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	<title>sickness &#8211; Sehat Times | सेहत टाइम्स</title>
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	<description>Health news and updates &#124; Sehat Times</description>
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		<title>जो प्रदूषण शहर में बीमार करता है, वही गाँव में भी बीमार करता है तो फिर आखिर भेदभाव क्यों ?</title>
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		<pubDate>Mon, 26 Mar 2018 14:31:26 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="1280" height="853" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/03/report.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/03/report.jpg 1280w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/03/report-300x200.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/03/report-768x512.jpg 768w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/03/report-1024x682.jpg 1024w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" />हालात से निपटने के लिए वायु गुणवत्ता जांच प्रक्रिया के प्रादेशिक स्तर पर विस्तार की मांग लखनऊ. प्रदूषण को लेकर वैसे तो बहुत सी चर्चाएं होती है परंतु आज राजधानी लखनऊ में क्लाइमेट एजेंडा संस्था द्वारा अपने 100 प्रतिशत उत्तर प्रदेश अभियान के तहत उत्तर प्रदेश में वायु प्रदूषण के हालात पर एक विस्तृत प्रादेशिक &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="1280" height="853" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/03/report.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/03/report.jpg 1280w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/03/report-300x200.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/03/report-768x512.jpg 768w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/03/report-1024x682.jpg 1024w" sizes="(max-width: 1280px) 100vw, 1280px" /><p><span style="color: #0000ff;"><strong>हालात से निपटने के लिए वायु गुणवत्ता जांच प्रक्रिया के प्रादेशिक स्तर पर विस्तार की मांग</strong></span></p>
<p><img decoding="async" loading="lazy" class="size-medium wp-image-4884 alignright" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/03/report-300x200.jpg" alt="" width="300" height="200" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/03/report-300x200.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/03/report-768x512.jpg 768w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/03/report-1024x682.jpg 1024w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/03/report.jpg 1280w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><span style="color: #000000;"><strong>लखनऊ.</strong></span> प्रदूषण को लेकर वैसे तो बहुत सी चर्चाएं होती है परंतु आज राजधानी लखनऊ में क्लाइमेट एजेंडा संस्था द्वारा अपने 100 प्रतिशत उत्तर प्रदेश अभियान के तहत उत्तर प्रदेश में वायु प्रदूषण के हालात पर एक विस्तृत प्रादेशिक रिपोर्ट जारी की गई. खास बात यह रही कि इस मौके पर मौजूद वक्ताओं का कहना था कि प्रदूषण को मापने के लिए कुछ चुनिंदा शहरों को चुन लिया जाता है, जैसे कि उत्तर प्रदेश में 7 शहरों को चुना गया. वक्ताओं का कहना है कि जब वायु प्रदूषण पूरे उत्तर प्रदेश में फैला हुआ है तो प्रदूषण मापने के लिए सिर्फ 7 शहरों का ही चुनाव क्यों ? इसमें छोटे शहरों के साथ ही इसमें गावों को भी शामिल करना चाहिए ताकि प्रदूषण से निपटने की योजनाओं को बनाते समय विस्तृत योजना तैयार की जा सके.</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>पूरा प्रदेश भयंकर रूप से वायु प्रदूषण की चपेट में</strong></span></p>
<p>प्रेस क्लब में सोमवार 26 मार्च को आयोजित एक कार्यक्रम में विशिष्ट आंकड़ों के आधार पर तैयार की गयी इस रिपोर्ट को पर्पज क्लाइमेट लैब, नयी दिल्ली से आये संदीप दहिया,  सामाजिक कार्यकर्ता ताहिरा हसन, प्रज्ञा इंटरनेशनल संस्था के निदेशक प्रमिल द्विवेदी और क्लाइमेट एजेंडा की मुख्य अभियानकर्ता एकता शेखर ने संयुक्त रूप से जारी किया. बताया गया कि यह रिपोर्ट, 100 प्रतिशत उत्तर प्रदेश अभियान के अंतर्गत जुटाये गए 15 जिलों के वायु प्रदूषण के आंकड़ों पर आधारित है. रिपोर्ट में सामने आये आंकड़ों और विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुसार पूरा प्रदेश भयंकर रूप से वायु प्रदूषण की चपेट में है. ज्यादातर हिस्सों में स्वास्थ्य आपातकाल के हालात हैं.</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>ग्रामीण और शहरी इलाकों के वायु प्रदूषण का अध्ययन वाली पहली रिपोर्ट</strong></span></p>
<p>रिपोर्ट के बारे में विस्तार से बताते हुए एकता शेखर ने कहा “उत्तर प्रदेश के ग्रामीण और शहरी इलाकों के वायु प्रदूषण का अध्ययन कर जारी की जाने वाली यह अब तक की पहली प्रदेश आधारित रिपोर्ट है. एयर किल्स नामक यह रिपोर्ट हमें बताती है की वायु प्रदूषण के स्रोतों को चिन्हित किया जाना और सख्ती से ख़त्म करना अब जरूरी हो गया है. साथ ही, इस रिपोर्ट ने हमें वायु प्रदूषण के सन्दर्भ में चुनिन्दा शहरों की सीमा से बाहर निकल कर सोचने के लिए भी मजबूत तथ्य दिए हैं.” उन्होंने आगे कहा “एयर किल्स हमें बताती है कि प्रदेश की आबोहवा में घुलने वाला जहर केवल चार या पांच शहरों तक ही सीमित नहीं है. इसका मतलब यह भी है कि वर्तमान में सरकारों द्वारा प्रदूषण नियंत्रण के लिए शहर आधारित जो भी प्रयास किये जा रहे हैं, उनका विस्तार प्रादेशिक स्तर तक करना जरूरी है.”</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>आम आदमी के स्वच्छ हवा में जीने के अधिकार का उल्लंघन हो रहा</strong></span></p>
<p>सामाजिक कार्यकर्ता ताहिरा हसन ने कहा “क्लाइमेट एजेंडा द्वारा तैयार यह रिपोर्ट केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा किये जाने वाले वायु गुणवत्ता जांच का दायरा बढाने की मांग करती है. वर्तमान में, नेशनल ऐम्बियेंट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग (नाकम) नेटवर्क के अंतर्गत यह जांच केवल 7 शहरों तक सीमित है. वायु प्रदूषण नियंत्रण के सन्दर्भ में उत्तर प्रदेश का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा किसी तरह के उपायों से अछूता है. आम आदमी के स्वच्छ हवा में जीने के अधिकार के सन्दर्भ में यह एक अन्यायपूर्ण स्थिति है. यह रिपोर्ट इस मांग को और मजबूत बनाती है कि नाकम नेटवर्क के विस्तार मामले में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बरते जाने वाले भेदभाव को तत्काल बंद किया जाए.”</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>पूरा प्रदेश काले धुएं की चपेट में</strong></span></p>
<p>प्रज्ञा इंटरनेशनल संस्था के निदेशक प्रमिल द्विवेदी ने कहा “एयर किल्स नामक इस रिपोर्ट में उन जगहों को अधिक प्रदूषित पाया गया जहां प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नाकम नेटवर्क के तहत निगरानी नहीं करता. बलिया, मऊ, आजमगढ़, गोरखपुर आदि का इस लिस्ट में ऊपर होना इस बात का संकेत है कि पूरा प्रदेश काले धुएं की चपेट में है. यह रिपोर्ट बताती है कि वाराणसी, लखनऊ, कानपुर और आगरा जैसे शहर जिनके बारे में चर्चा ज्यादा होती है, प्रदेश के दूसरे नगर भी इनसे ज्यादा या बराबर प्रदूषित हैं.”</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>नाकम नेटवर्क के विस्तार के साथ ही उपाय प्रादेशिक स्तर पर हों</strong></span></p>
<p>पर्पज क्लाइमेट लैब, नई दिल्ली से आये संदीप दहिया ने कहा “उत्तर प्रदेश में कचरा जलाना और डीजल का उपयोग आबोहवा में जहर घोल रहा है. बाधित बिजली आपूर्ति के कारण डीजल जेनसेट पर चलने वाले बाजार, अनियंत्रित निर्माण कार्य और टूटी सडकों से उड़ती धुल, कृषि कार्य में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशक और खाद, तापीय विद्युत् घर और लचर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था ने मिल कर इस प्रदेश को एक गैस चेंबर में तब्दील कर दिया है. ऐसे में यह जरूरी है कि नाकम नेटवर्क के विस्तार के साथ साथ सभी उपायों को प्रादेशिक स्तर पर लागू किया जाए.”</p>
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