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सही जांच के लिए चुनें सही पैथोलॉजी, जानिये कैसे

-अंतर्राष्‍ट्रीय पैथोलॉजी दिवस पर वरिष्‍ठ पैथोलॉजिस्‍ट डॉ पीके गुप्‍ता ने लोगों को किया जागरूक

-पीके पैथोलॉजी पर जागरूकता के साथ ही लोगों को किया गया मास्‍क का भी वितरण

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। क्‍या आप पैथोलॉजी जांचें कराने जा रहे हैं, या जांच के लिए अपने परिजन को लेकर जा रहे हैं, तो पहले यह जरूर देख लीजिये कि जिस पैथोलॉजी सेंटर पर आप जा रहे हैं वहां कोई पैथोलॉजिस्‍ट बैठता है कि नहीं, पैथोलॉजिस्‍ट का अर्थ है पैथोलॉजी से एमडी योग्‍यताधारक डॉक्‍टर। इस पैथोलॉजिस्‍ट से जांच रिपोर्ट के बारे में, रोग आदि के बारे में जानकारी लेकर सलाह ले सकते हैं, कई बार पैथोलॉजिस्‍ट और उपचार करने वाले चिकित्‍सक के बीच संवाद की जरूरत भी पड़ती है।  

यह जानकारी आईएमए लखनऊ के पूर्व अध्‍यक्ष व वरिष्‍ठ पैथोलॉजिस्‍ट डॉ पीके गुप्‍ता ने आज इंटरनेशनल पैथोलॉजी दिवस (11 नवम्बर) के अवसर पर पी के पैथोलॉजी पी जी आई पर आयो‍जित जागरूकता एवं निशुल्क मास्क वितरण कार्यक्रम के दौरान आम लोगों के बीच दी। उन्‍होंने मास्‍क का महत्‍व बताते हुए लोगों को सलाह दी कि जब तक कोरोना की दवा या वैक्‍सीन न आ जाये तब मास्‍क, हाथ धोना तथा दो गज की दूरी का फॉर्मूला अवश्‍य अपनायें।  

उन्‍होंने बताया कि इस जागरूकता कार्यक्रम को लखनऊ पैथोलॉजी एसोसिएशन की तरफ से चलाए जा रहे नो योर पैथोलॉजिस्‍ट यानी अपने पैथोलोजिस्ट को जानिए अभियान के तहत प्रमुखता से आम लोगों के बीच चलाया गया। डॉ गुप्‍ता ने बताया कि आज के दिवस पर लखनऊ पैथोलॉजी एसोसिएशन के बैनर तले सोशल मीडिया के माध्यम से आपस में संदेश एवं शुभकामनाओं का दौर चला।

आज के दिवस के बारे में डॉ गुप्‍ता ने बताया कि इंटरनेशनल पैथोलॉजी डे प्रतिवर्ष 11 नवम्बर को मनाया जाता है जिसकी शुरुआत रॉयल कॉलेज ऑफ पैथोलॉजी लंदन ने वर्ष 2014 में की थी, इसे प्रतिवर्ष आज के संदर्भ मे पैथोलॉजी के महत्व को आमजन तथा चिकित्सा समुदाय में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाता है।

उन्‍होंने बताया कि आधुनिक चिकित्सा पद्धति यानी एलोपैथिक मेडिसिन तथ्य परक चिकित्सा पद्धति एवीडेंस बेस्‍ड मेडिसिन है जिसमे सर्वप्रथम रोग का निदान (डायग्‍नोसिस) किया जाता है सामान्य जन की भाषा मे कह सकते है कि बीमारी की पहचान करना फिर सटीक इलाज करना जिससे रोगी को त्वरित लाभ मिलता है।

रोग के इलाज मे पैथोलॉजी जाँच की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इन जांच को गुणवत्तापरक तरीके से करने के लिए पैथोलॉजी विषय में एमबीबीएस की डिग्री के बाद तीन साल का गहन प्रशिक्षणयुक्त परास्नातक डिग्री यानी एम डी की उपाधि से युक्त चिकित्सक ही अधिकृत होता है। आम जन में इन्हीं बातों की जानकारी एव जागरूकता के लिए पैथोलॉजी दिवस एक सशक्त माध्यम होता है। इस वर्ष 2020 में कोरोना की चुनौतियों से निपटने में देश विदेश के पैथोलोजिस्ट चिकित्सकों ने कोविड टेस्‍ट को करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, मानव स्वास्थ्य की रक्षा में पैथोलॉजी केंद्रों ने अपने मानव संसाधन एवं चिकित्सा उपकरणों के माध्यम से त्वरित रिपोर्ट दे कर लाखों लोगों की जान बचाई है, इस सेवा के दौरान लैब में काम करने वाले बहुत से चिकित्सा कर्मी संक्रमित भी हुए एवं शहीद भी हुए, आज उन्हें नमन करने का भी दिन है।

डॉ गुप्‍ता ने कहा कि आजकल देखने में आ रहा है कि बहुत से पैथोलॉजी केंद्र बिना एमडी डिग्रीधारक पैथोलॉजी चिकित्सक के चल रहे हैं, जो गैरकानूनी होने के साथ ही स्वास्थ्य से खिलवाड़ भी है, जिसे जागरूकता के द्वारा तथा सरकारी नियंत्रण से ही समाप्त किया जा सकता है। पैथोलॉजी एसोसिएशन अंतर्राष्ट्रीय पैथोलॉजी डे पर लोगों को सलाह देती है कि आम लोग मानक युक्त पैथोलॉजी केंद्र से ही जांच कराएं तथा जांच की रिपोर्ट मिलने के बाद पैथोलोजिस्ट चिकित्सक से भी मिलकर जांच के बारे में जानकारी तथा चिकित्सीय सलाह भी ले सकते हैं। इस अवसर पर आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ पी के गुप्ता संचालक पी के पैथोलॉजी पी जी आई ने चिकित्सकों तथा आम लोगों को अच्छे स्वास्थ्य के लिए शुभकामनाएं दीं तथा केंद्र पर कोरोना से बचने के लिए निशुल्क मास्क वितरित किया गया।

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