ऑनलाइन स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं के नाम पर दुकान चला रहे लोगों पर शिकंजा

-गैरकानूनी तरीके से ऑनलाइन स्‍वास्‍थ्‍य सेवा देने वालों पर कार्रवाई के निर्देश

-केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण के सचिव ने सभी राज्‍यों को भेजा पत्र

-डॉ रोहित जैन की याचिका पर हाईकोर्ट ने पिछले साल अगस्‍त में दिया था आदेश

डॉ रोहित जैन

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र भेजकर गैर कानूनी तरीके से ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवा दे रहे लोगों पर कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। ऐसे लोगों को चिन्हित करके उनके खिलाफ कानूनी धाराओं में कार्रवाई करने के निर्देश भी दिये गये हैं। ये निर्देश डॉ रोहित जैन द्वारा दायर की गई जनहित याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट के दिये जा चुके आदेशों के अनुपालन में दिए गए हैं। एक मोटे अनुमान के मुताबि‍क देश भर में ऐसे हजारों गैरकानूनी ऑनलाइन हेल्‍थ सर्विस उपलब्‍ध कराने वाले पोर्टल चल रहे हैं।  

आपको बता दें कि डॉ रोहित जैन ने पिछले साल दायर अपनी जनहित याचिका में कहा था कि दिल्ली में बड़ी संख्या में ऐसे ऑनलाइन हेल्थ सर्विस एग्रीगेटर्स मौजूद है जो क्लिनिकल स्टेब्लिशमेंट (रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट 2010 का उल्लंघन करते हुए संचालित हो रहे हैं। इसे अगर आसान शब्‍दों में समझा जाये तो ऐसे पोर्टल जिनकी अपनी कोई भी लेबोरेटरी नहीं है, फि‍र भी ऑनलाइन ब्‍लड, यूरिन आदि जांचों को करा रहे हैं। कमीशन पर कार्य करने वाले ये हेल्‍थ सर्विस प्रोवाइडर्स मरीज के रक्‍त आदि का नमूना घर पर ही लेने की सुविधा प्रदान करते हैं, फि‍र उसके बाद उसकी रिपोर्ट भी ऑनलाइन उपलब्‍ध करा देते हैं। जबकि किसी भी प्रकार की चिकित्‍सा सेवा वही व्‍यक्ति दे सकता है जिसका अपना और उस संस्‍थान का क्‍लीनिकल स्‍टेब्लिशमेंट एक्‍ट या राज्‍य सरकार द्वारा बनायी व्‍यवस्‍था में पंजीकरण हो।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव राजेश भूषण द्वारा 19 जनवरी 2021 के पत्र में कहा गया है कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार ऐसे गैर कानूनी तरीके से दी जा रही ऑनलाइन हेल्थ सेवाओं के संचालकों पर कार्यवाही की जाए। पत्र में कहा गया है कि लैबोरेटरीज और अन्‍य चिकित्‍सा सेवाएं देने के लिए क्लीनिकल स्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 में या राज्य सरकार के नियमों के अंतर्गत पंजीकृत होना आवश्यक होता है। पत्र में लिखा है कि मंत्रालय द्वारा भी इस विषय में 21 मई 2018 के नोटिफि‍केशन और 14 फरवरी 2020 के संशोधित नोटिफिकेशन को जारी करके इस बारे में लिखा गया है।

पत्र में कहा गया है कि कुछ ऑनलाइन हेल्थ सर्विस एग्रीगेटर देश के विभिन्न हिस्सों में विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य जांच करा रहे हैं। उनके पोर्टल पर न तो जांच करने वाली लेबोरेटरी का नाम है, न ही उनका रजिस्ट्रेशन है और न ही वह इसके लिए आवश्यक मानक पूरा करते हैं। इसके साथ ही इन ऑनलाइन पोर्टल पर इस लेबोरेटरी में काम करने वाले लोगों का विवरण भी मौजूद नहीं होता है। पत्र में कहा गया है अगर राज्यों में इस तरह के सर्विस प्रोवाइडर सक्रिय है तो यह एक गंभीर मामला है और यह नागरिक की स्वास्थ्य व सुरक्षा से खिलवाड़ है।

पत्र में कहा गया है कि हाईकोर्ट के आदेशानुसार ऐसे गैरकानूनी ढंग से ऑनलाइन स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने वालों के खिलाफ समयबद्ध तरीके से कार्यक्रम बनाकर कार्यवाही करें। पत्र में राज्यों के गृह विभाग से भी ऐसे गैरकानूनी तरीके से ऑनलाइन हेल्थ सर्विस देने वालों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सिविल, क्रिमिनल, सायबर या अन्य कानून के तहत कार्रवाई करना सुनिश्चित करें। पत्र में इस संबंध में की गई कार्रवाई से केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भी सूचित करने को कहा गया है।

ज्ञात हुआ है कि पिछले साल अगस्‍त, 2020 में हाई कोर्ट के आदेशों का क्रियान्‍वयन न होने के चलते डॉ जैन द्वारा कोर्ट के आदेशों की अवमानना करने की याचिका दायर की गयी है, इस पर सुनवाई 29 जनवरी को होगी।