
लखनऊ। यहाँ स्थित राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी औषधि निर्माणशाला बदहाल स्थिति में है। इसकी दयनीय स्थिति तब उजागर हुई जब अपर मुख्य सचिव चिकित्सा, शिक्षा एवं आयुष डा अनिता भटनागर जैन ने आज यहाँ का आकस्मिक निरीक्षण किया।
निर्माणाशाला में कई अधिकारी/कर्मचारी बिना अवकाश प्रार्थनापत्र के अनुपस्थित पाये गये। कार्यालय का रखरखाव अत्यंत न्यून का स्तर का था और नोटिस बोर्ड भी जमीन पर रखा पाया गया, जिसमें एक वर्ष पुराने नोटिस लगे थे। फार्मेसी प्रांगण में खड़े पुराने वाहन एवं निष्प्रयोज्य सामग्री पायी गई, जिनकी शीघ्र नीलामी कराकर नया प्रस्ताव भेजने के निर्देश फार्मेसी अधीक्षक को दिए गये। इसके अतिरिक्त फार्मेसी के अन्तर्गत खरल कक्ष में 7 खरल मशीने लगी थीं, जिनमें से मात्र एक मशीन चालू अवस्था में पायी गई और अन्य मशीनें महीनों से बन्द पड़ी पायी गयीं। मशीनों के उपयोग के सम्बन्ध में एवं यह ज्ञात करने पर कि औषधियों का निर्माण क्यों नहीं हो रहा है, यह अवगत कराया गया कि औषधियों के कच्चे माल हेतु वर्ष 2015-16 में व तत्पश्चात 2016-17 में कोई आपूर्ति आदेश नहीं हुआ है। इस सम्बन्ध में निर्देशित किया गया कि निदेशक, आयुर्वेदिक अपने स्तर से अवर्णनीय शिथिलता की समीक्षा करें व कच्चे माल की उपलब्धता समयबद्ध रूप से सुनिश्चित करायी जाय, जिससे वर्तमान वित्तीय वर्ष में धनराशि का उपयोग हो और साथ ही साथ औषधियों का निर्माण भी सम्भव हो सके।
निरीक्षण में मिली कमियां, दो दर्जन अधिकारी/कर्मचारियों को विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि
औषधियों की उपलब्धता की सूचना न देने पर 21 क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारियों (आजमगढ़, बागपत, बहराइच, बलिया, बरेली, बस्ती, बिजनौर, देवरिया, फैजाबाद, गाजियाबाद, जालौन , जौनपुर, लखीमपुर खीरी, मऊ, पीलीभीत, प्रतापगढ़, शाहजहाँपुर, सीतापुर, सोनभद्र, उन्नाव एवं वाराणसी) को विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि प्रदान की गई।
इसके अतिरिक्त एक ड्रायर मशीन भी थी, जिसके बारे में ज्ञात करने पर पता चला कि वह भी चालू अवस्था में नहीं है। उक्त कक्ष में साफ-सफाई का भी उचित प्रबन्ध नहीं पाया गया। इस हेतु फार्मेसी अधीक्षक को निर्देशित किया गया कि साफ-सफाई का उचित प्रबन्ध करते हुए बन्द मशीनों को शीघ्र चालू करायें। फार्मेसी में स्थित यूनानी कक्ष का भी निरीक्षण किया गया, वहां पर कतिपय भट्ठियाँ थीं, जिनके सम्बन्ध में ज्ञात हुआ कि वह छह माह से उपयोग में नहीं हैं और इन भट्ठियों में कूड़ा-कचरा भरा पाया गया। इस हेतु सम्बन्धित चिकित्साधिकारी डा0 बृजेश एवं डा0 अबूसाद को कड़ी चेतावनी देते हुए आवश्यक सुधार करने के निर्देश दिए गये। निरीक्षण के दौरान अनेक दवायें ऐसी पायी गयीं, जो वर्ष 2012 एवं 2013 की निर्मित थीं तथा एक्सपायर हो चुकी थीं। इसके स्पष्ट होता है कि फार्मेसी अधीक्षक द्वारा एक वर्ष से कोई समीक्षा नहीं की गई।
फार्मेेसी प्रांगण में स्थित यूनानी वाटिका का निरीक्षण किया गया, जिसके अवलोकन से कहीं से भी वाटिका स्वरूप परिलक्षित नहीं हो रहा था। वहां कुछ ही अश्वगंधा, एलोवेरा एवं अशोक के पौधे पाये गये। इसके अतिरिक्त पूरा प्रांगण खरपतवार से युक्त जंगल में तब्दील पाया गया।
उक्त के दृष्टिगत फार्मेसी के वर्तमान एवं पूर्व अधीक्षक के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही एवं डा वीके श्रीवास्तव, सहायक प्रबन्धक, फार्मेसी तथा यूनानी एवं आयुर्वेदिक वाटिकाओं की देख-रेख से सम्बन्धित अधिकारियों एवं प्रोफेसर माखन लाल को प्रतिकूल प्रविष्टि दिए जाने के निर्देश दिए गये। साथ ही यह भी निर्देशित किया गया कि प्रयोगशाला के अपग्रेडशन हेतु एक सप्ताह में प्रस्ताव बनाया जाए, जिससे उसकी क्षमता का उपयोग हो सके।
