बच्‍चों की न्‍यूरोलॉजिक बीमारियां एक बड़ी चुनौती, कमर कसनी होगी

पीडियाट्रीशियन डॉ अनुराग कटियार से सेहत टाइम्‍स’ की विशेष बातचीत

डॉ अनुराग कटियार

लखनऊ। आजकल बच्चों में न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का ग्राफ बढ़ रहा है,  इसकी एक बड़ी वजह हेल्‍थकेयर इम्‍प्रूव होना है। अनेक कारणों से बीमार जिन बच्‍चों को पहले बचाना संभव नहीं हो पाता था, ऐसे बच्‍चों को अब बेहतर डायग्‍नोसिस, बेहतर चिकित्‍सा, नये अनुसंधान, टेक्‍नोलॉजी के कारण बचाया जाना संभव हो गया है, ऐसे बच्‍चों की जान तो बच जाती है लेकिन अनेक बच्‍चों में न्‍यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स होते हैं, इन न्‍यूरोलॉजिकल डिस्‍ऑर्डर का उपचार भारत में एक बड़ी चुनौती है क्‍योंकि ऐसे बच्‍चों का प्रॉपर ढंग से इलाज करने वाले चिकित्‍सकों और चिकित्‍सा साधनों का अभाव है।

 

यह बात बाल रोग विशेषज्ञ डॉ अनुराग कटियार ने ‘सेहत टाइम्‍स‘ के साथ एक विशेष वार्ता में कही। आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस कर लखनऊ के केजीएमयू से वर्ष 2002 में एमडी करने वाले डॉ अनुराग लखनऊ में प्रैक्टिस करते हैं उन्‍होंने कहा कि अब नए अनुसंधान और बेहतर टेक्नोलॉजी, बेहतर डायग्‍नोसिस से अनेक एंड्रोक्राइनल बीमारियां, जेनेटिक बीमारियों की डायग्‍नोसिस अब हो जाती हैं, एक किलो वजन तक के पैदा हुए बच्‍चे भी अब बच जाते हैं लेकिन उनमें कई दिक्‍कतें आ रही हैं, जैसे उनकी बढ़त सही नहीं हो रही है, शारीरिक रूप से अपंग हैं या फि‍र कोई और न्‍यूरोलॉजिकल बीमारी है।

 

उन्‍होंने बताया कि ऐसे बच्‍चों का जिस ढंग और जितना समय देकर इलाज होना चाहिये उसका भारत में बहुत अभाव है। बच्‍चों को होने वाली न्‍यूरोलॉजी बीमारियों का सही ढंग से उपचार करने के लिए बच्‍चों की न्‍यूरोलॉजी को समझना बहुत आवश्‍यक है, चूंकि बड़ों और बच्‍चों की न्‍यूरोलॉजी में फर्क होता है, इसलिए इसके इलाज करने का ढंग भी अलग और विस्‍तृत होता है। डॉ अनुराग का कहना है कि न्‍यूरोलॉजिकल समस्‍या से ग्रस्‍त बच्‍चे की पहचान और उसके रोग को डायग्‍नोस करने के लिए बच्‍चे के शुरुआती क्‍लीनिकल परीक्षण में कम से कम आधा घंटे का समय चाहिये, इसके बाद अन्‍य प्रकार के परीक्षणों के बाद तय होता है कि बच्‍चे को किस प्रकार की बीमारी है। इसी प्रकार बीमारी का इलाज करने के लिए भी सिर्फ दवा ही नहीं, अन्‍य प्रकार की बिहैवियर थैरेपी से इलाज होना चाहिये, लेकिन ऐसा यहां गिनी-चुनी जगहों पर ही होता है।

 

इलाज का सरलीकृत प्रोग्राम है ‘ब्रेन रक्षक’

उन्‍होंने बताया कि इन परिस्थितियों में एसोसिएशन ऑफ चाइल्‍ड ब्रेन रिसर्च के संस्‍थापक डॉ राहुल भारत द्वारा रिसर्च के बाद तैयार किया गया ब्रेन रक्षक का कोर्स पीडियाट्रीशियंस के लिए एक सही कदम हो सकता है। क्‍योंकि डॉ राहुल ने इलाज को सरलीकृत करते हुए प्रोग्राम तैयार किया है जिसकी मदद से पीडिया‍ट्रीशियंस न्‍यूरोलॉजी की बीमारी से ग्रस्‍त बच्‍चों का इलाज भी आराम से कर सकेंगे। यह पूछने पर आपको इसके बारे में जानकारी कैसे मिली, इस पर उन्‍होंने कहा कि मैं लखनऊ एकेडमी ऑफ पीडिया‍ट्रि‍क में जुड़ा हुआ हूं, वहां से मैंने डॉ राहुल के बारे में जाना उसके बाद मैंने डॉ राहुल भारत द्वारा आयोजित की गयी सीएमई में भाग लिया है और उनके कॉन्‍सेप्‍ट को समझा है, इसी आधार पर मैं कह रहा हूं।

 

बहुत बड़ी चुनौती

डॉ अनुराग ने कहा कि चूंकि अब न्‍यूरोलॉजिकल बीमारियों से ग्रस्‍त बच्‍चों की संख्‍या बढ़ रही है और उनका इलाज करने वालों की संख्‍या का अत्‍यंत अभाव है, ऐसे में यह एक बड़ी चुनौती होगी कि इन बच्‍चों का इलाज हो सके क्‍योंकि यही बच्‍चे कल को जब बड़े होंगे तो देश को दिशा देने का काम कर सकते हैं, यानी ये देश का भविष्‍य हैं, और भविष्‍य को अच्‍छा करने की जिम्‍मेदारी हम सभी को निभानी होगी।