-देश और दुनिया भर से आये 7000 प्रतिभागियों का नयी दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में लगा जमावड़ा
-डॉ सैमुअल हैनिमैन की 269वीं जयंती पर आयोजित भव्य समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
-रिसोर्स पर्सन के रूप में आमंत्रित डॉ गिरीश गुप्ता ने सिस्टिक हाइग्रोमा पर किया गया शोध प्रस्तुत किया

सेहत टाइम्स
लखनऊ। होम्योपैथी की बेहतरी के लिए अनुसंधान कार्य को सशक्त बनाकर हमें अपनी दक्षता बढ़ानी होगी, इसके साथ ही होम्योपैथिक से जुड़े सभी संघों को एक साथ आकर एक आवाज उठानी होगी, जो नियामक अधिकारियों और आयुष मंत्रालय द्वारा सुनी जा सके। ये वे बातें हैं जो होम्योपैथी के जनक डॉ सैमुअल हैनिमैन की 269वीं जयंती, 10 अप्रैल विश्व होम्योपैथी दिवस 2024 के मौके पर नयी दिल्ली में यशोभूमि इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में कही गयीं, इस सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शामिल हुईं। दो दिवसीय 10-11 अप्रैल सम्मेलन का आयोजन आयुष मंत्रालय, राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग (एनसीएच), केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद (सीसीआरएच) और राष्ट्रीय होम्योपैथी संस्थान (एनआईएच) द्वारा किया गया था।

दुनिया में होम्योपैथिक डॉक्टरों के सबसे बड़े संघ होम्योपैथिक मेडिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एचएमएआई) के द्वारा समर्थित इस सम्मेलन के बारे में जानकारी देते हुए एचएमएआई के राष्ट्रीय महासचिव डॉ.ए.के.गुप्ता ने बताया कि अनुसंधान को सशक्त बनाना और दक्षता बढ़ाना इस सम्मेलन का विषय था, सम्मेलन में लगभग 7000 होम्योपैथिक डॉक्टरों, छात्रों, शोधकर्ताओं ने भाग लिया, जिनमें विदेशी प्रतिनिधि नीदरलैंड, स्पेन, कोलंबिया, कनाडा और बांग्लादेश से भी थे।
इस मौके पर संगोष्ठी होम्योपैथी में चुनौतियाँ – होम्योपैथिक व्यावसायिक संघों की भूमिका का आयोजन किया गया डॉ. जे.डी. दरयानी और डॉ. ए.के. द्विवेदी की अध्यक्षता में आयोजित इस चर्चा में इसके पैनलिस्ट डॉ.ए.के.गुप्ता, डॉ.निर्मलजीत सिंह, डॉ. सैयद तनवीर हुसैन, डॉ. राजेश आरएस और और डॉ. धीरज प्रेमकुमार पैनलिस्ट क्रमशः एचएमएआई, एचसीआई, आईआईएचपी, आईएचके और आईएचएमए होम्योपैथिक एसोसिएशन से थे। चर्चा का संचालन डॉ. शाजी कुमार और अमित श्रीवास्तव, सीसीआरएच ने किया।

इस कॉन्फ्रेंस में लखनऊ के गौरांग क्लीनिक एंड सेंटर फॉर रिसर्च के चीफ कंसलटेंट डॉ. गिरीश गुप्ता को रिसोर्स पर्सन के रूप में आमंत्रित किया गया था। इस मौके पर डॉ गिरीश ने सिस्टिक हाइग्रोमा का होम्योपैथिक दवाओं से उपचार पर किये गए अपने शोध को प्रस्तुत किया। उपचार के साक्ष्य सहित परिणामों के साथ दिए गए प्रेजेंटेशन में उन्होंने दिखाया कि सिस्टिक हाइग्रोमा के डायग्नोज 12 केसेस में अलग-अलग पोटेंसी में सिंगल होम्योपैथिक दवा दी गयी, इनमें 10 केसेस ठीक हो गये। उन्होंने फोटोग्राफ के जरिये दिखाया कि फ़ॉलोअप में हर बार लाभ होने का फर्क साफ़ नज़र आया। अपने प्रेजेंटेशन में उन्होंने कई मॉडल केसेस भी प्रस्तुत किये।
कॉन्फ्रेंस में चुनौतियों के बारे में बहुत उपयोगी विषय और मुद्दे पर चर्चा हुई और उनके संभावित समाधान क्या हो सकते हैं, ये भी सुझाये गये। डॉ.एके गुप्ता ने इस बात पर जोर दिया कि होम्योपैथी और होम्योपैथ की बेहतरी के लिए सभी संघों को एक छतरी के नीचे आने की जरूरत है और एक आवाज उठाने में सक्षम होना चाहिए जिसे नियामक अधिकारियों और आयुष मंत्रालय द्वारा सुना जा सके।
यह सभी ने महसूस किया कि आयुष के राज्य और केंद्रीय नियामक प्राधिकरणों द्वारा उठाए गए नीतियों या कदमों से संबंधित किसी भी मामले पर चर्चा के लिए संघों को आमंत्रित किया जाना चाहिए, जहां होम्योपैथी का उचित प्रतिनिधित्व होना चाहिए। जैसे कि सीसीआरएच द्वारा किया गया अध्ययन एक प्रैक्टिशनर तक पहुंचना चाहिए, जिसे एसोसिएशनों को शामिल करके उनके बीच की खाई को पाटने के लिए किया जा सकता है।

