बेस्ट एमबीबीएस और 6वां बेस्ट बीडीएस शैक्षणिक संस्थान के रूप में रैंक प्रदान की गयी है। राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद द्वारा चिकित्सा विष्वविद्यालय को ‘ए’ ग्रेड का प्रमाण पत्र प्रदान किया गया है। भारत सरकार के मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय द्वारा चिकित्सा विश्वविद्यालय को देश के 1000 विश्वविद्यालयों में उन 32 संस्थानों मे शामिल किया गया है, जिनमे से 10 को इंस्टीट्यूट ऑफ इमिनेंस प्रदान किया जाना है।
केजीएमयू में इस साल 14 लाख से ज्यादा मरीजों को देखा गया
प्रोफेसर भट्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा चिकित्सा विश्वविद्यालय के लिए कुल 355 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है और वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिए 155 करोड़ धनराशि प्रदान की गई है। इस वर्ष चिकित्सा विश्वविद्यालय में 91,572 मरीजों को भर्ती किया गया जबकि ओपीडी में 14,06,007 मरीजों को देखा गया है। चिकित्सा विश्वविद्यालय में सोलर पॉवर स्टेशन, सोलर किचन, सीता रसोई, आई बैंक, वायरस रिसर्च एण्ड डायग्नोस्टिक स्टेट रिफरेंस लैबोरेटरी, ई-हास्पिटल सिस्टम को स्थापित किया गया है। निकट भविष्य में स्टेम सेल बैंक को स्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है। कुलपति ने आगे कहा कि प्रदेश के मेडिकल संस्थानों में सबसे ज्यादा वेंटिलेटर सेटअप केजीएमयू के पास है और 25 बेड की आईसीयू, बर्न यूनिट, जेनेटिक लैब आदि सुविधाएं मौजूद है। केजीएमयू में 33 नये संकाय सदस्यों की चिकित्सा विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में नियुक्ति की गई है।
पांच पुस्तकों का विमोचन
आज के समारोह में प्रो टीसी गोयल द्वारा लिखी किताब फाइलेरियासिस, डेफ्ट डीफिनिशन, डॉ रामेश्वरी सिंघल द्वारा लिखित फंडामेंटल ऑफ पेरियोडेन्टोलॉजी, प्रो सूर्यकांत द्वारा लिखी ए प्रैक्टिकल बुक ऑफ लंग कैंसर, प्रो अजय सिंह की लिखी पीडियाट्रिक ट्रॉमा तथा प्रो विभा सिंह की लिखी किताब औषधीय पौधे और हम का विमोचन भी किया गया। इसके अलावा केजीएमयू के संकाय सदस्यों एवं कर्मचारियों को प्रोत्साहन पुरस्कार भी प्रदान किया गया।
