वंशानुगत दोषों के कारण होने वाली बीमारियों की संभावना को भी खत्‍म करती है होम्‍योपैथी

मानसिक बीमारियां हों अथवा स्‍त्री रोग, सटीक और सस्‍ता इलाज है होम्‍योपैथी में

विश्व होम्योपैथी दिवस की पूर्व संध्या पर ‘जानिए, समझिए और अपनाइए होम्योपैथी’ विषय पर संगोष्ठी

लखनऊ। दुनिया में रोगों के उपचार की अनेक पद्धतियां प्रचलित हैं। पद्धतियों की अपेक्षा होम्योपैथी सरल, सुलभ, दुष्परिणाम रहित अपेक्षाकृत कम खर्चीली एवं दूरगामी लाभदायक परिणामों वाली पद्धति हैं। इसलिए रोगमुक्त होने के लिए सबसे पहले होम्योपैथी से ही उपचार कराना चाहिए।

 

यह विचार होम्‍योपैथिक मेडिसिन बोर्ड के अध्यक्ष प्रो0 (डा0) बी0एन0 सिंह ने होम्योपैथिक साइंस कांग्रेस सोसाइटी द्वारा विश्व होम्योपैथी दिवस की पूर्व संध्या पर बाबा हास्पिटल, मटियारी, चिनहट, लखनऊ के सभागार में जानिए, समझिए और अपनाइए होम्योपैथी विषयक संगोष्ठी को मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि होम्योपैथी शरीर में प्रतिरोधक खमता बढ़ाकर रोगी को स्वस्थ करती है।

 

मुख्य वक्ता के रूप में केन्द्रीय होम्योपैथी परिषद के पूर्व सदस्य एवं वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डा0 अनुरुद्ध वर्मा ने कहा कि होम्योपैथी बैक्टीरिया एवं वायरस से होने वाली तमाम बीमारियों जेसे चिकनपॉक्स, खसरा, मम्प्स, चिकुनगुनिया, डेंगू, स्वाइन फ्लू, जापानी इंसेफलाइटिस आदि की रोकथाम में प्रभावी है। उन्होंने कहा कि होम्योपैथी पुराने एवं नये दोनों तरह के रोगों के इलाज में सक्षम है। यह महिलाओं, बच्चों, वृद्धों में समान रूप से फायदा करती है।

उन्होंने कहा कि होम्यापैथी बच्चों में वंशानुगत दोषों के कारण होने वाली बीमारियों की सम्भावना को समाप्त करती है। उन्होंने कहा कि होम्योपैथी से एलोपैथी में सर्जिकल कहे जाने वाले रोग जैसे साइनस, टांसलाइटिस, ट्यूमर, सिस्ट, फाइब्राइट, प्रोलेप्स ऑफ यूटेरस, गुदा द्वार का बाहर निकलना, पाइल्स, फिस्चुला आदि का उपचार दवाओं से ही सम्भव है।

 

उन्होंने कहा कि यह भ्रम है कि होम्योपैथी में ज्यादा परहेज की जरूरत है, केवल उन्हीं चीजों को खाने से मना किया जाता है जो रोगी की तकलीफ को बढ़ा देते हैं। उन्होंने कहा कि होम्योपैथी बीमारी को जड़ से तो ठीक करती ही है बल्कि शरीर में बीमारी की प्रवृत्ति को भी समाप्त करती है। उन्हेांने कहा कि होम्योपैथी वैज्ञानिक एवं परिष्कृत पद्धति है न कि घरेलू चिकित्सा पद्धति, इसलिए आधी अधूरी जानकारी प्राप्त कर उपचार करना नुकसानदायक भी हो सकता है। इसलिए केवल प्रशिक्षित चिकित्सक से इलाज कराना चाहिए।

 

होम्योपैथिक मेडिसिन बोर्ड के रजिस्ट्रार डा0 अनिल कुमार मिश्रा ने बताया कि होम्योपैथी में हर रोगी के लिए उसके लक्षणों के आधार पर अलग-अलग दवाइयाँ दी जाती हैं। नेशनल होम्योपैथिक मेडिकल कालेज की प्रो0 डा0 रेनू महेन्द्रा ने बताया कि महिलाओं के अनेक रोगों के उपचार में होम्योपैथी की सफल भूमिका है जैसे मासिक चक्र की गड़बड़ी, श्वेतप्रदर, हार्मोनल समस्या, बांझपन, मेनोपाज के समय तकलीफ आदि।

 

नेशनल कालेज के प्रो0 डा0 अमित नायक ने कहा कि होम्योपैथी मानसिक एवं स्नायुतंत्र की बीमारियों में बेहतर एवं दीर्घकालिक प्रभाव रखती हैं। एसोसिएट प्रो0 डा0 राजुल सिंह ने बताया कि होम्योपैथिक दवाइयाँ पान, बीड़ी, सिगरेट, तम्बाकू एवं शराब की लत को भी छुड़ा सकती हैं। एसोसिएट प्रो0 डा0 एस0डी0 सिंह ने कहा कि होम्योपैथिक दवाइयाँ अन्य पद्धतियों से तेज फायदा करती हैं। वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी डा0 राकेश बाजपेई ने बताया कि होम्योपैथी में रोगी के शारीरिक, मानसिक लक्षणों एवं आचार-विचार व्यवहार का ध्यान रखकर औषधि का चयन किया जाता है। डा0 निशांत श्रीवास्तव ने बताया कि चर्म रोगों जैसे सोरियासिस, इक्जिमा, सफेददाग, पित्ती, खुजली आदि का सफल उपचार उपलब्ध है। डा0 पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि हड्डी एवं जोड़ों के रोगों जैसे गठिया, अर्थराइटिस, रिकेट्स, स्पान्डलाइटिस, मोच, सियाटिका एवं रीढ़ की बीमारियों का सफल उपचार है।

 

पूर्व वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी डा0 बलिराम ने बताया कि होम्योपैथी बीमारी को जड़ से ठीक करती है। संगोष्ठी में डा0 आशीष वर्मा, डा0 सुधांशु दीक्षित, डा0 वीएन तिवारी, डा0 ज्ञानेन्द्र राय आदि ने सम्बोधित किया।