-सिर्फ 1000 रुपये में असली जैसी कृत्रिम आंख उपलब्ध है केजीएमयू में

सेहत टाइम्स
लखनऊ। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने कृत्रिम नेत्र के क्षेत्र में क्रांतिकारी प्रगति की है। जिन लोगों ने किसी दुर्घटना, बीमारी या जन्मजात विकार के कारण अपनी आंख गंवा दी हो, उनके लिए एक अच्छी तरह से निर्मित कृत्रिम नेत्र न सिर्फ उनकी खोई हुई सुंदरता को लौटाता है, बल्कि उनके जीवन में आत्मविश्वास और आशा की नई किरण भी जगाता है।
यह कहना है केजीएमयू की प्रति कुलपति, नेत्र विभाग की विभागाध्यक्ष वरिष्ठ ऑक्युलोप्लास्टिक सर्जन डॉ. अपजीत कौर का। प्रो कौर कहती हैं कि इसका मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी पड़ता है। एक अच्छी तरह से निर्मित कृत्रिम नेत्र चेहरे के सौंदर्य में सामंजस्य स्थापित करता है। साथ ही आंख के बाहरी ढांचे के सही विकास में भी सहायक होता है। यह व्यक्ति के आत्मसम्मान और आत्मविश्वास को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वह कहती हैं कि कृत्रिम नेत्र केवल सौंदर्य सुधार का साधन नहीं है, यह व्यक्ति के आत्मविश्वास और सामाजिक समावेशन को पुनर्जीवित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने कहा कि सही तकनीक और देखभाल से, यह न सिर्फ चेहरों की खूबसूरती बल्कि जिंदगियों में भी नया उत्साह भर देता है।” यह समाज में किसी प्रकार के भेदभाव या असहजता की भावना को कम करने में भी सहायक सिद्ध होता है।
उन्होंने बताया कि कृत्रिम नेत्र पॉलिमेथिल मैथाक्रिलेट का बना होता है। इसकी माप ली जाती है। सटीक माप लेने में लगभग 1 घंटा लग जाता है। पूरी आंख के सटीक माप और तैयार करने में 3 से 4 दिन लगते हैं। रोगी को 1 हफ्ते बाद बुलाया जाता है। उसके बाद हर तीन महीने में एक बार एक वर्ष तक रोगी को बुलाया जाता है। कृत्रिम आंख से देखा नहीं जा सकता है।


रोगियों के अनुभव : उम्मीद की नई किरण
कृत्रिम नेत्र प्राप्त करने वाले कई रोगियों ने अपने अनुभव साझा किए हैं, जो प्रेरणा देने वाले हैं।
रामकुमार वर्मा (परिवर्तित नाम), 45 वर्ष, कहते हैं, “दुर्घटना के बाद मेरा आत्मविश्वास बिल्कुल टूट चुका था। कृत्रिम नेत्र लगने के बाद मुझे ऐसा लगा मानो मैंने अपनी खोई हुई पहचान फिर से पा ली हो। अब मैं लोगों से खुलकर बात कर सकता हूं, बिना किसी झिझक के।”
नीता अग्रवाल (परिवर्तित नाम), 2 वर्ष बालिका की माता साझा करती हैं, “रेटिनोब्लास्टोमा नामक कैंसर के कारण बच्ची को ऑपरेशन द्वारा अपनी आंख हटवानी पड़ी। कृत्रिम नेत्र ने न केवल उसके चेहरे की सुंदरता को बहाल किया, बल्कि उसके भीतर के डर और संकोच को भी दूर कर दिया। अब वह जीवन को नई आशा के साथ देखेगी।”
उन्होंने बताया कि केजीएमयू में उपलब्ध तकनीकों से उपचार मिलना आसान हो गया है।
कृत्रिम नेत्र बनाने की नवीन तकनीकें और मशीनें अब नेत्र विभाग में उपलब्ध हैं। OPD में परामर्श के बाद इस सुविधा का उपयोग ऑक्युलोप्लास्टी क्लिनिक के माध्यम से किया जा सकता है। मात्र 1000 रुपये के व्यय से उच्च कोटि की कृत्रिम आंख बनवा सकते हैं।
प्रो कौर ने कहा कि कृत्रिम नेत्र के सफल उपयोग के लिए नियमित देखभाल अत्यंत आवश्यक है। इसमें उचित स्वच्छता बनाए रखना, आंख के बाहरी ढांचे में संक्रमण से बचाव और समय-समय पर नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श लेना शामिल है। सही देखभाल से कृत्रिम नेत्र लंबे समय तक सुरक्षित और प्रभावी बना रहता है।

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