० मेडिसिन वाले मरीजों को स्क्रीनिंग के बाद ही भेजा जायेगा उनकी जरूरत के विशेषज्ञों के पास
० फैमिली मेडिसिन विभाग का गठन, डॉ नरसिंह वर्मा को बनाया गया विभागाध्यक्ष
० ओपीडी ब्लॉक की चौथी मंजिल पर फैमिली मेडिसिन विभाग की ओपीडी में होगी स्क्रीनिंग

धर्मेन्द्र सक्सेना
लखनऊ। विचार कीजिये कि एक मरीज अपनी किसी समस्या को लेकर आया, सबसे पहले वह या उसके साथ आया व्यक्ति परचा बनवाने के लिए लाइन में लगा, इसके बाद वह अपनी समझ से चिकित्सक को दिखाने के लिए चिकित्सक के यहां परचा लगा दिया, करीब तीन घंटे बाद जब उसका नम्बर आया तो डॉक्टर ने देखकर कहा कि तुम्हारी समस्या का इलाज यहां नहीं, फलां डॉक्टर के पास है। यानी अब फलां डॉक्टर के पास फिर से लाइन लगकर तीन घंटे का इंतजार।
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में यह नजारा अक्सर होता है। यहां की ओपीडी में करीब 10000 से 12000 मरीज रोज आते हैं। मरीजों को भीड़ के कारण होने वाली दिक्कत से बचाने के लिए संस्थान में फैमिली मेडिसिन विभाग की स्थापना की गयी है। इसका मुखिया फीजियोलॉजी विभाग के प्रो नरसिंह वर्मा को बनाया गया है। इस विभाग की ओपीडी चौथी मंजिल पर होगी जिसमें फीजियोलॉजी विभाग, फार्माकोलॉजी विभाग, एसपीएम विभाग, एनॉटमी विभाग के रेजीडेंट्स की यहां ड्यूटी लगायी जायेगी, इन रेजीडेंट्स की सहायता के लिए इन विभागों के सीनियर फैकल्टी की ड्यूटी भी लगायी जायेगी। इस बारे में ‘सेहत टाइम्स’ ने डॉ नरसिंह वर्मा से विशेष वार्ता की।
इस तरह व्यवस्थित होगी भीड़़
डॉ वर्मा ने बताया कि इस व्यवस्था के लागू होने के बाद की स्थिति यह होगी कि मरीज जब परचा बनवायेगा उसके बाद सर्जरी वाले मरीजों को छोड़कर शेष दवाओं से इलाज वाले रोगों के मरीजों को सबसे पहले नये स्थापित हो रहे फैमिली मेडिसिन विभाग की ओपीडी में भेजा जायेगा। मरीजों को जल्दी उपचार के लिए यहां सीनियर चिकित्सकों की देखरेख में रेजीडेंट चिकित्सकों के आठ काउंटर बनाये जायेंगे, हर काउंटर पर एक रेजीडेंट चिकित्सक मौजूद रहेगा। रेजीडेंट चिकित्सक इन मरीजों को देखेंगे अगर मरीज को साधारण बीमारी है तो उन्हें दवा वहीं से लिख दी जायेगी और अगर किसी विशेषज्ञ की आवश्यकता है तो उसे उसकी बीमारी से सम्बन्धित विशेषज्ञ के पास भेज दिया जायेगा। आपको बता दें कि एक मोटे अनुमान के अनुसार केजीएमयू में लगभग 40 फीसदी मरीज ऐसे आते हैं जिन्हें विशेषज्ञ की जरूरत नहीं होती है, उनका इलाज एमबीबीएस डॉक्टर भी कर सकते हैं। इस तरह से 40 फीसदी मरीजों का उपचार इन रेजीडेंट्स चिकित्सकों द्वारा किये जाने से जहां इन मरीजों को लम्बी लाइनों से निजात मिलेगी वहीं विशेषज्ञों के पास दिखाने वाले मरीजों को भी लम्बी लाइनों में इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
डॉ वर्मा बताते हैं कि विभाग के तहत ओपीडी व्यवस्था के लिए एक कमेटी बनायी गयी है इसके संयोजक डॉ संदीप भट्टाचार्य तथा उप संयोजक डॉ श्याम सिंह चौधरी को बनाया गया है, इनके अलावा फिजियोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो सुनीता तिवारी, एनाटॉमी विभाग की एचओडी प्रो पुनीता मानिक, कम्युनिटी मेडिसिन विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो मोनिका अग्रवाल तथा फार्मोकोलॉजी विभाग के डॉ आमोद कुमार सचान इस कमेटी में शामिल हैं।
डॉ नरसिंह वर्मा ने कहा कि इस नयी व्यवस्था के लिए तैयारियां तेज कर दी गयी हैं, जल्दी ही व्यवस्था को लागू किया जायेगा।
