होने से पहले ही अनुवांशिक बीमारियों की पहचान कर न होने देने की तैयारी

करंट ट्रेंड इन जिनोमिक एंड मॉलिक्यूलर मेडिसिन पर पहली इंडो-यूके ट्रेनिंग वर्कशॉप का आयोजन

 

 लखनऊ। क्‍या ही अच्‍छा हो कि अगर किसी व्‍यक्ति को होने वाले रोग के बारे में चिकित्‍सक पहले से ही जान लें तो इससे उस रोग के न होने देने की दिशा में कार्य किया जा सकता है, और इसमें कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों से बचाव और उपचार की दिशा में कदम उठाया जा सकेगा। यही नहीं सबसे ज्‍यादा फायदा अनुवांशिक बीमारियों के शिकार होने वाले लोगों को पहुंच सकता है। कुछ इसी तरह की प्रणाली को डेवलप करने और उसकी जानकारी से चिकित्‍सकों (फि‍जीशियंस) को रूबरू कराने के लिए उत्‍तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पहली इंडो-यूके ट्रेनिंग वर्कशॉप का आयोजन किया गया है। तीन दिवसीय इस कार्यशाला की शुरुआत सोमवार 19 नवम्‍बर को हुई। कार्यशाला का आयोजन किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के मॉलिक्यूलर बायोलॉजी यूनिट सेंटर फॉर एडवांस रिसर्च और जीनोम फाउंडेशन इंग्लैंड यूनाइटेड किंगडम के संयुक्‍त तत्‍वावधान में किया गया है।

 

करंट ट्रेंड इन जिनोमिक एंड मॉलिक्यूलर मेडिसिन के विषय पर आधारित कार्यशाला में भाग लेने आये यूके की कार्डिफ यूनिवर्सिटी के प्रो धावेन्‍द्र कुमार ने अपने सम्‍बोधन में कहा कि जरूरी यह है कि जब किसी मरीज की अनुवांशिक बीमारी का पता चले तो इस बात पर फोकस किया जाये कि चूंकि उस मरीज के परिवार के लोगों को भी भविष्‍य में वह बीमारी हो सकती है। इसलिए उन परिजनों को बीमारी से बचाने की दिशा में इलाज किया जाये। उन्‍होंने बताया कि‍ मान लीजिये किसी महिला को ब्रेस्‍ट कैंसर है तो ऐसी स्थिति में यह देखा गया है कि उस महिला से जुड़ी परिवार की अन्‍य फीमेल जैसे बेटी, बहन, बेटी की बेटी को भी यह होने का खतरा है यह जरूर है कि मरीज से रिश्‍ते से हिसा‍ब से बीमारी होने की संभावना का प्रतिशत घटता जाता है। इसी प्रकार लंग्‍स, कोलन, ओवरी के साथ ही पुरुषों-महिलाओं के अन्‍य अंगों के कैंसर में भी यही बात लागू होती है। डॉ धावेन्‍द्र कुमार ने इस बारे में चल रही कई रिसर्च के बारे में भी बताया। जिनमें कोशिश की जा रही है कि जेनेटिक स्‍तर पर रोग को बढ़ने से रोका जा सके।

इस बारे में कार्यशाला की आयोजक केजीएमयू विभाग के मॉलीक्‍यूलर बायोलॉजी की असिस्‍टेंट प्रोफेसर डॉ नीतू सिंह ने बताया कि केजीएमयू की मॉलिक्यूलर बायोलॉजी यूनिट सेंटर फॉर एडवांस रिसर्च में हम लोग इस दिशा में कार्य कर रहे हैं। उन्‍होंने बताया कि एक स्‍टडी में पाया गया है कि ओरल कैंसर में पाये जाने वाले मॉलीक्‍यूल्‍स लंग्‍स और अन्‍य अंगों के कैंसर में भी पाये गये हैं। चूंकि ओरल कैंसर को ठीक करने की दिशा में सफलता मिल चुकी है ऐसे में ओरल कैंसर में दी जाने वाली दवा को लंग्‍स और अन्‍य कैंसर के रोगियों के उपचार में सफलता तलाशी जा सकती है।  डॉ नीतू सिंह ने बताया कि ह्यूमन जींस को लेकर उनके विभाग द्वारा काफी रिसर्च की जा चुकी है जिसका लाभ जल्दी मरीजों को मिलेगा इसके साथ ही उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा अन्य बीमारियों को लेकर भी रिसर्च जारी है जिसका लाभ आने वाले समय में मरीजों को मिलेगा।

 

इस कार्यशाला में केजीएमयू के पूर्व कुलपति प्रोफेसर डीके गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, इस कार्यशाला की अध्यक्षता केजीएमयू के कुलपति कुलपति प्रोफेसर एमएलबी भट्ट द्वारा की गई। इस अवसर पर कुलपति ने सेंटर फॉर एडवांस्ड रिसर्च फॉर मॉलिक्यूलर यूनिट को को बढ़ावा देने के लिए हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया इसके साथ ही उन्होंने इस विभाग द्वारा की गयी नयी रिसर्च एवं कार्यों के बारे में जानकारी दी। मुख्य अतिथि प्रोफेसर डीके गुप्ता ने बताया कि उन्होंने एवं विभाग की डॉ नीतू सिंह ने इस विभाग की स्थापना की इसके साथ ही उन्होंने बताया कि आज विभाग मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक की तरफ तेजी से बढ़ रहा है।

 

 

इस कार्यशाला में प्रोफेसर रीना दास ने ब्लड जेनेटिक डिसऑर्डर रक्त संबंधित कौन-कौन सी बीमारियों पर रिचार्ज जारी है एवं उससे संबंधित बीमारी के बारे में जानकारी दी। इस कार्यशाला में मुख्य रूप से एरा मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ अब्बास अली मेहंदी, आईआईटीआर के निदेशक डॉक्टर आलोक धावन, निदेशक  सीबीएमआर, एसजीपीजीआई डॉ राजा रॉय लखनऊ, डॉ अनिल बालापुरे समेत भोपाल एम्स, जोधपुर एम्स, ऋषिकेश एम्स, एसआरएम यूनिवर्सिटी, चेन्नई के साथ ही मुंबई, गुजरात एवं केजीएमयू के छात्र-छात्राएं एवं डॉक्टर प्रोफेसर उपस्थित रहे।