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आपकी सीखी हुई यह छोटी सी ट्रेनिंग बचा सकती है 40 फीसदी लोगों की जान

3 से 5 मिनट तक मस्तिष्‍क में खून की रुकी सप्‍लाई बना सकती है जिन्‍दा लाश

अचानक बेहोश हुए व्‍यक्ति के मस्तिष्‍क को तुरंत रक्‍त पहुंचाने के लिए की जाने वाली क्रिया सिखायी

केजीएमयू के एमएससी नर्सिंग स्‍टूडेंट्स के लिए पहली बार बीएलएस कार्यशाला आयोजित

लखनऊ। नर्स चिकित्‍सा व्‍यवस्‍था की रीढ़ होती हैं क्‍योंकि ये हमेशा मरीज और तीमारदार से जुड़ी रहती हैं, यही नहीं समाज में भी इनकी बहुत प्रतिष्‍ठा होती है और इनकी बात बहुत मान्‍य होती है। अस्‍पताल में या किसी भी जगह इमरजेंसी पड़ने पर मरीज की जान बचाने के महत्‍वपूर्ण कार्य को सिखाने के लिए नर्सिंग स्‍टूडेंट के लिए प्रथम बेसिक लाइफ सपोर्ट कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में अचानक मरीज के बेहोश होने की स्थिति में अगर रक्‍त की सप्‍लाई उसके मस्तिष्‍क में नहीं जा रही है, तो उसे तुरंत कैसे सामान्‍य करना चाहिये, यह सिखाया गया।

प्रो विनोद जैन

केजीएमयू के इंस्टीट्यूट ऑफ स्किल के तत्वावधान में अधिष्ठाता छात्र कल्याण, प्रो जीपी सिंह एवं स्किल इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रो विनोद जैन के नेतृत्व में यह ट्रेनिंग एमएससी नर्सिंग के विद्यार्थियों को दी गयी। आयोजित प्रथम बेसिक लाइफ सपोर्ट कार्यशाला में 30 विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया, जिसमें इनकों बीएलएस की प्रयोगात्मक बारीकियां सिखाई गईं। उन्‍होंने बताया कि शुरुआती सिर्फ 3 से 5 मिनट इतने महत्‍वपूर्ण होते हैं कि इस अवधि में अगर व्‍यक्ति को प्राथमिक उपचार मिल गया तो 40 प्रतिशत लोगों की जान बचायी जा सकती है। जाहिर है इतने कम से समय में उपचार वहां मौजूद व्‍यक्ति ही दे सकता है।

 

इस प्रशिक्षण के बारे में पूछने पर डॉ विनोद जैन ने बताया कि दरअसल अचानक बेहोश हुए व्‍यक्ति के लिए शुरुआत के 3 से 5 मिनट अत्‍यन्‍त महत्‍वूपूर्ण होते हैं क्‍योंकि बेहोश होने की स्थिति में अगर मस्तिष्‍क तक रक्‍त की आपूर्ति नहीं हो रही है तो 3 से 5 मिनट बाद मस्तिष्‍क कार्य करना बंद करने लगता है जिससे मरीज की जान भले ही बच जाये लेकिन उसके सभी अंगों के निष्क्रिय होने का पूरा खतरा होता है।

 

3 से 5 मिनट में क्‍या करें

डॉ विनोद जैन ने बताया कि चूंकि 3 से 5 मिनट का समय बहुत कम होता है और इतने समय में पीड़ित को चिकित्‍सक के पास तक ले जाना भी लगभग नामुमकिन है तो ऐसे में यह करना चाहिये कि व्‍यक्ति के बेहोश होते ही कॉल फॉर हेल्‍प यानी चिल्‍ला कर लोगों को सहायता के लिए बुलाते हुए तुरंत व्‍यक्ति के गले में सांस नली के पास हल्‍के हाथों से दबा कर यह चेक करना चाहिये कि वहां पर नस में हरकत हो रही है या नहीं। अगर हरकत हो रही है तो इसका अर्थ है कि मस्तिष्‍क में रक्‍त की सप्‍लाई जा रही है तो सहायता के लिए बुलाये गये लोगों के आते ही मरीज को सीधे डॉक्‍टर के पास ले जाना चाहिये।

 

सांस नली के पास हरकत न हो रही हो तो यह करें

डॉ जैन ने कहा कि अगर गले में सांस नली के पास हल्‍के हाथों से दबाकर देखने से लगे कि हरकत नहीं हो रही है तो तुरंत व्‍यक्ति की छाती को जोर-जोर से दबाना चाहिये तथा मुंह से मुंह लगाकर उसे सांस देनी चाहिये। ऐसा करने से मस्तिष्‍क को जाने वाली नस में रुकी हुई खून की सप्‍लाई फि‍र से शुरू हो जायेगी और उसका मस्तिष्‍क डेड होने से बच जायेगा, इसके बाद उसे चिकित्‍सक के पास ले जायें। डॉ जैन ने बताया कि इन्हीं महत्‍वपूर्ण बातों की जानकारी आज की कार्यशाला में नर्सिंग स्‍टूडेंट्स को दी गयी। डॉ विनोद जैन ने कहा कि नर्सिंग स्टूडेंट्स के लिए इस प्रकार की कार्यशाला निरंतर चलती रहेंगी, जिससे न वह स्वयं प्रशिक्षित होकर लोगों का जीवन बचाएंगे बल्कि अन्य लोगों को प्रशिक्षण देकर जनसामान्य की जीवन रक्षा में सहायता करेंगे। उन्‍होंने बताया कि यह प्रशिक्षण समाज में सभी लोगों को लेना चाहिये क्‍योंकि यह आकस्मिक स्थिति किसके पास कब आ जाये, कुछ नहीं कहा जा सकता है।

 

आज की कार्यशाला में शिक्षक के रूप में डॉ सतीश सिंह एवं डॉ शेफाली गौतम उपस्थित रहे तथा कार्यक्रम का संचालन दुर्गा गिरि, बीनू दुबे और राघवेन्द्र ने किया।