-मंत्रालय ने विभिन्न जर्नर्ल्स में छपे शोध-स्टडी के पेपर्स को माना आधार
–‘सेहत टाइम्स’ ने खबर के साथ प्रसारित किया था डॉ गिरीश गुप्ता का इंटरव्यू

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सेहत टाइम्स ब्यूरो
लखनऊ। कोविड के बाद होने वाली दिक्कतों में एक ब्लैक फंगस यानी म्यूकरमाइकोसिस से जूझ रहे मरीजों का इलाज अब होम्योपैथिक औषधियों से किये जाने के लिए भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने स्वीकृति देते हुए इसके बचाव एवं उपचार में प्रयोग की जाने वाली दवाओं व अन्य सावधानियों के लिए गाइडलाइन्स जारी कर दी हैं। इन गाइडलाइन्स को 21 विशेषज्ञों की टीम से मिली सूचना के आधार पर तैयार किया गया है। इन 21 विशेषज्ञों में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित गौरांग क्लीनिक एंड सेंटर फॉर होम्योपैथिक रिसर्च के फाउंडर व चीफ कन्सल्टेंट डॉ गिरीश गुप्ता भी शामिल हैं।

मंत्रालय द्वारा सभी होम्योपैथिक प्रैक्टिशनर्स के लिए जारी इस सूचना में कहा गया है कि वे फंगस पर हुई सफल रिसर्च व स्टडी के बाद अनुशंसित दवाओं का प्रयोग सभी सावधानियां बरतते हुए लक्षणों के आधार पर ब्लैक फंगस के डायग्नोस्ड और सस्पेक्टेड केसेज के प्रबंधन में कर सकते हैं। जारी सूचना में राइनो ऑरबिटोसेरेब्रल म्यूकरमाइकोसिस, पल्मोनरी म्यूकरमाइकोसिस, क्यूटेनियस म्यूकरमाइकोसिस,, गैस्ट्रोइन्टस्टाइनल म्यूकरमाइकोसिस, सेप्टीसीमिया, रेस्टोरेटिव परपस के लिए विभिन्न प्रकार की होम्योपैथिक दवाओं को रिकमंडेड किया गया है, साथ ही यह भी कहा गया है कि इसके अतिरिक्त अलग-अलग लक्षणों के अनुसार दूसरी दवायें भी दी जा सकती हैं।
मंत्रालय द्वारा जारी सूचना में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर में संक्रमण की तीव्रता इतनी तेज रही जिससे मरीजों की रोग प्रतिरोधक प्रणाली कमजोर हो गई और दूसरी बीमारियों ने उन्हें जकड़ लिया ऐसी ही एक बीमारी फंगल इन्फेक्शन भी है, जिसके केस पाये जा रहे हैं। एक उष्णकटिबंधीय देश होने के कारण भारत में फंगल के विकास के लिए अनुकूल तापमान और आर्द्रता है।
शोधकर्ता/विशेषज्ञों की सूची

सूचना में कहा गया है कि विभिन्न प्रकार के फंगल इन्फेक्शन विशेषकर इस समय बढ़ रहे ब्लैक फंगस (म्यूकरमाइकोसिस) के केस भी होम्योपैथिक चिकित्सकों ने ठीक किए हैं। मंत्रालय ने कहा है कि वरिष्ठ चिकित्सकों एवं शोधकर्ताओं द्वारा किए गए फंगल के इलाज के अनुभव के आधार पर इस सूचना को तैयार किया गया है इसके तहत सस्पेक्टेड एवं डायग्नोज केसेस का उपचार किया जा सकेगा।
सूचना में कहा गया है कि ब्लैक फंगल के ज्यादातर मरीज गंभीर स्थिति में होने के बाद अस्पताल में भर्ती हैं, ऐसी स्थिति में उनके चल रहे इलाज के साथ डॉक्टरों की देखरेख में होम्योपैथिक दवायें दी जा सकती हैं। सूचना के अनुसार होम्योपैथिक उपचार में कुछ चीजें कुछ शर्तों को पूरा करना आवश्यक है। होम्योपैथिक उपचार शुरू करने से पूर्व योग्य चिकित्सक की सलाह आवश्यक है। इसके अतिरिक्त सरकारी दिशा निर्देश के अनुसार मध्यम से गंभीर मामलो में उच्च चिकित्सा केंद्र पर मरीज को जाना अनिवार्य होगा। जिन मरीजों का हाइपरटेंशन, डायबिटीज आदि का इलाज चल रहा है, वे अपने फैमिली फिजिशियन से संपर्क में बने रहे। होम्योपैथिक फिजिशियन के लिए दवा का नाम, उसकी पोटेंसी और उसकी खुराक होम्योपैथिक के सिद्धांतों के आधार पर देना आवश्यक होगा।
इन संदर्भों के आधार पर जारी की गयी हैं गाइडलाइंस

इसके अतिरिक्त मरीजों को कोविड में बरती जाने वाली सावधानियों जैसे मास्क लगाना, शारीरिक दूरी रखना तथा हाथों को साफ रखना, कोविड से बचाव का टीका लगवाना भी अनिवार्य है, इसके साथ ही आईसीएमआर द्वारा जारी बचाव के लिए क्या करें क्या ना करें के सुझावों पर अमल करना आवश्यक होगा।
सूचना में सभी दवाओं को योग्य होम्योपैथिक फिजीशियन की सलाह और होम्योपैथिक सिद्धांतों के अनुसार देने की सलाह दी गई है इसके अतिरिक्त इसमें मरीज को साफ सफाई से रहने तथा शुद्ध खान पान के बारे में भी सलाह दी गई है।
जिन विशेषज्ञों के शोध, सलाह के आधार पर एडवाइजरी तैयार की गयी है उनमें प्रो वीके गुप्ता, डॉ एन राधा, डॉ एमपी आर्या, डॉ केएम धवाले, डॉ आलोक पारीक, डॉ नंदिनी शर्मा, डॉ अश्विनी कुमार द्विवेदी, प्रो कंजाक्षा घोष, डॉ एसके भट्टाचार्या, डॉ एन मोहंती, डॉ एलके नंदा, डॉ गिरीश गुप्ता, डॉ संगीता दुग्गल, डॉ अनिल खुराना, डॉ सुभाष सिंह, डॉ एसआर चिंता, डॉ रचना पालीवाल, डॉ बिन्दु शर्मा, डॉ प्रवीन ओबेराय, प्रो एस प्रवीन कुमार, डॉ श्रीनिवास रेड्डी शामिल हैं।
