Monday , November 28 2022

स्‍वास्‍थ्‍य कर्मियों पर हमला करने वालों से सभी राज्‍य सख्‍ती से निपटें

-केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय ने लिखा सभी राज्‍यों, केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र

-महामारी अधिनियम के तहत सख्‍त कार्रवाई करने के अलावा दूसरे कदम उठाने पर भी करें विचार

-आईएमए के देशव्‍यापी विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार से जारी किया गया पत्र

                 लव अग्रवाल

सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो

लखनऊ/नयी दिल्‍ली। केंद्र सरकार ने कहा है कि सभी राज्‍य स्‍वास्‍थ्‍य कर्मियों से मारपीट, उन पर हमला, तोड़फोड़ करने वालों के खिलाफ महामारी अधिनियम के तहत कार्रवाई करें, यह भी कहा गया है कि इस महत्‍वपूर्ण  मुद्दे के महत्व पर विचार करते हुए सभी राज्य एक विस्तृत समीक्षा करें और यह सुनिश्चित करें कि संशोधित महामारी रोग अधिनियम के सख्त कार्यान्वयन के अलावा स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा और भलाई के लिए त्वरित और आवश्यक कदम उठाए जाएं।

चिकित्सकों पर होने वाले हमलों-तोड़फोड़ के विरोध में आज 18 जून को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर किए गए देशव्यापी विरोध के तहत काला दिवस मनाए जाने के बीच केंद्र सरकार द्वारा इन घटनाओं पर संज्ञान लेते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को पत्र भेज कर डॉक्टरों की सुरक्षा को सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।

भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय नेशनल हेल्‍थ मिशन के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल की ओर से जारी इस निर्देश में कहा गया है कि कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में स्वास्थ्य कर्मी सर्वाधिक महत्वपूर्ण संसाधन के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। देश के कुछ स्थानों से इन स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ हिंसा की शिकायतें मिल रही हैं। हाल ही की बात करें तो आसाम, वेस्ट बंगाल और कर्नाटक के कुछ स्थानों से स्वास्थ्य कर्मियों पर हमले की घटनाएं प्रकाश में आई हैं। पत्र में कहा गया है कि भारत सरकार समय-समय पर स्वास्थ्य कर्मियों के रहने व उनके कार्यस्‍थल पर उनकी सुरक्षा के लिए विभिन्न माध्यमों से उनकी सुरक्षा सुरक्षित सुनिश्चित करने के बारे में कहती आई है।

भारत सरकार ने पिछले साल 22 अप्रैल 2020 को एक अध्यादेश लाकर एपिडेमिक डिजीज एक्ट 1807 के तहत हिंसा करने वालों से कड़ाई से निपटने के निर्देश जारी किए हैं, इस अध्यादेश को 29 सितंबर 2020 को संशोधन के साथ नोटिफाइड किया गया था। इस संशोधन में यह व्यवस्था दी गई थी की स्वास्थ्य सेवा कर्मियों के खिलाफ होने वाली हिंसा में कर्मी या किसी संपत्ति को नुकसान पहुंचता है तो हमलावरों को जेल और जुर्माना दोनों की सजा दी जाएगी, कुछ अपराधों में जमानत का प्रावधान भी नहीं है।