आधुनिक चिकित्‍सा से उपचार के बाद साइड इफेक्‍ट से भी हो जाती है कैंसर रोगियों की मौत : डॉ राजकुमार

-कैंसर से निपटने के लिए ऋषियों-मुनियों के बताये तरीकों पर आधुनिक परिपेक्ष्‍य में अध्‍ययन की जरूरत

-आरोग्‍य भारती के वेबिनार में कैंसर की रोकथाम और प्रबंधन के सम्‍बन्‍ध में हुई चर्चा

डॉ राजकुमार

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ। कैंसर के कारण का पता न होने से आधुनिक विज्ञान में कैंसर का निदान नहीं हो पाता, हालांकि आधुनिक विज्ञान में जीन और मोलिक्युल लेवल पर जाकर कारण की खोज एवं चिकित्सा की जाती है। आधुनिक चिकित्सा के दुष्परिणाम हैं कि कैंसर के इलाज के बाद बहुत सारे मरीजों की आधुनिक चिकित्‍सा की इन थेरेपीज के साइडइफेक्ट के कारण मृत्‍यु हो जाती है, या इसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं। कैंसर के उपचार में आयुर्वेद की भूमिका महत्‍वपूर्ण है, ऋषियों-मुनियों द्वारा बताए गए तरीकों पर आधुनिक परिपेक्ष्‍य में अध्ययन करने की जरूरत है।

ये विचार उत्‍तर प्रदेश यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज, सैफई के कुलपति डॉ राजकुमार ने आरोग्‍य भारती द्वारा आयोजित किये जा रहे वेबिनार की कड़ी में रविवार 6 सितम्‍बर को आयोजित वेबिनार में मुख्‍य अतिथि के रूप में शामिल होते हुए व्‍यक्‍त किये। इस वेबिनार का विषय मल्‍टीडिसिप्लनेरी अप्रोच फॉर प्रीवेंशन एंड मैनेजमेंट ऑफ कैंसर (Multidisciplinary Approach for Prevention and Management of Cancer) था।

डॉ राजकुमार ने कहा कि भारत में कैंसर के केसेज बढ़े हैं, इनमें पुरुषों में मुख का कैंसर सबसे ज्यादा है जबकि महिलाओें में स्तन कैंसर एवं   सरविक्स कैंसर सबसे ज्यादा पाया जाता है। उन्होंने बताया कि‍ कैंसर के कारणों में विभिन्न प्रकार के एक्सपोजर, तंबाकू आदि माने जाते हैं, लेकिन बहुत से कैंसर का कारण भी नहीं पता होता। जिन कारणों के बारे में ज्ञात है उनमें पेस्टिसाइड्स, ऑर्गेनोंफॉस्फेट का प्रयोग कैंसर का एक कारण है, इसके अलावा उन्होंने स्त्रोतस के अवरोध को भी कैंसर का कारण बताया। आयुर्वेद की महत्‍ता बताते हुए उन्होंने निर्गुंडी,  सदाबहार, नागदमन, सहदेवी, केसर, अभ्रक भस्म पर हो रही रिसर्च के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि आज मिल-जुल कर काम करने की जरूरत है।

अशोक कुमार वार्ष्‍णेय

इससे पूर्व वेबिनार की शुरुआत आरोग्‍य भारती के राष्‍ट्रीय सचिव अशोक कुमार वार्ष्‍णेय ने धन्‍वन्‍तरि वंदना से की। बाद में अपने वक्‍तव्‍य में उन्‍होंने कहा कि आज व्यक्ति टार्गेटओरियंटेड हो गया है इसलिए   व्यक्ति के पास समय नहीं है।  व्यक्ति कम समय मे अधिक प्राप्ति के लिए तत्पर है। उन्‍होंने कहा कि 60 प्रतिशत रोग तनाव के कारण हैं। कैंसर कई बीमारियों का समूह है। तंबाकू का प्रयोग, पान मसाला,  कुपोषण, अल्कोहल आदि इसके कारण हैं। इसके साथ ही  कुछ लोगों में आनुवांशिक भी होता है। इसके कारणों का त्याग ही इसका उपचार है। पाश्‍चात्‍य संस्कृति का अंधानुकरण इस व्याधि का कारण है। आयुर्वेद के अनुसार स्वस्थ जीवन शैली का अक्षरशः पालन करना इसका बचाव है, साथ ही जीवन में सकारात्मक रहना भी इसका बचाव है।

प्रो एम एल बी भट्ट

केजीएमयू के पूर्व कुलपति प्रो एम एल बी भट्ट ने बताया कि आज  क़ैंसर के प्रमुख कारणों में तंबाकू है, और अगर यह अल्कोहल के साथ सेवन किया जाए तो इसका प्रभाव बढ़ जाता है। शारीरिक निष्क्रियता  अर्थात श्रम नहीं करना कैंसर का कारण है। योग, प्राणायाम,सूर्य नमस्कार के द्वारा इसे रोका जा सकता है। इसके साथ ही स्वच्छ जीवन शैली एवं विभिन्न व्याधियों जैसे हेपटाइटिस बी के लिए टीकाकरण का प्रयोग होना चाहिए।  स्तन क़ैंसर समुचित रूप से स्तनपान के न कराने के कारण होता है। आज कैंसर के कारणों को जान कर इससे बचा जा सकता है। उन्‍होंने कहा कि पाश्चात्य संस्कृति का अंधानुकरण क़ैसर का कारण है, तंबाकू में 400 से ज्यादा केमिकल होते हैं, जिसमें बहुत से क़ैसर के कारक हैं। इसके अतिरिक्‍त भय, क्रोध, अहंकार से ग्रस्त व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है, अतः इन सबका त्याग करना चाहिए। उन्‍होंने कैंसर के इलाज की विभिन्न विधियों का संक्षेप में वर्णन किया।

डॉ गिरीश गुप्ता

गौरांग क्‍लीनिक एंड सेंटर फॉर होम्‍योपैथिक रिसर्च के संस्‍थापक होम्‍योपैथी विशेषज्ञ डॉ गिरीश गुप्ता ने बताया कि कई बार ऐसे मरीज भी आते हैं, जिन्‍होंने अल्‍कोहल, तम्‍बाकू जैसी वस्‍तुओं का सेवन नहीं किया है फि‍र भी उन्‍हें कैंसर हो गया, उन्‍होंने कहा कि इसकी गहराई में जाने पर पता चला कि उनके कैंसर का कारण मानसिक है। डॉ गुप्‍ता ने इस बारे में कई मरीजों का उदाहरण देते हुए केसेज के बारे में विस्‍तार से जानकारी दी। डॉ गुप्‍ता ने यह भी बताया कि मानसिक कारणों को जानकर जब होम्‍योपैथिक दवाओं से उपचार किया गया तो मरीज स्‍वस्‍थ हो गये। उन्‍होंने कहा कि होम्‍योपैथी से उपचार में रोग के कारणों का ही विशेष महत्‍व है, जरूरत उन कारणों को जानकर उसका इलाज करने की है।

डॉ पूजा सब्‍बरवाल

चौधरी ब्रह्म प्रकाश संस्थान नई दिल्ली की असिस्‍टेंट प्रोफेसर डॉ पूजा सब्‍बरवाल ने बताया कि मरीज को आराम होना चाहिए, इसके लिए  किसी भी पैथी का सहारा क्यो न लेना पड़े। उन्होंने अर्बुद विधि के बारे में बताया कि वह व्यक्ति कि लंबाई, बॉडी वेट ऑन बर्थ और क़ैंसर से संबंधों पर रिसर्च भी कर रही हैं।

वेबिनार के संयोजक आरोग्य भारती के ब्रज प्रांत संयोजक डॉ अतुल वार्ष्णेय ने बताया कि आजकल कैंसर के रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है, जिसके इलाज के लिए एलोपैथी, होमियोपैथी व आयुर्वेद के विशेषज्ञों को समन्वय बनाकर चलने की आवश्यकता है।

डॉ अतुल वार्ष्णेय

जूम पर ऑनलाइन आयोजित इस कार्यक्रम का प्रसारण आरोग्यभारती के पेज से हुआ, अंत मे आरोग्य भारती के डॉ अतुल वार्ष्णेय ने सबका धन्यवाद दिया। डॉ अवनीश पांडेय मिर्जापुर, सहसचिव आरोग्य भारती काशी प्रान्त ने कार्यक्रम में तकनीकी सहयोग दिया। इसमें देश के विभिन्न भागों से अनेक चिकित्सकों ने भाग लिया, जिनमें डॉ रमाकांत द्विवेदी, डॉ विपिन मिश्रा, डॉ लक्ष्मी,डॉ मीनाक्षी, डॉ सुमन शर्मा, डॉ संदीप श्रीवास्‍तव, डॉ जितेन्‍द्र प्रताप सिंह, डॉ जीएस दुबे, डॉ सीएल उपाध्‍याय, डॉ अभिषेक पाण्‍डेय, डॉ अवनीश पाण्‍डेय, डॉ रमाकांत द्विवेदी आदि शामिल हैं।