पहली मई को सरकार के विरोध में मोमबत्‍ती जलायेंगे देश भर के कर्मचारी

-महंगाई भत्‍ते में कटौती के विरोध में इप्‍सेफ ने किया है आह्वान

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। आने वाली पहली मई को देशभर के कर्मचारी अपने-अपने घरों में मोमबत्‍ती जलायेंगे, यह मोमबत्‍ती इस बार किसी का हौसला बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि सरकार के प्रति अपना विरोध जलाने के लिए कर्मचारी जलायेंगे। भारत सरकार द्वारा कर्मचारियों के भत्तों में कटौती के विरोध स्वरूप 1 मई को इस कार्यक्रम का आह्वान इंडियन पब्लिक सर्विस इंप्लाइज फेडरेशन (इप्सेफ) ने किया है।

यह जानकारी देते हुए इप्सेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी पी मिश्रा, महामंत्री प्रेम चंद्र ने बताया कि इप्सेफ के पदाधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग करके सर्व सम्मति से निर्णय लिया गया है कि कर्मचारियों के डीए एवं अन्य भत्तों में कटौती करने के विरोध स्वरूप मई दिवस के अवसर पर 1 मई को दोपहर 12.00 बजे देशभर के कर्मचारी अपने घरों पर मोमबत्ती जलाकर विरोध प्रदर्शन करेंगे तथा प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा जाएगा। इस कार्यक्रम में इप्सेफ से जुड़े केंद्र सरकार एवं राज्यों के कर्मचारी संगठन भागीदारी करेंगे। इसके बाद लाक डॉउन समाप्त होने पर बड़े आंदोलन की घोषणा की जाएगी।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, गुजरात, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, राजस्थान, झारखंड, महाराष्ट्र की इकाइयों के साथ महासचिव कर्मचारी शिक्षक संयुक्त मोर्चा शशि कुमार मिश्रा, अध्यक्ष माध्यमिक शिक्षक संघ अमरनाथ सिंह, महामंत्री राजकीय निगम महासंघ घनश्‍याम यादव, राष्‍ट्रीय सचिव अतुल मिश्रा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ के के सचान, अशोक कुमार, सुरेश रावत, के खुराना, राष्‍ट्रीय महामंत्री प्रेमचंद, मुख्य सलाहकार दीपक ढोलकिया के साथ ही राज्‍यों से राकेश भदौरिया उपाध्यक्ष (दिल्ली), शिवकुमार पराशर, पंकज मित्तल (हरियाणा), हरविंदर कौर (पंजाब), एचके सांडिल (हिमाचल), एसबी सिंह (मध्यप्रदेश), ओपी शर्मा (छत्तीसगढ़), अमरेन्द्र सिंह, राजेश मणि (बिहार), विष्णु भाई पटेल (गुजरात), सुभाष गांगुड़े (महाराष्ट्र), राजेंद्र सिंह राणा (राजस्थान) आदि ने भाग लिया।

नेताद्वय ने बताया कि केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारों द्वारा महंगाई भत्ता एवं अन्य भत्तों में कटौती करने से देशभर के कई करोड़ कर्मचारी आक्रोशित हैं, उनका कहना है कि देश भर के आवश्यक सेवा जिसमें डॉक्टर, नर्सेस, पैरामेडिकल स्टाफ, वार्ड बॉय, सफाई कर्मचारी, पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी तकनीकी सेवा वाले कर्मचारी कोविड-19 जैसी भयंकर महामारी को दूर करने एवं संक्रमित लोगों को स्वस्थ करने में जी जान से लगे हुए हैं, उनका परिवार भी संक्रमित हो जा रहा है। इसके साथ ही देशभर के कर्मचारियों ने स्वेच्छा से 1 दिन का वेतन भी दिया है। लाखों कर्मचारी लॉकडाउन में गरीबों मजदूरों को भोजन देने एवं उन्हें सामग्री उपलब्ध कराने में रात दिन लगे हैं, जिससे कोरोना के संक्रमण में कमी आई है स्वास्थ्य एवं पुलिस के कई कर्मचारी अपनी जान भी गंवा चुके हैं।

इप्सेफ के राष्ट्रीय सचिव अतुल मिश्रा ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा डी0ए0 फ्रीज करने के निर्णय के उपरांत राज्य सरकारों ने डी0ए0 तो सभी कर्मचारियों का फ्रीज कर दिया इसके अतिरिक्त उत्तर प्रदेश सरकार ने 6 भत्ते और फ्रीज कर दिया वहीं राजस्थान सरकार द्वारा 30% वेतन कटौती का निर्णय किया गया, इसी तरह कई राज्यों में कर्मचारियों के वेतन से अतिरिक्त कटौती की जा रही है। इसी तरह प्रधानमंत्री राहत कोष व मुख्यमंत्री राहत कोष में स्वेच्छा से धनराशि देने की बात कही गई जिसे देशभर के समस्त कर्मचारियों ने 1 दिन का वेतन स्वेच्छा से दिया भी। परंतु इस बार पुनः 1 दिन का अनिवार्य रूप से वेतन काटना व उदाहरण स्वरुप उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग में 2 दिन का वेतन काटने का आदेश निर्गत करना उचित नहीं है। इसे अनिवार्य नहीं किया जा सकता है। इस तरह की सरकार की नीतियों से कर्मचारियों का मनोबल तो टूट ही रहा है साथ ही आक्रोश भी व्याप्त हो रहा है क्योंकि उसको भविष्य में अपने परिवार के भरण पोषण करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।

वी0पी0 मिश्र ने कहा कि ऐसी परिस्थिति में सेवारत एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों के भत्तों की कटौती करने का निर्णय न्यायोचित नहीं है। सरकार पुनर्विचार करे जिससे उनका मनोबल बढ़ेगा।

राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं महामंत्री ने प्रधानमंत्री एवं वित्त मंत्री से आग्रह किया है कि भत्तों में कटौती जैसे अप्रिय निर्णय को तत्काल वापस लेकर कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाएं। उन्होंने यह भी मांग की है कि डॉक्टर, प्रशासनिक ऑफिसर, पुलिस, स्वास्थ्य कर्मचारी, आंगनबाड़ी, सफाई कर्मियों जैसे कर्मचारी जो महामारी में सेवाएं दे रहे हैं उन्हें पुरस्कृत करके उनका मनोबल बढ़ाएं। देश की जनता तो उन्हें सम्मानित कर रही है और सरकार द्वारा उनके भत्तों में कटौती करना बिल्कुल न्याय संगत नहीं है, इससे उनका मनोबल गिरेगा। अगर सरकार इस पर विचार नहीं करती है तो देशभर के कर्मचारी लॉकडाउन समाप्त होने पर सामान्य स्थिति में बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होंगे।