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कई महिलाएं यह पहचान ही नहीं पातीं कि वे हिंसा का शिकार हो रहीं

-केजीएमयू के मानसिक चिकित्सा विभाग के स्थापना दिवस पर महिला मानसिक स्वास्थ्य पर कार्यशाला आयोजित

सेहत टाइम्स

लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के मानसिक चिकित्सा विभाग द्वारा स्थापना दिवस के अवसर पर महिला मानसिक स्वास्थ्य पर एक कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद और विभागाध्यक्ष प्रो. विवेक अग्रवाल के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया, जिनके नेतृत्व ने इस महत्वपूर्ण पहल को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस कार्यशाला में निमहांस (NIMHANS), बेंगलुरु की प्रसिद्ध विशेषज्ञ डॉ. प्रभा एस. चंद्रा, डॉ. चेतना किशोर और डॉ. वीणा सत्यनारायण ने भाग लिया और महिलाओं से जुड़ी मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं पर अपने विचार साझा किए।

कार्यशाला में लिंग आधारित हिंसा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई, जिसमें घरेलू हिंसा (इंटिमेट पार्टनर वायलेंस) जैसे कई रूप शामिल हैं। ‘अंतरंग साथी हिंसा’ शब्द का अर्थ वर्तमान या पूर्व साथी या पति या पत्नी द्वारा शारीरिक हिंसा, यौन हिंसा, पीछा करना या मनोवैज्ञानिक नुकसान पहुंचाना है। यह चिंता का विषय है कि कई महिलाएं यह पहचान ही नहीं पातीं कि वे हिंसा का शिकार हो रही हैं। उदाहरण के लिए यदि उनके साथ मारपीट होती है तो उनको लगता है कि यह सब सामान्य बात है, जबकि ऐसा नहीं है, उन्हें इस सम्बन्ध में बात करनी चाहिये। विशेषज्ञों ने इस संदर्भ में जागरूकता बढ़ाने और समय पर हस्तक्षेप करने की आवश्यकता पर बल दिया।

गर्भावस्था और उसके बाद का समय संवेदनशील

कार्यशाला में प्रसवकालीन अवधि में साइकोट्रोपिक दवाओं के उचित उपयोग पर भी चर्चा हुई, जिसमें इस बात पर जोर दिया गया कि गर्भावस्था और प्रसवोत्तर (पोस्टपार्टम) अवधि मानसिक स्वास्थ्य के लिए संवेदनशील समय होते हैं, जहां पहले से मौजूद मानसिक बीमारियां बढ़ सकती हैं और नई मानसिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इस सत्र में मां और शिशु दोनों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उचित दवा प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर दिया गया। इसके अलावा, महिलाओं में यौन समस्याओं के आकलन और प्रबंधन पर भी चर्चा की गई, जिसमें मानसिक और भावनात्मक पहलुओं को रेखांकित किया गया।

महिला मानसिक स्वास्थ्य की बढ़ती जरूरत को देखते हुए, केजीएमयू के मानसिक चिकित्सा विभाग में प्रत्येक कार्यदिवस मंगलवार को प्रसवकालीन मानसिक स्वास्थ्य क्लिनिक संचालित किया जाता है, जो प्रो. बंदना गुप्ता और डॉ. रश्मि शुक्ला के मार्गदर्शन में कार्य करता है। यह क्लिनिक गर्भावस्था और प्रसव के दौरान मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही महिलाओं को आवश्यक उपचार और सहायता प्रदान करता है। महिलाओं में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की बढ़ती चिंताओं को ध्यान में रखते हुए, यह कार्यशाला चिकित्सा विशेषज्ञों, मनोवैज्ञानिकों और छात्रों के लिए ज्ञानवर्धन और उपचार के तरीकों को बेहतर बनाने का एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुई। केजीएमयू का मानसिक चिकित्सा विभाग महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए अनुसंधान और जागरूकता बढ़ाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है।

 

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