-चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री के आदेशों का अभी तक पालन नहीं
-चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महानिदेशक ने लिखा प्रमुख सचिव को पत्र
धर्मेन्द्र सक्सेना
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ ज्ञान प्रकाश ने स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र लिखकर अस्पतालों का निरीक्षण करने के लिए अस्पतालों में तैनात प्रभारी चिकित्साधिकारी से कनिष्ठ स्तर के अधिकारी/कर्मचारी को निरीक्षण के लिए न भेजने के निर्देश जारी करने की मांग की है। पत्र में प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ की इस संदर्भ में उठायी गयी मांग पर बीती नवम्बर में बैठक में विभागीय मंत्री द्वारा दिये गये निर्देशों का हवाला दिया गया है।
इस संबंध में महानिदेशक ने प्रमुख सचिव को लिखे पत्र में कहा है कि बीती 6 नवंबर को चिकित्सा स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री की अध्यक्षता में हुई प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों के साथ बैठक में इस सम्बन्ध में निर्देश दिए गए थे। पत्र में लिखा है कि प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ के 13 सितम्बर, 2019 के पत्र में मांग की गयी थी कि अन्य विभाग के किसी भी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा चिकित्सालयों में उपस्थिति का सत्यापन एवं निरीक्षण न करा कर प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा संवर्ग के प्रदेश/मंडल/जिला स्तरीय वरिष्ठ अधिकारियों से ही सत्यापन करवाएं।
पत्र में लिखा गया है कि ऐसा संज्ञान में आया है कि जिला चिकित्सालय, जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों की उपस्थिति के औचक निरीक्षण के लिए अपर जिला अधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, उप जिला मजिस्ट्रेट, कनिष्ठों जैसे तहसीलदार, लेखपाल, कानूनगो द्वारा भी स्वास्थ्य इकाइयों के निरीक्षण और उपस्थिति के कार्य में अमर्यादित आचरण किया जा रहा है।
पत्र में लिखा है कि प्रदेश में प्रदेश, मंडल, जिला, ब्लॉक स्तर पर निदेशक, अपर निदेशक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, मंडलीय संयुक्त निदेशक, मुख्यालय संयुक्त निदेशक, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यरत होते हैं। जिनसे चिकित्सालय के प्रशासन, समय-समय पर निरीक्षण, अनुश्रवण एवं मूल्यांकन का कार्य संपादित कराया जाता है। पत्र में लिखा है कि चिकित्साधिकारियों का ग्रेड वेतन 5400 रुपये से प्रारंभ है तथा ब्लॉक स्तरीय चिकित्सालय के प्रभारी लेवल -3 चिकित्सा अधिकारी होते हैं जिनका ग्रेड वेतन 7600 होता है, ऐसी परिस्थितियों में कनिष्ठ स्तर के अधिकारियों द्वारा किसी भी स्तर का निरीक्षण अधिकारियों के मनोबल को न सिर्फ गिराता है बल्कि उनके महत्वपूर्ण दायित्वों को भी प्रभावित करता है।
पत्र में लिखा है कि निम्न ग्रेड के अधिकारियों द्वारा प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग के चिकित्सा अधिकारियों की उपस्थिति सत्यापित किए जाने एवं किसी भी प्रकार के निरीक्षण किए जाने का कोई औचित्य नहीं है इस संबंध में 20 नवंबर को निर्गत किए गए 6 नवम्बर को हुई बैठक के कार्यवृत्त में मंत्री द्वारा शासन स्तर से जिला अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए जाने के लिए कार्यवाही करने के आदेश पारित किए गए हैं। अभी तक ऐसे आदेश पारित नहीं हुए हैं इसलिए मंत्री के आदेशानुसार निर्देश जारी करने का अनुरोध प्रमुख सचिव से किया गया है।
