लखनऊ। अगर आप प्राणायाम करते हैं तो घर में तुलसी के पेड़ के पास बैठकर करें यदि तुलसी का पेड़ नहीं लगा हो तो लगा लें। विशेषज्ञ बताते हैं कि तुलसी के पेड़ के नजदीक बैठकर प्राणायाम करने से तुलसी की पत्तियों की सुगंध से शरीर के अंदर पनपने वाले रोगनाशक कीटाणु समाप्त हो जाते हैं क्योंकि प्राणायाम के वक्त सांस लेने से तुलसी की सुगंध शरीर के अंदर प्रविष्ट हो जाती है। कीटाणु नष्ट होने से जहां शरीर बलशाली और वीर्यवान, ओजस्वी और तेजवान बन जाता है वहीं सौंदर्य में भी वृद्धि होती है।
मच्छरों की नो इंट्री
यही नहीं तुलसी की गंध मिश्रित वायु में मच्छरों का प्रवेश नहीं होता है जिससे मलेरिया आदि के कीटाणु प्रवेश नहीं कर पाते हैं। न सिर्फ मच्छर बल्कि अन्य जीव-जंतु जैसे झींगुर, भुनगा, खटमल के साथ-साथ सर्प का प्रवेश भी नहीं होता है। तुलसी की कुछ पत्तियों को अगर बक्से में रखे कपड़ों के साथ रख दें तो उनमें कीड़े-मकोड़े नहीं लगते हैं और न ही चूहेे काटते हैं। यही नहीं तुलसी के पेड़ के नीचे की मिट्टी भी इतनी गुणकारी होती है कि पुराने जमाने में कच्चे मकानों में फर्श और दीवार को इसी मिट्टी से लीपा जाता था जिससे घर के अंदर रोग के कीटाणु पनप नहीं पाते थे और रोगियों के रोग शीघ्र दूर हो जाते थे।
पानी को भी गुणवान बना देती है तुलसी
विशेषज्ञ बताते हैं कि तुलसी की कुछ पत्तियों को साधारण जल में डाल दिया जाये तो वह पूरा जल तुलसी की पत्तियों से सुगंधित होकर बेहद गुणकारी हो जाता है। कभी-कभी ऐसी परिस्थितियां होती है कि किसी जगह का पानी प्रदूषित होता है तो ऐसे में तुलसी की कुछ पत्तियों को पानी में डाल दें फिर उस पानी का इस्तेमाल करें। इसके अतिरिक्त तुलसी की कुछ पत्तियों को पानी में डाल कर रख दें फिर वह पानी रोज तडक़े स्नानादि के बाद एक घूंट पीयें इससे अनेक रोगों से छुटकारा पाया जा सकता है। इस जल के सेवन से ताकत आती है शरीर का तेज बढ़ता है साथ ही मेधा और स्मरण शक्ति भी तेज होती है।
