-बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर

सेहत टाइम्स
लखनऊ। भारत के संविधान के रचयिता डाॅ बीआर अंबेडकर एक बहुआयामी भारतीय प्रतीक थे, जिनका जीवन और कार्य देश के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक परिदृश्य को आकार देते रहते हैं। समाज के हाशिए से उठकर स्वतंत्र भारत के सबसे बड़े नेताओं में से एक बनने का उनका सफर पीढ़ियों को प्रेरित करता रहा है। ये बातें राजधानी लखनऊ के जाने माने समाजसेवी तथा समर विहार वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष केएस एबट ने आलमबाग स्थित समर विहार कालोनी में 76वें गणतंत्र दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहीं।



इस अवसर पर क्षेत्र के प्रतिष्ठित समाजसेवी, भाजपा नेता एवं रामजीलाल सरदार पटेल नगर वार्ड की पार्षद संध्या मिश्रा के पति गिरीश मिश्र सहित क्षेत्र के अन्य गणमान्य नागरिक शामिल हुए। डॉ अंबेडकर के सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि 1947 में भारत की स्वतंत्रता के पश्चात डॉ. बी.आर. अंबेडकर को जवाहरलाल नेहरू की कैबिनेट में देश के प्रथम विधि एवं न्याय मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया। इस क्षमता में उनका सबसे उल्लेखनीय योगदान हिंदू कोड बिल की शुरुआत थी, जिसका उद्देश्य हिंदू मामलों के व्यक्तिगत कानूनों को संहिताबद्ध एवं सुधार करना था, तथा महिलाओं को व्यक्तिगत मामलों में समान अधिकार देना था। हालांकि, बिल को संसद द्वारा पारित नहीं किया जा सका, जिसके कारण वर्ष 1951 में बाबासाहेब ने नेहरू मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया।
केएस एबट ने बताया कि डॉ. अंबेडकर महिला अधिकारों के प्रबल समर्थक थे और उन्होंने उन हिंदूगत कानूनों में सुधार लाने की दिशा में कार्य किया, जिनमें महिलाओं के साथ भेदभाव किया गया था। उन्होंने हिंदू कोड बिल पेश किया, जिसका उद्देश्य विरासत, विवाह और तलाक के मामलों में महिलाओं को समान अधिकार प्रदान करना था। इस अवसर पर रामजीलाल वार्ड के पूर्व पार्षद तथा समाजसेवी गिरीश मिश्रा ने भी गणतंत्र दिवस की महत्व को विस्तार से बताया। समारोह में समर विहार कॉलोनी के सभी गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे। समारोह के समापन के पश्चात उपस्थित सभी सदस्यों एवं बच्चों को मिष्ठान्न वितरित किया गया। इस मौके पर पी सी श्रीवास्तव, आई एस कुलश्रेष्ठ, डॉ पुष्पा श्रीवास्तव, मंजू कपूर, अर्जुन खंडूजा, पी सी शर्मा, एन आर पी सिंह भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में सभी व्यवस्थाएं निपुण सभरवाल द्वारा की गईं।
