राजभवन में 26 वर्षों की लगातार सेवा के बाद हुए सेवानिवृत्त

लखनऊ। इक्कीसवी शताब्दी के आरम्भ में 24 फरवरी, 2001 को उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल विष्णुकांत शास्त्री की प्रेरणा से राजभवन में दुर्लभ औषधीय पौधों की धन्वन्तरि वाटिका की स्थापना में मुख्य भूमिका निभाने वाले डॉ शिवशंकर त्रिपाठी का कहना है कि मुझे गर्व है कि राजभवन में स्थापित इस दुर्लभ औषधीय पौधों की धन्वन्तरि वाटिका स्थापित करने का सौभाग्य मुझे मिला।
‘सेहत टाइम्स’ से विशेष वार्ता में उन्होंने कहा कि वर्ष 2001 में तत्कालीन राज्यपाल विष्णुकांत शास्त्री ने आम लोगों में औषधीय पौधे घरों में लगाने को प्रोत्साहन देन के लिए राजभवन स्थित गृह वाटिका में औषधीय पौधों की वाटिका स्थापित करने की इच्छा जतायी। इस वाटिका का नाम आयुर्वेद के प्रवर्तक भगवान धन्वन्तरि के नाम पर इसका नाम रखा। इसी के बाद शास्त्री जी की इस इच्छा को पूरा करने का सौभाग्य जो मुझे मिला, यह मेरी बहुत बड़ी उपलब्धि है।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से आयुर्वेद की ओर लोगों का बढ़ता रुझान निश्चित रूप से स्वागतयोग्य है। उन्होंने कहा कि लोगों को अपने घरों में औषधीय पौधे लगाने के लिए प्रेरित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रथम नागरिक यानी राज्यपाल के आवास राजभवन में लगे औषधीय पौधों से प्रेरणा लेकर इस तरह के पौधे अन्य स्थानों पर भी लगें तो प्रदेश की सेहत दुरुस्त रखने की दिशा में यह अच्छा कदम होगा। आपको बता दें कि इस वाटिका में पारिजात, रुद्राक्ष, हरड़, बहेड़ा जैसी अनेक औषधियों के दो सौ से ज्यादा पेड़ लगे हैं।
डॉ त्रिपाठी गत दिवस 31 मई को सेवानिवृत्त हुए हैं। आपको बता दें कि 26 वर्षों तक राजभवन में सेवायें देने वाले राजभवन आयुर्वेदिक चिकित्सालय के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ शिवशंकर त्रिपाठी की सेवानिवृत्ति पर उनको राज्यपाल राम नाईक ने राजभवन में आयोजित एक विदाई समारोह में भावभीनी विदाई दी। इस मौके पर धन्वन्तरि वाटिका के बारे में श्री नाईक ने भी कहा कि राजभवन आने वाले आगुन्तक यहाँ स्थापित दुर्लभ औषधीय पौधों की धन्वन्तरि वाटिका से बहुत प्रभावित होते हैं। आयुर्वेद के छात्र एवं अनुसंधान करने वालों के लिए औषधीय पौधों को एक स्थान पर देखने और जानने हेतु धन्वन्तरि वाटिका आदर्श वाटिका है। स्वयं आगे बढ़कर धन्वन्तरि जयंती पर स्वास्थ्य की दृष्टि से जनोपयोगी ‘शतायु की ओर’ पत्रक का प्रकाशन डॉ त्रिपाठी को विशिष्ट बनाता है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर गत दो वर्षों से राजभवन में आयोजित हो रहे कार्यक्रमों में डॉ त्रिपाठी ने महत्वपूर्ण योगदान किया है।
समारोह में राज्यपाल ने डॉ त्रिपाठी का अभिनन्दन करते हुये कहा कि डॉ शिव शंकर त्रिपाठी आयुर्वेद के बहुत अनुभवी चिकित्सक हैं, जिन्होंने न केवल चिकित्साधिकारी के रूप में कार्य किया बल्कि आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार में भी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया है। 33 वर्ष की लम्बी शासकीय सेवा में डॉ त्रिपाठी को 26 साल राजभवन में रहते हुये 8 राज्यपालों के साथ कार्य करने का अनुभव है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल ही नहीं बल्कि राजभवन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों और उनके परिजनों से भी डा त्रिपाठी का सहृदयपूर्ण व्यवहार रहा है।
विदाई समारोह में राज्यपाल ने डॉ शिव शंकर त्रिपाठी को पुष्प गुच्छ, अंग वस्त्र, प्रशस्ति पत्र और उपहार भेंट कर उनके उज्ज्वल भविष्य, स्वस्थ एवं दीघार्यु होने की शुभकामनाएं दीं।
आपको बता दें कि डॉ शिव शंकर त्रिपाठी वर्ष 1993 में राजभवन में अंशकालिक रूप से तथा वर्ष 1996 में पूर्णकालिक रूप से आयुर्वेद चिकित्सक के रूप में सम्बद्ध हुये थे। राजभवन में आयुर्वेदिक चिकित्सालय की स्थापना के पश्चात् डॉ त्रिपाठी पूर्णकालिक आयुर्वेद चिकित्सक के रूप में तैनात हुये। 31 मई 2018 को सेवानिवृत्ति के पश्चात् डॉ त्रिपाठी को एक वर्ष की अवधि के लिए पुनर्नियुक्त किया गया था।
डॉ शिव शंकर त्रिपाठी ने अपनी सेवा पर प्रकाश डालते हुये कहा कि उनका सौभाग्य है कि उन्हें राजभवन में कार्य करने का अवसर मिला। कार्य करते हुये उन्होंने सदैव अच्छा करने तथा दूसरों की मदद करने का प्रयास किया। डॉ शिव शंकर त्रिपाठी ने राज्यपाल एवं उनकी पत्नी कुंदा नाईक, राजभवन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के सहयोग के लिये धन्यवाद दिया।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव राज्यपाल हेमन्त राव एवं विशेष सचिव डॉ अशोक चन्द्र ने भी डॉ शिव शंकर त्रिपाठी को सराहनीय सेवाओं के लिए बधाई देते हुये, उनके स्वस्थ जीवन एवं दीर्घायु की कामना की। कार्यक्रम का संचालन अपर विधि परामर्शी कामेश शुक्ल ने किया।
