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केजीएमयू की मुश्किलें बढ़ी, ओएसडी सहित दूसरे कार्मिकों को नियमविरुद्ध लाभ दिये जाने की होगी जांच

-विशेष सचिव की अध्यक्षता में जांच समिति गठित, प्रकरण की जांच कर रिपोर्ट सौंपेगी शासन को

सेहत टाइम्स

लखनऊ। पिछले दिनों कथित लव जिहाद प्रकरण के उजागर होने के बाद से किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) की मुश्किलें समाप्त होने का नाम नहीं ले रही हैं। संस्थान के पैथोलॉजी विभाग की महिला रेजीेडेंट डॉक्टर द्वारा सहकर्मी मुस्लिम रेजीडेंट डॉक्टर पर कथित यौनशोषण के बाद धर्मान्तरण का दबाव बनाने के आरोपों से शुरू होकर दूसरे आरोपों की कडि़यां जुड़ती रहीं, जिसमें एक आरोप था कुलपति के ओएसडी पद पर नियुक्त सैय्यद अख्तर अब्बास की नियमविरुद्ध नियुक्ति तथा बिना पात्रता के पेंशन व अन्य लाभ देना। इस प्रकरण में शासन से पत्रों के जरिये पूछताछ तो पहले से ही जारी थी। अब शासन ने बाकायदा समिति बनाकर जांच का ऐलान किया है, खास बात यह है कि न सिर्फ ओएसडी बल्कि कई और कार्मिकों को नियमविरुद्ध लाभ दिये जाने की भी जांच होगी। जांच के लिए विशेष सचिव की अध्यक्षता में समिति गठित की गयी है।

चिकित्सा शिक्षा विभाग की सचिव सारिका मोहन द्वारा जारी कार्यालय ज्ञाप में कहा गया है कि केजीएमयू में तदर्थ रूप से नियुक्त सैय्यद अख्तर अब्बास सहित अनेक कार्मिकों का विनियमितीकरण किये बिना ही उनका स्थायीकरण एवं पदोन्नति किये जाने तथा नियम विरुद्ध सेवानिवृत्तिक लाभ व पेंशन प्रदान किए जाने संबंधी शिकायतों की जाँच केजीएमयू अधिनियम की धारा 13 के अंतर्गत कराए जाने के लिए शासन द्वारा जांच समिति गठित की गयी है। जांच समिति की अध्यक्ष विशेष सचिव चिकित्सा शिक्षा उत्तर प्रदेश शासन कृतिका शर्मा को तथा वित्त नियंत्रक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग इसके सदस्य नियुक्त किये गये हैं।