केजीएमयूआईएस ने एटीएलएस के दो प्रशिक्षण कार्यक्रमों के बीच मनाया गणतंत्र दिवस

-प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण देने के लिए 25 से 27 जनवरी तक आयोजित किये गये थे दो कोर्स

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ स्किल (केजीएमयूआईएस) द्वारा इस साल गणतंत्र दिवस अलग ही तरीके से मनाया गया। इंस्‍टीट्यूट द्वारा 25 जनवरी से एडवांस ट्रॉमा लाइफ सपोर्ट के प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण के दो कार्यक्रम शुरू किये गये थे, जिनका आज 27 जनवरी को समापन हुआ। पिछले साल इस तरह के तीन कोर्स का एक ही समय में आयोजन किया गया था, जो कि किसी संस्‍थान द्वारा रिकॉर्ड है।

तीन दिवसीय कार्यक्रम का उद्घाटन 25 जनवरी को चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 एम0एल0बी0 भट्ट ने किया था। समापन कार्यक्रम के अवसर पर कुलपति ने सभी प्रतिभागियों को कोर्स पूरा करने पर बधाई देते हुए उन्हें इस बात के लिए प्रेरित किया कि वह अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर अन्य लोगों को प्रशिक्षित करें, जिससे अन्य लोगों को भी इसका लाभ मिल सके।

इस कार्यक्रम की विशेषता यह थी कि इस कार्यशाला में प्रतिभाग करने वाले प्रतिभागी उत्तर प्रदेश ही नहीं वरन देश के कोने-कोने से आए थे, जिसमें मुंबई, नई दिल्ली, पुडुचेरी, गुजरात, तमिलनाडु, हैदराबाद, भोपाल, गुड़गांव, चंडीगढ़, जाधवपुर, जामनगर, कोलकाता, लखनऊ के कमांड हॉस्पिटल, के0जी0एम0यू0 एवं एस0जी0पी0जी0आई के कुल 24 प्रतिभागी मुख्य रूप से शामिल रहे।

इस अवसर पर कोर्स के निदेशक एवं महात्मा गांधी चिकित्सा विश्वविद्यालय, जयपुर के कुलपति डॉ एम0सी0 मिश्रा ने के0जी0एम0यू0 के एडवांस ट्रॉमा लाइफ सपोर्ट कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि यह देश का एक मात्र ऐसा संस्थान है जहां पर प्रशिक्षकों के लिए एक साथ तीन कोर्स के कार्यक्रम का आयोजन विगत वर्ष किया गया और उसी कड़ी में इस वर्ष दो प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि के0जी0एम0यू0 के एडवांस ट्रॉमा लाइफ सपोर्ट कार्यक्रमों की सराहना समस्त देश में की जाती है।

कार्यक्रम समापन के अवसर पर एडवांस ट्रॉमा लाइफ सपोर्ट के प्रशिक्षक डॉ विनोद जैन ने बताया कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों से सम्पूर्ण देश में ट्रॉमा से होने वाली मृत्यु दर को कम किया जा सकता है।

कार्यशाला में सभी प्रतिभागियों को जीवन रक्षक प्रक्रियाओं के व्यावहारिक एवं क्रियाशील प्रशिक्षण देने के साथ-साथ इस बात पर भी विशेष बल दिया गया कि वह अपने-अपने क्षेत्रों के ट्रॉमा सेंटर को चिन्हित करें और उनकी नेटवर्किंग का प्रयास करें। जिससे एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल रेफर करते समय मरीज को भटकना न पड़े तथा रेफर किये जाने के उपरांत उसे कम से कम समय में उचित उपचार दिया जा सके इसके साथ ही स्थानांतरण के समय मरीज के शरीर को सावधानी के साथ उठाएं जिससे उसका कोई और अंग चोटिल न हो जाए। इस बार प्रतिभागी उत्तर प्रदेश के बाहरी क्षेत्र से भी आए थे तो इस बात पर भी जोर दिया गया कि गरीब से गरीब व्यक्ति को भी एक समान इलाज की सुविधा उपलब्ध हो सके।

कार्यक्रम में प्रशिक्षक के रूप में इंस्टीट्यूट ऑफ स्किल के निदेशक एवं एडवांस ट्रॉमा लाइफ सपोर्ट के प्रशिक्षक डॉ एमसी मिश्रा, डॉ विनोद जैन, पांडिचेरी के डॉ जय प्रकाश, ट्रॉमा सर्जरी विभाग के डॉ समीर मिश्रा, डॉ नेहा ठाकुर, डॉ विकास सिंह, डॉ0 क्षीतिज श्रीवास्तव, डॉ हेमलता वर्मा तथा कोर्स को-ऑर्डिनेटर के रूप में शालिनी गुप्ता थीं।