स्वच्छ और हरित पर्यावरण समिति ने मनाया चौथा स्थापना दिवस
लखनऊ। आजकल छोटी-छोटी उम्र में बाल झड़ रहे हैं, लड़कों और लड़कियों दोनों में बांझपन की शिकायतें बढ़ रही हैं, गर्भपात, चिंता जैसे अनेक बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, इसके लिए खानपान, लाइफ स्टाइल जैसे कारणों के साथ ही एक बड़ा कारण वायु प्रदूषण भी है।
यह बात रविवार को केजीएमयू के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. सूर्यकांत ने स्वच्छ और हरित पर्यावरण समिति (सीजीईएस) के स्थापना दिवस समारोह पर आयोजित कार्यक्रम में अपने व्याख्यान में कही। राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-एनबीआरआई) के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रो सूर्यकांत को विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। उन्होंने बताया कि वायु प्रदूषण से अस्थमा, सीओपीडी, ब्रोंकाइटिस, निमोनिया, रक्तचाप का अधिक खतरा, कैंसर, मानसिक मंदता, चिंता, बालों का झड़ना, बांझपन, गर्भपात जैसी समस्याएं होती हैं।
जीवन के अस्तित्व से जुड़ी वायु प्रदूषण की समस्या के समाधान के बारे में उन्होंने कहा कि इसके लिए कई कदम उठाने होंगे। इन कदमों में जनता के साथ ही सरकारों को भी अपनी सक्रिय और लक्ष्य निर्धारित कर भागीदारी निभानी होगी। उन्होंने कहा कि वनों की कटाई पर प्रतिबंध लगाना होगा जबकि दूसरी ओर अधिक से अधिक पौधों के रोपण करना होगा। इसके साथ ही शहरीकरण प्रक्रिया को कम कर, शहरी क्षेत्रों से कारखानों को हटाकर उसमें उच्च प्रौद्योगिकी का उपयोग कर, वाहनों का न्यूनतम उपयोग और सीएनजी वाहनों को बढ़ावा देकर, सौर ऊर्जा प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देकर वायु प्रदूषण को कम किया जा सक्ता है।
स्वच्छ और हरित पर्यावरण समिति के चौथे स्थापना दिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रख्यात वैज्ञानिक, शिक्षाविद्, पर्यावरणविद्, सामाजिक कार्यकर्ता, शोधकर्ता और अन्य गण उपस्थित थे। पूर्व महानिदेशक, सीएसआईआर और सचिव, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग, भारत सरकार और वर्तमान में भटनागर फेलो, सीएसआईआर डॉ. गिरीश साहनी मुख्य अतिथि थे और डॉ. सूर्यकांत के साथ ही पूर्व प्रमुख, लारी कार्डियोलॉजी पद्मश्री डॉ. मंसूर हसन और निदेशक, इंस्टीट्यूट ऑफ करियर स्टडीज, लखनऊ डॉ.अमृता दास गेस्ट ऑफ ऑनर थे।
इस वर्ष सीजीईएस स्थापना दिवस का थीम ‘पर्यावरण और स्वास्थ्य’ था। वक्ताओं ने लोगों से बेहतर स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए पर्यावरण की रक्षा के लिए सुनियोजित और संयुक्त प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने पिछले तीन वर्षों के दौरान आयोजित छात्रों और महिलाओं सहित आम जनता से जुड़े विभिन्न जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से सीजीईएस द्वारा इस संबंध में की गई पहलों की प्रशंसा की। इस अवसर पर सीजीईएस द्वारा प्रकाशित एक न्यूज़लेटर भी जारी किया गया जिसमें विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों और भविष्य के कार्यक्रमों के अलावा प्रख्यात वैज्ञानिकों के लेख भी प्रकाशित किए गए हैं।
इस अवसर पर बोलते हुए, मुख्य अतिथि डॉ. गिरीश साहनी ने कहा कि आज, सभ्यता वास्तव में एक अस्तित्ववादी क्रॉस-रोड के उच्च स्थान पर स्थित है। वर्तमान मे दो प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हो रही है: सभ्यतागत संघर्ष और पर्यावरणीय तबाही, और हम इसे कैसे टाल सकते हैं। डॉ. साहनी ने आगे कहा कि सभी प्रमुख पर्यावरणीय मुद्दे, जैसे सार्वजनिक स्वास्थ्य, शहरी फैलाव, अपशिष्ट निपटान, जनसंख्या, पानी की कमी, वनों की कटाई, जैव विविधता की हानि, जलवायु परिवर्तन आदि सभी के लिए चिंता का विशय बने हुये हैं।
लोग स्वयं सोचें कि वे कहां योगदान कर सकते हैं
डॉ. साहनी ने आगे कहा कि समाज में सभी परिवर्तन समाज में व्यक्तियों से ही उत्पन्न होते हैं और हर एक को ऐसे जरूरी बदलाव में मदद करने के लिए आशावादी, शामिल और जागरूक रहना चाहिए। डॉ. साहनी ने लोगों से आह्वान किया कि वे यह जानने का प्रयास करें कि वे व्यावहारिक रूप से कहां योगदान कर सकते हैं ताकि सांस्कृतिक और सामाजिक स्तर पर सकारात्मक सुधार हो और औद्योगीकरण के परिणामस्वरूप पर्यावरणीय क्षति के दुष्प्रभाव उलट हो जाएं। उन्होंने इस सम्बंध मे शीघ्र एक कार्य योजना बनाने का भी सुझाव दिया। डॉ.अमृता दास ने स्वास्थ्य पर पर्यावरण प्रदूषण के प्रभावों पर ध्यान केंद्रित किया और कहा कि हमें युद्ध स्तर पर इस समस्या को कम करने के लिए रणनीति तैयार करनी चाहिए। डॉ. अमृता दास ने अपने सम्बोधन मे मुख्य रूप से स्वास्थ्य पर ‘बाहरी’और ‘आंतरिक’ पर्यावरण प्रदूषण दोनों के प्रभावों पर अपनी बात रखी और कहा कि हमें अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए युद्ध स्तर पर रणनीति तैयार करनी चाहिए। डॉ. दास ने विभिन्न प्लेटफार्मों के माध्यम से जानकारी का प्रसार करके लोगों में सामान्य जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता पर बल दिया। इससे पहले, सीजीईएस के अध्यक्ष इंजी. सुमेर अग्रवाल ने अतिथियों का स्वागत किया और समिति के उद्देश्यों को प्रस्तुत किया। सीजीईएस के महासचिव डॉ. एससी शर्मा ने आगामी महीनों में सीजीईएस द्वारा की जाने वाली भावी गतिविधियों सहित प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की । डॉ. एस.बारिक, निदेशक, सीएसआईआर-एनबीआरआई ने अपनी टिप्पणी में मानव जाति के कल्याण के लिए जैव विविधता के संरक्षण में अपने संस्थान की भूमिका के बारे में संक्षिप्त रूप में बताया। प्रो. योगेश शर्मा, पूर्व प्रमुख, वनस्पति विज्ञान विभाग, एलयू, प्रो. नवीन अरोड़ा, पर्यावरण विभाग के प्रमुख, बीबीएयू ने भी इस अवसर पर क्रमशः बात की। कु. शालिनि ने कार्यक्रम का संचालन किया। अंत में डॉ. एके सिंह ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा। इस अवसर पर एल.के. झुनझुनवाला, एन.के. त्रिवेदी, एम.एस. गुलाटी, प्रो.एम. ए. खालिद, प्रो. राणा प्रताप सिंह, डॉ एस. आर. सिंह, डॉ. प्रबोध त्रिवेदी, डॉ. रितु त्रिवेदी, डॉ. विनय त्रिपाठी, आलोक पांडे, डॉ. मधु प्रकाश श्रीवास्तव, राधे श्याम दीक्षित और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।
