-केमिस्ट्स एवं ड्रगिस्ट्स फेडरेशन उत्तर प्रदेश के महामंत्री सुरेश गुप्ता ने FSDA की कार्यप्रणाली पर उठायी उंगली

सेहत टाइम्स
लखनऊ। केमिस्ट्स एवं ड्रगिस्ट्स फेडरेशन उत्तर प्रदेश (CDFUP) ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि औषधि लाइसेंस के प्रतिधारण (retention) में हो रहे विलम्ब को दूर करने के लिए दूसरे पोर्टल की व्यवस्था करते हुए विशेष शिविर लगाये जायें ताकि लाइसेंस की वैधता समाप्त न हो और व्यापारियों का व्यवसाय सुचारु रूप से संचालित हो सके।
इस आशय का पत्र केमिस्ट्स एवं ड्रगिस्ट्स फेडरेशन उत्तर प्रदेश के महामंत्री सुरेश गुप्ता द्वारा कल 31 जनवरी को मुख्यमंत्री को भेजा गया है। पत्र में कहा गया है कि फेडरेशन उत्तर प्रदेश के 1.25 लाख दवा व्यापारियों का प्रतिनिधित्व करने वाला प्रमुख राज्य स्तरीय संगठन है तथा दवा व्यापारियो के उत्थान एंव व्यापार की सुचारु व्यवस्था के लिए कार्यरत है।
पत्र में कहा गया है कि पूर्व में भी हमारे संगठन द्वारा वर्ष 2019 के औषधि लाइसेंस धारकों की लाइसेंस रीटेंशन (Retention) संबंधी समस्या आपके संज्ञान मे लाई गयी थी, इनका रीटेंशन वर्ष 2024 में किया जाना था, किन्तु औषधि पोर्टल मे तकनीकी खामियों के कारण यह प्रक्रिया या तो संपन्न नहीं हो सकी या अनावश्यक रूप से विलंबित हो रही है। पत्र में कहा गया है कि यह समस्या प्रत्येक वर्ष औषधि लाइसेंस के रीटेंशन / नवीनीकरण के दौरान उत्पन्न होती है। पत्र में कहा गया है कि उस समय आपकी सरकार द्वारा इस समस्या के समाधान के लिए एक नए पोर्टल पर इस विषय को स्थानांतरण का निर्णय लिया गया था, किन्तु निराशा का विषय यह है कि यह समस्या आज भी पूर्ववत बनी हुई है।


पत्र में कहा गया है कि ऐसा प्रतीत होता है कि सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद भी औषधि लाइसेंस का रीटेंशन स्वचालित प्रक्रिया द्वारा संपन्न होने के स्थान पर, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) के अधिकारियों की इच्छानुसार चयनात्मक रूप से किया जा रहा है।
पत्र में औषधि कानून में प्रासंगिक प्रावधानों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि ड्रग्स एंव कॉस्मेटिक्स अधिनियम, 1940 के अनुसार, औषधि लाइसेंस का नवीनीकरण अथवा रीटेंशन प्रत्येक पाँच वर्ष की अवधि पूर्ण होने से पूर्व औषधि लाइसेंस रीटेंशन शुल्क जमा कराकर किया जा सकता है। यह ड्रग्स एंव कॉस्मेटिक्स अधिनियम, 1945 के नियम 140 के अंतर्गत स्पष्ट रूप से उल्लिखित है। औषधि लाइसेंस सामान्यतः 5 वर्षों के लिए मान्य होता है। लाइसेंसधारक को केन्द्रीय पोर्टल पर आवश्यक आवेदन प्रस्तुत कर नवीनीकरण / रीटेंशन शुल्क जमा करना आवश्यक होता है। रीटेंशन फीस के लिए चालान जमा करने के लिए औषधि निरीक्षक या औषधि लाइसेंसिंग प्राधिकारी (DLA) के हस्ताक्षर या अनुमोदन की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है।
पत्र में प्रस्ताव दिया गया है कि प्रदेश के प्रत्येक जनपद मे विशेष रीटेंशन शिविर आयोजित किये जायें जिससे औषधि लाइसेंस धारकों की रीटेंशन समस्या का समाधान किया जा सके और उन्हे एक वैधता प्रमाण-पत्र निर्गत किया जाए। पत्र में लिखा है कि हमारी फेडरेशन की सभी जिलों में इकाइयां सक्रिय हैं ऐसे में शिविर के आयोजन में एफएसडीए के अधिकारियों को हरसंभव सहयोग प्रदान किया जायेगा।
