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	<title>to likely &#8211; Sehat Times | सेहत टाइम्स</title>
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	<description>Health news and updates &#124; Sehat Times</description>
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		<title>मुख्‍य चिकित्‍सा अधिकारियों की मनमानी से 80 फीसदी क्‍लीनिक्‍स, अस्‍पतालों पर लगने वाला है ताला</title>
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		<pubDate>Sat, 18 May 2019 15:32:08 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="600" height="450" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/05/ima-1-2.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/05/ima-1-2.jpg 600w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/05/ima-1-2-300x225.jpg 300w" sizes="(max-width: 600px) 100vw, 600px" />ज्‍यादातर जिलों में सीएमओ कार्यालयों में पंजीकरण प्रक्रिया में मनमानी अव्‍यवहारिक शर्तों की आड़ में नहीं हो पा रहा डॉक्‍टरों का सालाना पंजीकरण   लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश में झोलाछाप डॉक्‍टरों की डॉक्‍टरी मस्‍त चल रही है। जबकि इन झोलाछाप को ही अलग-थलग करने के लिए प्राइवेट क्षेत्र में काम कर रहे डिग्रीधारक डॉक्‍टरों के हर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="600" height="450" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/05/ima-1-2.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/05/ima-1-2.jpg 600w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/05/ima-1-2-300x225.jpg 300w" sizes="(max-width: 600px) 100vw, 600px" /><p><span style="color: #0000ff;"><strong>ज्&#x200d;यादातर जिलों में सीएमओ कार्यालयों में पंजीकरण प्रक्रिया में मनमानी</strong></span></p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>अव्&#x200d;यवहारिक शर्तों की आड़ में नहीं हो पा रहा डॉक्&#x200d;टरों का सालाना पंजीकरण </strong></span></p>
<p><strong><img decoding="async" loading="lazy" class="size-medium wp-image-11520 aligncenter" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/05/ima-300x225.jpg" alt="" width="300" height="225" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/05/ima-300x225.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/05/ima-768x576.jpg 768w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/05/ima.jpg 835w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /> </strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> उत्&#x200d;तर प्रदेश में झोलाछाप डॉक्&#x200d;टरों की डॉक्&#x200d;टरी मस्&#x200d;त चल रही है। जबकि इन झोलाछाप को ही अलग-थलग करने के लिए प्राइवेट क्षेत्र में काम कर रहे डिग्रीधारक डॉक्&#x200d;टरों के हर साल सिर्फ पंजीकरण को अनिवार्य करने के हाईकोर्ट के आदेश की आड़ में जिले के मुख्&#x200d;य चिकित्&#x200d;सा अधिकारी अपनी मनमानी कर रहे हैं। स्थितियां यहां तक पहुंच गयी हैं कि 70 प्रतिशत जनता का इलाज करने वाले निजी चिकित्&#x200d;सकों में से करीब 80 फीसदी के क्&#x200d;लीनिक, अस्&#x200d;पतालों पर इस माह के अंत में ताला पड़ जायेगा।  यह जानकारी इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की प्रदेश व लखनऊ जिला इकाई के पदाधिकारियों ने आज यहां आईएमए भवन में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में दी।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>यूपी आईएमए के अध्&#x200d;यक्ष डॉ एएम खान और आईएमए लखनऊ के अध्&#x200d;यक्ष डॉ जीपी सिंह ने बताया कि हाईकोर्ट ने हर साल निजी चिकित्&#x200d;सकों के सीएमओ के कार्यालय में पंजीकरण का आदेश तो दिया था लेकिन यह भी कहा था कि सीएमओ डॉक्&#x200d;टर को तंग नहीं करेंगे। सिर्फ उनकी डिग्री देखकर ही पंजीकरण कर लिया जाये। लेकिन स्थिति तो यह है कि डॉक्&#x200d;टर चाहे छोटा क्&#x200d;लीनिक, छोटा अस्&#x200d;पताल चला रहा हो या फि&#x200d;र बड़ा नर्सिंग होम, सभी के लिए एक ही मानक तय कर दिये गये हैं । लाइसेंस फीस मनमाने तरीके से तय की गयी है। बिना कचरा उठाये कचरे उठाने के पैसों की वसूली की जा रही है। सबसे बड़ी दिक्&#x200d;कत यह है कि ज्&#x200d;यादातर जिलों में पंजीकरण ऑनलाइन कर दिया गया है। जबकि कुछ जगहों पर सीएमओ ऑफ लाइन पंजीकरण कर रहे हैं। ज&#x200d;बकि होना यह चाहिये व्&#x200d;यवहारिक शर्तों को पूरा कराते हुए सभी जिलों में एक व्&#x200d;यवस्&#x200d;था लागू होनी चाहिये।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>डॉ खान ने बताया कि जिलों के चिकित्&#x200d;सकों में इस मनमानी को लेकर बहुत रोष है, और स्थितियां यह हो रही हैं कि अगर सभी जिलों में आगामी 30 मई तक अगर सीएमओ द्वारा पंजीकरण नहीं किया गया तो 70 प्रतिशत जनता का इलाज करने वाले निजी क्षेत्र के डॉक्&#x200d;टर अपना प्रतिष्&#x200d;ठान बंद करने पर मजबूर हो जायेंगे। इससे चिकित्&#x200d;सक और जनता दोनों को भारी परेशानी उठानी पड़ सकती है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>अव्&#x200d;यावहारिक है शर्त</strong></span></p>
<p>आपको बता दे कि 30 अप्रैल तक पंजीकरण के लिए जो अर्हतायें पूरी की जानी हैं, उनमें एक है फायर विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र। चिकित्&#x200d;सकों का कहना है कि हम फायर विभाग का सर्टीफि&#x200d;केट भी लगाने को तैयार हैं बशर्ते फायर विभाग दे तो। डॉ खान ने बताया कि फायर विभाग का कहना है कि जब तक 15 मीटर से ऊंची बिल्डिंग न हो, हम एनओसी नहीं दे सकते है। डॉक्&#x200d;टरों का तर्क यह है कि किसी की क्&#x200d;लीनिक है, या छोटा-मोटा हॉस्पिटल है और उसकी ऊंचाई 15 मीटर नहीं है तो वह शख्&#x200d;स आखिर फायर ब्रिगेड का सर्टी&#x200d;फि&#x200d;केट कहां से लाकर देगा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उन्&#x200d;होंने बताया कि हालांकि लखनऊ, मुरादाबाद जैसे जिलों के सीएमओ ने इस स्थिति को समझा और पंजीकरण आवेदन ऑफ लाइन स्&#x200d;वीकार कर लिया। इसमें मुरादाबाद में तो डॉक्&#x200d;टरों का पंजीकरण हो भी गया है जबकि लखनऊ में आवेदन स्&#x200d;वीकार किये गये हैं, अभी पंजीकरण होने शेष है। उन्&#x200d;होंने बताया कि दिक्&#x200d;कत यह है कि ऑनलाइन में जब तक फायर विभाग का एनओसी नहीं होता है सॉफ्टवेयर आगे बढ़ता ही नहीं है। परिणामस्&#x200d;वरूप जिन जिलों के सीएमओ ने ऑफलाइन आवेदन लेने से मना कर दिया है उन जिलों के डॉक्&#x200d;टरों को तो काफी परेशानी हो रही हैं, इसी कारण उनमें गहरा रोष है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इसी प्रकार क्&#x200d;लीनिकल स्&#x200d;टेब्लिशमेंट ऐक्&#x200d;ट लागू करने की तैयारी पर भी आईएमए पदाधिकारियों ने ऐतराज जताया है। उनका कहना है कि जिस प्रकार हरियाणा सरकार ने अपना मॉडल चलाया है उसी प्रकार से उत्&#x200d;तर प्रदेश सरकार को भी करना चाहिये। हरियाणा सरकार ने 50 बेड से कम अस्&#x200d;पताल वालों को इस ऐक्&#x200d;ट से मुक्&#x200d;त रखा है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>डॉ खान ने इसका व्&#x200d;यवहारिक पहलू बतते हुए कहा कि ऐक्&#x200d;ट के अनुसार जिस अस्&#x200d;पताल में इमरजेंसी में मरीज पहुंचेगा और यदि मरीज का इलाज उस अस्&#x200d;पताल में उपलब्&#x200d;ध नहीं है तो दूसरे अस्&#x200d;पताल को रेफर करने से पहले मरीज की हालत को स्थिर रखने लायक कम से बना कर ही भेजे। डॉ खान ने कहा कि मान लीजिये कोई छोटा नर्सिंग होम या जच्&#x200d;चा सेंटर है और वहां इमरजेंसी में कोई मरीज हार्ट की बीमारियों से ग्रस्&#x200d;त होकर पहुंचता है तो भला वहां हार्ट अटैक का इलाज या रेफर करने से पहले उसे स्थिर रखने के लिए भी इलाज डॉक्&#x200d;टर कैसे कर सकेगा। और अगर करने की कोशिश करे भी तो मरीज की जान को भी खतरा हो सकता है, जबकि मरीज को गोल्&#x200d;डेन आवर्स में ही स्&#x200d;पेशियलिस्&#x200d;ट की जरूरत होती है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>पत्रकार वार्ता में यूपी आईएमए महिला विंग की अध्&#x200d;यक्ष डॉ रुखसाना खान, लखनऊ आईएमए के सचिव डॉ जेडी रावत, डॉ आरबी सिंह, डॉ संजय सक्&#x200d;सेना, डॉ राकेश कुमार श्रीवास्&#x200d;तव भी उपस्थित रहे।</p>
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