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गठिया के साथ हो फेफड़ों में समस्या, तो इन तीन विशेषज्ञों की देखरेख में होना चाहिये उपचार

-एसजीपीजीआई के डॉ आलोक नाथ ने सीटीडी-आईएलडी पर दिया महत्वपूर्ण व्याख्यान

-केजीएमयू के क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी और रूमेटोलॉजी विभाग ने मनाया 20वां स्थापना दिवस

सेहत टाइम्स

लखनऊ। कुछ मरीजों में गठिया के साथ ही फेफड़ों से संबंधित समस्या भी होती है, क्योंकि जो तत्व जोड़ों को खराब करके गठिया बीमारी पैदा करते हैं वही तत्व फेफड़ों पर भी हमला करते हैं, इसलिए आवश्यक है कि ऐसे मरीजों का इलाज तीन विशेषज्ञों गठिया रोग विशेषज्ञ, फेफड़ा रोग विशेषज्ञ तथा रेडियोलॉजिस्ट की संयुक्त टीम की देखरेख में हो। तीनों विशेषज्ञों के एकसाथ आने से डायग्नोसिस शीघ्र हो सकेगी जिससे उपचार के लिए दवाओं का चुनाव किया जा सकेगा।

यह लब्बोलुआब है संजय गांधी पीजीआई के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ आलोक नाथ के उस व्याख्यान का, जो उन्होंने आज 22 मार्च को यहां किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय केजीएमयू के क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी और रूमेटोलॉजी विभाग के 20वें स्थापना दिवस पर प्रस्तुत किया। डॉ आलोक नाथ ने केजीएमयू के ब्राउन हॉल में आयोजित कार्यक्रम में कनेक्टिव टिश्यू डिस्ऑर्डर रिलेटेड इंटरस्टिशियल लंग डिजीज Connective Tissue Disorder Related Interstitial Lung Disease विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि आईएलडी बीमारी में जितनी जल्दी संभव हो इसकी डायग्नोसिस कराकर इलाज शुरू कर देना चाहिये जिससे नुकसान न्यूनतम हो। उन्होंने कहा कि उपचार के दौरान बीच-बीच में उपचार की प्रगति का आकलन करने के लिए सीटी स्कैन की जांच और पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट कराते रहना चाहिये इससे उपचार की दिशा तय करने में मदद मिलती है।

इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्य अतिथि कुलपति पद्मश्री प्रो सोनिया नित्यानंद ने डॉ आलोक नाथ व अन्य के साथ दीप प्रज्ज्वलन किया। उन्होंने इस महत्वपूर्ण अवसर पर विभाग को शुभकामनाएँ दीं, साथ ही विभाग के चल रहे प्रयासों और योगदानों को लेकर प्रशंसा व्यक्त की। विभागाध्यक्ष डॉ पुनीत कुमार ने विभाग की प्रगति एवं उपलब्ध्यिों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 22 मार्च 2006 को डॉ सिद्घार्थ दास के नेतृत्व में विभाग की स्थापना हुई थी। तब से यह विभाग लगातार बेहतरी की ओर बढ़ते हुए अपनी सेवाएं दे रहा है।

बच्चों की ओपीडी में महंगी दवाएं फ्री में उपलब्ध

डॉ पुनीत कुमार ने बताया कि यहां काउंसलिंग, अल्ट्रासाउंड, फीजियोथैरेपी सेंटर, बोन मैरो डेंसिटी की जांच, ऑटो इम्यून डिजीज की पहचान के लिए होने वाली जांचों के लिए लैब की सुविधा विभाग में ही उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष से बच्चों के लिए पृथक ओपीडी चल रही है। खास बात यह है कि इस ओपीडी में जीवदया फाउंडेशन बच्चों को महंगी मिलने वाली बायोलॉजिकल्स दवाएं फ्री उपलब्ध कराती है। जो भी दवा चाहिये होती है, उसे फाउंडेशन एक दिन में उपलब्ध करा देता है। इस सुविधा से वे मरीज जो महंगी दवा खरीदने में असमर्थ हैं, उन्हें दवा उपलब्ध हो जाती है। उन्होंने बताया कि दवा शीघ्र शुरू होने का लाभ यह है कि बच्चों में गठिया से विकृति बढ़ती नहीं है। इसके अलावा विभाग में पोस्टर आदि से लोगों में इस बीमारी के जल्द से जल्द इलाज शुरू करने के प्रति जागरूकता पैदा की जाती है।

इस मौके पर रेडियो डायग्नोसिस विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सौरभ कुमार आईएलडी की स्थितियों से संबंधित इमेजिंग के पहलुओं पर चर्चा की, जिससे निदान और प्रबंधन में इमेजिंग की मदद के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी गयी।

इस मौके पर अच्छा कार्य करने वाले विभाग के तीन कर्मचारियों को उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान करते हुए पुरस्कृत किया गया, इनमें सिस्टर इंचार्ज सविता सिंह, सिक अटेंडेंट अनूप कुमार तथा सफाईकर्मी राम सरन शामिल थे। कार्यक्रम का समापन सहायक प्रोफेसर डॉ. मुकेश मौर्या द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। कार्यक्रम में केजीएमयू के अन्य विभागों के अनेक संकाय सदस्यों के साथ ही क्लिनिकल इम्यूनोलॉजी और रूमेटोलॉजी विभाग के अधिकारी, कर्मचारी आदि भी शामिल रहे।

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