-एसजीपीजीआई ऑल एम्प्लाईज वेलफेयर एसोसिएशन ने पत्र लिखकर किया अनुरोध
सेहत टाइम्स
लखनऊ। एसजीपीजीआई ऑल एम्प्लाईज वेलफेयर एसोसिएशन संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान, लखनऊ ने संस्थान के निदेशक से अनुरोध किया है कि संस्थान परिसर में चल रहे शिक्षण संस्थान नर्सरी स्कूल और केन्द्रीय विद्यालय को बंद किये जाने से बचाने के लिए हस्तक्षेप करें जिससे यहां के कर्मचारियों के बच्चों के हित में खोले गये इन स्कूलों का लाभ कर्मचारियों के बच्चों को मिलता रहे।
एसोसिएशन के अध्यक्ष धर्मेश कुमार व महामंत्री सीमा शुक्ला द्वारा निदेशक को भेजे पत्र में अनुरोध किया गया है कि पीजीआई आल एम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन के संज्ञान में आया हैं कि पीजीआई संस्थान के नर्सरी स्कूल और केंद्रीय विद्यालय को धीरे-धीरे बंद कर दिया जाएगा यह हम सभी के लिए एक दुखदाई समाचार है। पत्र में कहा गया है कि महोदय आप संस्थान के मुखिया हैं, आपसे सविनय निवेदन है कि संस्थान के इन दोनों स्कूलों को बंद न किया जाए बल्कि इन्हें कैसे चालू रखा जाए इस पर विचार करते हुए कार्यवाही की जानी चाहिए। संस्थान परिसर में चल रहे नर्सरी स्कूल और केंद्रीय विद्यालय को धीरे-धीरे बंद करने की तैयारी है। पत्र में कहा गया है कि जैसा कि आप अवगत ही होंगे कि शिक्षा ही समाज को मार्ग दिखाती है और विकास के रास्ते खोलती है और यह तभी संभव है जब हमारे शिक्षण संस्थान बंद किये जाने के बजाय वह सुचारू रूप से चलते रहे किसी भी चलते हुए शिक्षण संस्थान का बंद किया जाना समाज के लिए बहुत नुकसानदाई सिद्ध होगा।


सीधी भर्तियां कराने जैसे कार्य के लिए प्रो धीमन का जताया आभार
पत्र में निदेशक डॉ आरके धीमन के कार्यकाल में की गयीं सीधी भर्तियों के लिए आभार जताते हुए दोनों विद्यालयों को बचाने का नेक कार्य भी करने का अनुरोध किया गया है। एसोसिएशन ने विद्यालयों को बंद किए जाने के किसी भी निर्णय पर पहुंचने से पहले पूरे प्रकरण को उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संज्ञान में इस प्रकरण को लाने का भी अनुरोध किया गया है। एसोसिएशन ने उम्मीद जतायी है कि मुख्यमंत्री के संज्ञान में आने पर विद्यालयों को चलते रहने के पक्ष में कोई ना कोई समाधान जरूर निकल आएगा।
एसोसिएशन ने यह भी सुझाव दिया है कि संस्थान के केंद्रीय विद्यालय के संसाधनों और वेतन आदि पर जो पूरा खर्चा संस्थान वहन कर रहा है वह बजट राज्य सरकार अथवा केंद्रीय सरकार से स्कूल को मिल जाए, जैसे दूसरे केंद्रीय विद्यालयों को मिलता है, जहां तक भवन की बात है उसे संस्थान नि:शुल्क उपलब्ध करा दे। एसोसिएशन ने कहा है कि हमें विश्वास है इस तरह के विकल्प पर विचार कर स्कूलों को बंद करने से बचाया जा सकता है, जिससे कर्मचारियों के बच्चों की शिक्षा बिना किसी बाधा के जारी रह सके।
