केजीएमयू के नजदीक शाहमीना शाह की मजार पर लगे शिविर में 100 से ज्यादा रोगियों को दिया गया उपचार

लखनऊ। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत मानसिक रोगों को दूर करने के लिए चिंतित सरकार ने जहां प्रत्येक सरकारी चिकित्सक को मानसिक चिकित्सा का 30 घंटे का एक कोर्स अनिवार्य किया है अन्य तरीकों से भी मानसिक चिकित्सा पर अपना फोकस रखे हुए है। इसी के तहत झाड़-फूंक वाले स्थानों का चयन करके ‘दुआ से दवा तक’ कार्यक्रम चलाकर वहां मानसिक चिकित्सा शिविर लगाने का निर्णय लिया गया है। ऐसा इसलिए किया गया है कि अब भी बहुत से लोग मानसिक बीमारियों का इलाज झाड़-फूंक में ही ढूंढ़ते हैं, जबकि शिविर लगाने का उद्देश्य यह था कि लोग दुआ के साथ-साथ दवा भी लें।

इसी क्रम में गुरुवार को जिला मानसिक स्वास्थ्य प्रकोष्ठ के तहत किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के निकट शाहमीना शाह की मजार पर एक मानसिक चिकित्सा शिविर लगाया गया। शिविर में राष्ट्रीय मानसिक स्व़ास्थ्य कार्यक्रम के राज्य नोडल अधिकारी डॉ सुनील पाण्डेय, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ नरेन्द्र अग्रवाल, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेन्द्र कुमार चौधरी, बलरामपुर चिकित्सालय के मानसिक रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ पीके श्रीवास्तव के साथ एनसीडी तथा मानसिक स्वास्थ्य प्रकोष्ठ के लोग उपस्थित रहे।
इस मौके पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ नरेन्द्र अग्रवाल ने कहा कि कई बार मानसिक रोगों में दुआ के साथ चिकित्सा की भी आवश्यकता होती है, ऐसी स्थिति में इस प्रकार के शिविर बहुत लाभकारी होंगे। राज्य नोडल अधिकारी डॉ सुनील पाण्डेय ने कहा कि इस प्रकार के शिविर सतत प्रक्रिया के तहत शहर की अन्य मजारों पर भी लगते रहेंगे। इसके लिए मजारों को चिन्हित किया जा रहा है। अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेन्द्र कुमार चौधरी ने लोगों से अपील की कि वे अपने आस-पास ऐसे मानसिक रोगी को देखें तो उन्हें इस प्रकार के शिविरों में लाना सुनिश्चित करें। बलरामपुर अस्पताल के डॉ पीके श्रीवास्तव द्वारा शिविर में आये 104 मरीजों को देखा गया तथा 56 रोगियों को आवश्यकतानुसार दवाएं वितरित की गयीं। कुछ मरीजों को बलरामपुर चिकित्सालय में आकर दिखाने के लिए संदर्भित किया गया। शिविर में सीएमओ डॉ नरेन्द्र अग्रवाल की ओर से मरीजों को स्वल्पाहार भी वितरित किया गया।
