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प्रतिष्ठि‍त निजी अस्‍पताल में आठ बार फेल सर्जरी, केजीएमयू में पहली बार में ही सफल

12 वर्षीय बच्‍चे का जन्‍म से ही मूत्र मार्ग विकृत होने के कारण शरीर पर गिरती थी पेशाब 

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्‍सा विश्‍वविद्यालय के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के विभागाध्‍यक्ष प्रो एसएन कुरील ने एक बार फि‍र 12 वर्षीय बच्‍चे की जन्‍म के समय से बिगड़े पेशाब के रास्‍ते को अपनी रिसर्च की मदद से सर्जरी कर सही रास्‍ते पर लाने में सफलता प्राप्‍त की है। इस सर्जरी की जटिलता का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि  दिल्‍ली में अग्रिम श्रेणी के कहे जाने वाले एक प्रतिष्ठित निजी अस्‍पताल में दो साल के अंदर आठ बार बच्‍चे की सर्जरी की गयी थी जिसमें आठ लाख रुपये से ज्‍यादा का खर्च आ गया था, लेकिल सफलता हाथ नहीं लगी थी। अगस्‍त में अभी आठवीं सर्जरी केजीएमयू में की गयी जो पहली बार में ही सफल हो गयी। अब बच्‍चा ठीक है तथा बुधवार को ही उसे अस्‍पताल से छुट्टी भी दे दी गयी।

अपनी रिसर्च की बदौलत इस सफल सर्जरी को अंजाम देने वाले डॉ कुरील ने बताया कि हरदोई के रहने वाले 12 वर्षीय बच्‍चे को पैदा होने के समय से ही ‘‘हाइपोस्पेडियास’’ नामक बीमारी थी। इस बीमारी में  लिंग धनुष की तरह मुड़ा था। यूरिन करने का रास्ता लिंग के शीर्ष पर न होकर पीछे अंडकोश की तरफ था, जिससे जब वह पेशाब करता तो पेशाब अंडकोष से होते हुए पैरों पर गिरती थी। उन्‍होंने बताया कि बबलू के पिता अपने बच्चे की सर्जरी कराने देश की राजधानी दिल्ली के एक निजी प्रतिष्ठित अस्पताल ले गए उस अस्पताल में 1.5 लाख खर्च करके पहली सर्जरी 2015 में करायी थी जो कि फेल हो गयी। इसके पश्चात उसी अस्पताल के सर्जन ने वहां पर 2015 से 2017 के बीच सात बार आपरेशन किया और हर बार आपरेशन फेल हो गया लगभग आठ लाख रूपये से अधिक खर्च भी हो गये।

बताया जाता है कि  इसके पश्चात बबलू के पिता को केजीएमयू के डॉ कुरील के बारे में किसी ने जानकारी दी तो बच्‍चे के पिता सफल इलाज की आशा में डा0 एसएन कुरील के पास 2019 में आए। सावधानीपूर्वक सभी जांचें तथा पूर्व की सर्जरी के कॉम्‍प्लीकेशन के परीक्षण के बाद डा0 कुरील ने अपनी नई तकनीक से सर्जरी का फैसला किया (नई तकनीक का शोधपत्र अन्तराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित है)। 19 अगस्त को की गयी सर्जरी के बाद अब बच्चा सामान्‍य बच्‍चों की तरह लिंग के टिप से मोटी धार से पेशाब करने में सक्षम है। उन्‍होंने बताया कि कोई कॉम्प्लीकेशन नहीं हुआ। दिल्ली के प्रतिष्ठित निजी अस्पताल में जो आपरेशन आठ बार फेल हो गया के0जी0एम0यू0 मे डा0 कुरील के द्वारा एक बार में ही सफल हो गया। आपको बता दें कि डॉ कुरील अब तक करीब डेढ़ सौ से ज्‍यादा बच्‍चों का इस तरह का ऑपरेशन कर चुके हैं।

सर्जरी करने में शामिल

सर्जरी – डा0 एस0एन0 कुरील, डा0 अर्चिका गुप्ता, डा0 राहुल कुमार

ओटी सिस्टर वन्दना एवं टीम

एनेस्थीसिया डा0 विनीता सिंह, डॉ प्रेम राज एवं टीम