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	<title>sound wave surgery Archives - Sehat Times | सेहत टाइम्स</title>
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	<description>Health news and updates &#124; Sehat Times</description>
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		<title>ध्वनि तरंगों से सर्जरी सहित कई अत्याधुनिक टेक्नीक्स पर एसजीपीजीआई की नजर</title>
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		<pubDate>Sun, 30 Aug 2026 19:55:08 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="1052" height="479" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/sgpgi-1.jpeg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/sgpgi-1.jpeg 1052w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/sgpgi-1-300x137.jpeg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/sgpgi-1-1024x466.jpeg 1024w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/sgpgi-1-768x350.jpeg 768w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/sgpgi-1-1050x479.jpeg 1050w" sizes="(max-width: 1052px) 100vw, 1052px" /><p>-&#8216;इंडियन सोसाइटी ऑफ न्यूरोरेडियोलॉजी, मिड-टर्म CME 2026&#8217; में रेडियोडायग्नोसिस विभाग की बढ़ती क्षमताओं का प्रदर्शन सेहत टाइम्स लखनऊ। देश भर से लगभग 300 प्रतिनिधियों और प्रमुख न्यूरोलॉजिकल व रेडियोलॉजिकल सेंटर्स की भागीदारी के साथ, संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान(SGPGIMS), लखनऊ में आयोजित &#8216;इंडियन सोसाइटी ऑफ न्यूरोरेडियोलॉजी, मिड-टर्म CME 2026&#8217; ने एडवांस्ड न्यूरोरेडियोलॉजी, स्ट्रोक केयर और &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="1052" height="479" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/sgpgi-1.jpeg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/sgpgi-1.jpeg 1052w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/sgpgi-1-300x137.jpeg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/sgpgi-1-1024x466.jpeg 1024w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/sgpgi-1-768x350.jpeg 768w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/sgpgi-1-1050x479.jpeg 1050w" sizes="auto, (max-width: 1052px) 100vw, 1052px" /><h2><span style="color: #ff0000;"><strong>-&#8216;इंडियन सोसाइटी ऑफ न्यूरोरेडियोलॉजी, मिड-टर्म CME 2026&#8217; में रेडियोडायग्नोसिस विभाग की बढ़ती क्षमताओं का प्रदर्शन</strong></span></h2>
<p><img decoding="async" class="wp-image-61010 alignleft" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/sgpgi-2.jpeg" alt="" width="377" height="291" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/sgpgi-2.jpeg 933w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/sgpgi-2-300x232.jpeg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/sgpgi-2-768x593.jpeg 768w" sizes="(max-width: 377px) 100vw, 377px" /></p>
<p><strong>सेहत टाइम्स</strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> देश भर से लगभग 300 प्रतिनिधियों और प्रमुख न्यूरोलॉजिकल व रेडियोलॉजिकल सेंटर्स की भागीदारी के साथ, संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान(SGPGIMS), लखनऊ में आयोजित &#8216;इंडियन सोसाइटी ऑफ न्यूरोरेडियोलॉजी, मिड-टर्म CME 2026&#8217; ने एडवांस्ड न्यूरोरेडियोलॉजी, स्ट्रोक केयर और न्यूरो-इंटरवेन्शन में संस्थान की तेज़ी से बढ़ती क्षमताओं को प्रदर्शित किया।</p>
<p>29-30 अगस्त को &#8220;ब्रेन वैस्कुलर मैलफॉर्मेशन ऑफ चाइल्डहुड&#8221; (बचपन में मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं की असामान्यता) विषय पर आयोजित इस बैठक में प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हुए, जिनमें PGIMER चंडीगढ़, AIIMS, टाटा मेमोरियल सेंटर मुंबई, KEM हॉस्पिटल मुंबई, SCTIMST, NIMHANS बेंगलुरु, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और अन्य प्रमुख केंद्र शामिल थे। इस कार्यक्रम में पीडियाट्रिक स्ट्रोक, पीडियाट्रिक न्यूरो-इंटरवेन्शन, वैस्कुलर मैलफॉर्मेशन, स्ट्रोक इमेजिंग और आधुनिक एंडोवैस्कुलर प्रक्रियाओं पर विशेष चर्चाएँ हुईं।</p>
<p>इस कॉन्फ्रेंस में एसजीपीजीआई के एक क्वाटरनरी-केयर सेंटर (उच्चतम स्तर की विशेष चिकित्सा सेवा केंद्र) के रूप में बढ़ते विज़न पर भी प्रकाश डाला गया, जिसमें इसके एकेडमिक, हॉस्पिटल और स्पेशलाइज़्ड-केयर इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार शामिल है। जैसे-जैसे संस्थान अपनी क्लिनिकल और एकेडमिक पहुँच बढ़ा रहा है, रेडियोडायग्नोसिस विभाग भी साथ ही साथ जटिल न्यूरोलॉजिकल विकारों के लिए अत्यधिक विशेष इमेजिंग और इमेज-गाइडेड उपचार प्रदान करने में अपनी भूमिका को मज़बूत कर रहा है। 24 घंटे चलने वाली स्ट्रोक सर्विस पहले से ही काम कर रही है और गंभीर स्ट्रोक वाले मरीज़ों के लिए एक ज़रूरी रास्ता बना रही है, जहाँ तेज़ी से बीमारी का पता लगाने और इलाज शुरू करने से ठीक होने और ज़िंदगी भर की विकलांगता के बीच का फ़र्क तय हो सकता है।</p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>बच्चों का न्यूरो-इंटरवेंशन</strong></span></h3>
<p>अगला बड़ा कदम बच्चों के न्यूरो-इंटरवेंशन (दिमाग और नसों से जुड़ी बीमारियों का इलाज) का है। स्ट्रोक और दिमाग की नसों की जटिल बनावट की समस्या वाले बच्चों को बहुत खास तरह की इमेजिंग और इलाज की ज़रूरत होती है, जिसमें अक्सर ऐसे तरीके अपनाए जाते हैं जिनके लिए बहुत ज़्यादा महारत और सटीकता की ज़रूरत होती है। संस्थान इन क्षमताओं को विकसित कर रहा है, ताकि आने वाले एडवांस्ड पीडियाट्रिक सेंटर के हिस्से के तौर पर बच्चों के लिए एडवांस्ड न्यूरो-रेडियोलॉजिकल सेवाएँ उपलब्ध कराई जा सकें।</p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>डायग्नोसिस, इंटरवेंशन और एडवांस्ड ट्रीटमेंट एक स्थान पर</strong></span></h3>
<p>यह विस्तार सिर्फ़ पारंपरिक इलाज के तरीकों तक ही सीमित नहीं है। रेडियोडायग्नोसिस विभाग अपनी भविष्य की &#8216;क्वाटरनरी-केयर&#8217; (सबसे ऊँचे स्तर की विशेष चिकित्सा सेवा) की सोच के तहत नई, कम चीर-फाड़ वाली (मिनिमली इनवेसिव) और बिना सर्जरी वाली तकनीकों पर भी विचार कर रहा है। एसजीपीजीआई के रेडियोडायग्नोसिस विभाग की प्रमुख प्रोफ़ेसर अर्चना गुप्ता ने कहा कि विभाग एक ऐसा व्यापक सिस्टम बनाने की दिशा में काम कर रहा है जिसमें बीमारी का पता लगाने, इंटरवेंशन और एडवांस्ड इलाज की सुविधाएँ एक ही जगह पर मिल सकें।</p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>न्यूरोलॉजिकल देखभाल का दायरा बढ़ रहा</strong></span></h3>
<p>उन्होंने कहा, &#8220;हमारा ध्यान अपने मरीज़ों के लिए उपलब्ध न्यूरोलॉजिकल देखभाल के दायरे को लगातार बढ़ाने पर है। संस्थान, इसके अस्पताल और एकेडमिक इंफ्रास्ट्रक्चर के बढ़ने के साथ, हम ऐसी नई तकनीकों पर भी विचार कर रहे हैं जो मरीज़ को कम तकलीफ़ पहुँचाकर सटीक इलाज दे सकें। बच्चों के लिए हमारी आने वाली एडवांस्ड पीडियाट्रिक सेवाएँ बच्चों में न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के जटिल मामलों को संभालने की हमारी क्षमता को और मज़बूत करेंगी।&#8221;</p>
<p>उन्होंने कहा कि विभाग कुछ खास स्थितियों में HIFU—हाई-इंटेंसिटी फोकस्ड अल्ट्रासाउंड—की भविष्य की भूमिका पर भी विचार कर रहा है। आसान शब्दों में कहें तो, HIFU शरीर के अंदर किसी खास हिस्से का इलाज करने का एक तरीका है, जिसमें सर्जरी के लिए चीरा नहीं लगाना पड़ता। इसमें बहुत ज़्यादा फोकस्ड साउंड वेव्स (ध्वनि तरंगों) का इस्तेमाल किया जाता है, जो मैग्नीफ़ाइंग ग्लास से गुज़रने वाली सूरज की रोशनी की तरह केंद्रित होकर किसी खास टिश्यू (ऊतक) तक सटीक रूप से ऊर्जा पहुँचाती हैं। यह केंद्रित ऊर्जा आस-पास के टिश्यू को कम नुकसान पहुँचाते हुए उस खास हिस्से को गर्म करके उसका इलाज कर सकती है। बीमारी और क्लिनिकल ज़रूरत के आधार पर, यह पारंपरिक सर्जरी के मुकाबले कम चीर-फाड़ वाला विकल्प हो सकता है। प्रोफ़ेसर गुप्ता ने कहा कि जैसे-जैसे संस्थान क्वाटरनरी केयर (सबसे एडवांस्ड मेडिकल केयर) की ओर बढ़ रहा है, ऐसी नई तकनीकें मौजूदा सर्जिकल और इंटरवेंशनल तरीकों की जगह ले सकती हैं और सही मरीज़ों के लिए इलाज के और विकल्प खोल सकती हैं।</p>
<p><img decoding="async" class="size-full wp-image-61011 aligncenter" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/sgpgi-1.jpeg" alt="" width="1052" height="479" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/sgpgi-1.jpeg 1052w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/sgpgi-1-300x137.jpeg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/sgpgi-1-1024x466.jpeg 1024w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/sgpgi-1-768x350.jpeg 768w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/sgpgi-1-1050x479.jpeg 1050w" sizes="(max-width: 1052px) 100vw, 1052px" /></p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>इलाज के तरीके में बड़ा बदलाव</strong></span></h3>
<p>एसजीपीजीआई के रेडियोडायग्नोसिस विभाग के प्रोफ़ेसर और CME के ​​ऑर्गनाइज़िंग प्रेसिडेंट डॉ. विवेक सिंह ने कहा कि न्यूरो-इंटरवेंशनल सेवाओं का विस्तार न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के इलाज के तरीके में एक बड़ा बदलाव है।<br />
उन्होंने कहा, &#8220;न्यूरो-इंटरवेंशन ने न्यूरोलॉजिकल केयर के नज़रिए को बदल दिया है। आज, एडवांस्ड इमेजिंग हमें सिर्फ़ यह नहीं बताती कि क्या गड़बड़ है, यह हमें सीधे इलाज की दिशा भी दिखा सकती है। चाहे वह एक्यूट स्ट्रोक का मरीज़ हो या जटिल वैस्कुलर मैलफॉर्मेशन वाला बच्चा, सटीक और समय पर किया गया इलाज नतीजों को बहुत बेहतर बना सकता है।&#8221; कॉन्फ़्रेंस में मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी, कैरोटिड आर्टरी स्टेंटिंग और इंट्राक्रैनील एन्यूरिज्म मैनेजमेंट की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग भी शामिल थी, जो आधुनिक न्यूरो-इंटरवेंशन में प्रैक्टिकल जानकारी के बढ़ते महत्व को दिखाती है।</p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>स्ट्रोक से बचे बच्चे सबसे मज़बूत संदेश</strong></span></h3>
<p>वैज्ञानिक चर्चाओं में तब एक मानवीय पहलू भी जुड़ गया जब कॉन्फ़्रेंस के दौरान उन बच्चों को सम्मानित किया गया, जो इलाज के बाद स्ट्रोक से ठीक हो गए थे। विशेषज्ञों की इस सभा में, ठीक हुए ये बच्चे सिर्फ़ सफल मेडिकल केस से कहीं अधिक महत्वपूर्ण थे। वे इस बात का प्रतीक थे कि समय पर बीमारी का पता चलने, सही इलाज और न्यूरोलॉजी से जुड़ी बेहतर देखभाल से क्या कुछ हासिल किया जा सकता है। उनकी मौजूदगी ने पब्लिक हेल्थ से जुड़ा एक अहम संदेश दिया: बच्चों को भी स्ट्रोक हो सकता है, और बच्चों में होने वाले स्ट्रोक को एक ऐसी मेडिकल इमरजेंसी माना जाना चाहिए जिसके लिए खास विशेषज्ञता की ज़रूरत होती है।</p>
<p>किसी बच्चे के लिए, सफल इलाज का मतलब सिर्फ़ जीवित बचना नहीं है। इसका मतलब स्कूल लौटना, दोस्तों के साथ खेलना, पढ़ाई जारी रखना और एक सामान्य बचपन जीने का मौका मिलना भी हो सकता है। इसलिए, संस्थान के रेडियोडायग्नोसिस विभाग का बड़ा मकसद न्यूरोरेडियोलॉजी और न्यूरो-इंटरवेन्शन में हुई तरक्की का फ़ायदा मरीज़ों तक पहुँचाना है, ताकि वे बेहतर ढंग से ठीक हो सकें, उनमें विकलांगता कम हो और वे एक बेहतर ज़िंदगी जी सकें।</p>
<p>जैसे-जैसे SGPGIMS अपने हॉस्पिटल और एकेडमिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार कर रहा है और बच्चों की खास देखभाल (स्पेशलाइज़्ड पीडियाट्रिक केयर) के अगले चरण की तैयारी कर रहा है, रेडियोडायग्नोसिस विभाग का संदेश है—मकसद के साथ इनोवेशन। 24×7 स्ट्रोक सर्विस से लेकर एडवांस्ड न्यूरो-इंटरवेन्शन तक, बच्चों में जटिल वैस्कुलर विकारों (vascular malformations) से लेकर हाई-इंटेंसिटी फोकस्ड अल्ट्रासाउंड जैसी नई नॉन-सर्जिकल तकनीकों तक, यह संस्थान न्यूरोलॉजिकल देखभाल की संभावनाओं को लगातार बढ़ा रहा है और स्ट्रोक से उबरने के बाद कॉन्फ्रेंस में मौजूद बच्चों ने शायद उस प्रगति की सबसे प्रभावशाली परिभाषा पेश की। एडवांस्ड मेडिकल साइंस की असली उपलब्धि तकनीक खुद नहीं है—बल्कि मरीज़ को वह जीवन वापस दिलाना है, जिसे बीमारी ने छीनने की कोशिश की थी।</p>
<p>The post <a href="http://sehattimes.com/sgpgi-is-looking-at-several-cutting-edge-techniques-including-sound-wave-surgery/61009">ध्वनि तरंगों से सर्जरी सहित कई अत्याधुनिक टेक्नीक्स पर एसजीपीजीआई की नजर</a> appeared first on <a href="http://sehattimes.com">Sehat Times | सेहत टाइम्स</a>.</p>
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