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तेल खराब नहीं है, खराब है उस तेल से हमारी खाना बनाने की विधि

-केजीएमयू के फीजियोलॉजी विभाग के पूर्व एचओडी डॉ नर सिंह वर्मा ने आईएमए में आयोेजित सीएमई में दिया व्याख्यान

सेहत टाइम्स

लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के फीजियोलॉजी विभाग के पूर्व एचओडी डॉ नर सिंह वर्मा ने कहा कि तेल को लेकर के जो लोगों के मन में भ्रांतियां हैं उन्हें दूर करने की जरूरत है। तेल खराब नहीं है, खराब है उस तेल से हमारी खाना बनाने की विधि। पहले तलने की परंपरा नहीं थी। दरअसल तेल जब जलता है, खौलता है, से उससे उसकी क्वालिटी खराब हो जाती है, और वह नुकसान करता है।

डॉ वर्मा ने यह बात यहां 23 मार्च को आईएमए भवन में आयोेजित सीएमई में अपने व्याख्यान में कही। उन्होंने कहा कि पिछले 50 सालों से कार्डियोलॉजिस्ट ने अनेक प्रकार की दवाएं बताईं देसी घी, तेल बंद कर दिये लेकिन फिर भी 20 साल में हार्ट अटैक पड़ रहा है, इसका अर्थ है कि कहीं न कहीं गलती हो रही है। उन्होंने कहा कि 15 से 20% फैट हमारी डाइट में होना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि इन दिक्कतों की सबसे बड़ी वजह यह है की एमबीबीएस, एमडी, एमसीएच कोई भी मेडिकल की पढ़ाई हो, उसके कोर्स में न्यूट्रीशन नहीं पढ़ाया जाता है। किसी भी डॉक्टर को यह नहीं पढ़ाया गया कि हम भोजन क्या करें, कब करें, कैसे करें। उन्होंने कहा कि पहले भी डॉक्टर को यह नहीं पढ़ाया गया था लेकिन ऐसी दिक्कतें भी नहीं होती थी क्योंकि संयुक्त परिवार होते थे जिसमें वयोवृद्ध से लेकर बच्चों तक सब शामिल होते थे, ऐसे में खान-पान संबंधी अनेक जानकारी हमें हमारे बुजुर्गों से मिल जाया करती थी। खाने की व्यवस्था हमारी ऐसी थी कि जूता-चप्पल उतार कर जमीन पर बैठकर खाना खाते थे। बिना नहाये खाना नहीं मिलता था, जबकि आजकल जूते चप्पल पहन कर, खड़े होकर हर तरह से लोग खाना खा लेते हैं।

इस समस्या के हल के बारे में बताते हुए हमारे शरीर को एसेंशियल फैटी एसिड की जरूरत होती है एक प्रकार के फैटी एसिड ऐसे होते हैं जो शरीर में बनते हैं जबकि एक ऐसे होते हैं जिन्हें हमें खाने में लेना ही पड़ेगा। एसेंशियल फैटी एसिड चार प्रकार के होते हैं, ओमेगा 3, ओमेगा 6, ओमेगा 9 और ओमेगा 12। उन्होंने बताया कि मैंने काउंसिल आफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के सहयोग से एक स्टडी की थी जिसमें मैंने पाया था कि भारत के लोगों में ओमेगा-3 की बहुत कमी है, ओमेगा थ्री हृदय रोगों से बचाता है। शरीर के अंदर ओमेगा 3, ओमेगा 6, ओमेगा 9 और ओमेगा 12 का संतुलन रहना चाहिये इसके लिए हमें ऐसे तेल की आवश्यकता है जो इस संतुलन को बनाये रखे। ऐसा ऑयल जब ढूंढ़ा गया तो पाया कि अलसी ऐसी है जिसमें सर्वाधिक 70 प्रतिशत ओमेगा 3 पाया जाता है। इसके अतिरिक्त अंटार्कटिका पर पायी जाने वाली ठंडे पानी वाली मछली में अधिक मात्रा में ओमेगा 3 पाया जाता है। उन्होंने बताया कि अलसी के तेल में अगर कुकिंग की जाये तो काफी हद तक हृदय की बीमारियों से बचाव हो सकेगा। उन्होंनरे बताया कि कुल मिलाकर वर्तमान परिस्थितियों में तेल का प्रयोग तलने से ज्यादा सेंक कर खाने में करना श्रेयस्कर होगा।

कार्यक्रम सुबह 9:30 बजे प्रारम्भ हुआ। इसमें कुल 23 चिकित्सा विषय कवर हुए। इन विषयों में समय-समय की बीमारियों, हृदय से सम्बंधित, पालेटिव केयर कैंसर की आखरी स्टेज, डायबिटिज, नेत्र रोग, हेयर ट्रान्सप्लांट, नशा, मोबाइल फोन से हो रहे नुकसान, महिला स्वास्थ्य, टीबी आदि विषयों पर व्याख्यान प्रस्तुत किये गये। कार्यक्रम में लगभग 100 डॉक्टरों ने भाग लिया।

सीएमई का उद्धाटन पूर्व अध्यक्ष डॉ रुखसाना खान के द्वारा किया गया। अध्यक्ष डॉ सरिता सिहं ने आये हुए अतिथियों का स्वागत किया। इस मौके पर साइंटिफिक कमेटी के सलाहकार डॉ जी पी सिहं, साइंटिफिक कमेटी के चेयरमैन डॉ जेडी रावत, निवर्तमान अध्यक्ष डॉ विनीता मित्तल, अध्यक्ष निर्वाचित डा० मनोज कुमार अस्थाना ने आयोजन की सराहना की और कहा कि इस से डाक्टरों के ज्ञान में वृद्धि होती है, इस तरह के कार्यक्रम होते रहने चाहिये। आईएमए लखनऊ के सचिव डा संजय सक्सेना ने ‘स्वच्छ एवं स्वस्थ लखनऊ’ बनाने की बात कही। कार्यक्रम के अंत में सचिव डॉ संजय सक्सेना ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ गुरमीत सिंह एवं डॉ अनिल कुमार त्रिपाठी ने किया।

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