-जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोट का आदेश
–कोविड जांच में देरी पर भी जतायी नाराजगी
–रेडेमेसिविर इंजेक्शन की कमी पर मांगी जानकारी
-याचिका में सैम्पल लेने के गलत तरीके पर उठाये गये हैं सवाल

सेहत टाइम्स ब्यूरो
प्रयागराज/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बेतहाशा बढ़ रहे कोरोना के केस के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि नाइट कर्फ्यू छोटा कदम है, कोर्ट ने कहा नाइट कर्फ्यू या कोरोना कर्फ्यू संक्रमण फैलाव रोकने के छोटे कदम हैं, ये नाइट पार्टी एवं नवरात्रि या रमजान में धार्मिक भीड़ को रोकने तक सीमित है, उत्तर प्रदेश सरकार कम से कम एक सप्ताह अथवा 10 दिनों के लिए पूर्ण लॉकडाउन पर विचार करे ताकि स्थिति को बिगड़ने और ध्वस्त होने से बचाया जा सके। कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन शहरों में संक्रमण की दर ज्यादा है वहां दो से तीन सप्ताह के लॉकडाउन पर विचार करें। हाईकोर्ट ने जनता का आवागमन एवं सामूहिक गतिविधियों पर रोक, चिकित्सीय बुनियादी ढांचे को बढ़ाने, मूल चिकित्सीय आवश्यकताओं पर विशेष कदम उठाने, गैर कोविड मरीजों को बचाने और उनके लिए एक आधारभूत संरचना तैयार करने और टीकाकरण कार्यक्रम को और बढ़ाने के लिए कहा है। हाईकोर्ट ने यह आदेश दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिये हैं।
जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और जस्टिस अजित कुमार की खंडपीठ ने टिप्पणी की है कि नदी में तूफान आता है तो बांध उसे रोक नहीं पाते, इसी प्रकार नाइट कर्फ्यू छोटा कदम है, हमें संक्रमण को रोकने के बड़े प्रयास करने होंगे। कोर्ट ने कहा कि जीवन रहेगा तो अर्थव्यवस्था भी दुरुस्त हो जायेगी लेकिन जब आदमी ही नहीं रहेंगे तो विकास का क्या अर्थ रह जायेगा। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि संक्रमण को एक साल से अधिक का समय बीत रहा है, लेकिन इलाज की सुविधाएं नहीं बढ़ी हैं।
कोर्ट ने कहा कि ऐसी शिकायतें आ रही हैं कि टेस्ट के सैम्पल को लैब तक पहुंचने में 12 घंटों से ज्यादा का समय लग रहा है। सैम्पल को एक निश्चित अवधि में क्यों नहीं भेजा जा रहा है। कोर्ट ने रेडेमेसिविर इंजेक्शन को लेकर कहा कि हमें खबर मिली है कि इस इंजेक्शन की बहुत कमी है तथा इसकी कालाबाजारी हो रही है, जबकि कोविड मरीज के उपचार के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने सरकार से इस विषय में अपना जवाब दाखिल करने को कहा है, इस पर अगली सुनवाई 19 अप्रैल को होगी।
कोर्ट ने कहा कि याचिका में अधिवक्ता रोहित पाण्डेय द्वारा कोर्ट को बताया गया है कि तीन दिन पूर्व वे जिस क्षेत्र में वे रहते हैं वहां टेस्टिंग के दौरान कोविड जांच के लिए लिया जाने वाला सैम्पल जो नाक या मुंह के जरिये गले से लिया जाता है, उसे जीभ के नीचे के हिस्से से लिया गया, जिससे आरटीपीसीआर रिपोर्ट निगेटिव आती है। यह अपने आपमें लोगों की जान के साथ खिलवाड़ है। इस प्रकार से कोविड मरीजों की संख्या को कम दिखाकर चिकित्सकों, प्रशासन में बैठे अधिकारियों को महामारी से निपटने में जहां मुश्किल पैदा करेगा वहीं इस तरह की धोखाधड़ी लोगों को महामारी का भयावह रूप दिखा सकती है।
