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	<title>season &#8211; Sehat Times | सेहत टाइम्स</title>
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	<description>Health news and updates &#124; Sehat Times</description>
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		<title>बरसात का मौसम, मतलब तरह-तरह के संक्रामक रोगों का खतरा</title>
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		<pubDate>Mon, 16 Aug 2021 14:55:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="349" height="384" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2021/07/dr.Anurudh-Verma.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2021/07/dr.Anurudh-Verma.jpg 349w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2021/07/dr.Anurudh-Verma-273x300.jpg 273w" sizes="(max-width: 349px) 100vw, 349px" />-जानिये कैसे बचें इन बीमारियों से बता रहे हैं डॉ अनुरुद्ध वर्मा बरसात के मौसम में अस्पतालों एवं चिंकित्सकों के यहां मरीजों की भीड़ बढ़ जाती है हर घर में कोई न कोई सदस्य बीमारी से पीड़ित अवश्य मिल जाएगा। आखिर क्यों होते है बरसात में रोग। वैसे यदि हम बरसात को बीमारियों का मौसम &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="349" height="384" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2021/07/dr.Anurudh-Verma.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2021/07/dr.Anurudh-Verma.jpg 349w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2021/07/dr.Anurudh-Verma-273x300.jpg 273w" sizes="(max-width: 349px) 100vw, 349px" />
<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:28px"><strong>-जानिये कैसे बचें इन बीमारियों से बता रहे हैं डॉ अनुरुद्ध वर्मा</strong><strong></strong></p>



<div class="wp-block-image"><figure class="alignleft size-full is-resized"><img decoding="async" loading="lazy" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2021/07/dr.Anurudh-Verma.jpg" alt="" class="wp-image-30475" width="211" height="231" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2021/07/dr.Anurudh-Verma.jpg 349w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2021/07/dr.Anurudh-Verma-273x300.jpg 273w" sizes="(max-width: 211px) 100vw, 211px" /><figcaption> <em><span class="has-inline-color has-vivid-red-color"><strong>डॉ अनुरुद्ध वर्मा</strong> </span></em></figcaption></figure></div>



<p class="has-drop-cap">बरसात के मौसम में अस्पतालों एवं चिंकित्सकों के यहां मरीजों की भीड़ बढ़ जाती है हर घर में कोई न कोई सदस्य बीमारी से पीड़ित अवश्य मिल जाएगा। आखिर क्यों होते है बरसात में रोग। वैसे यदि हम बरसात को बीमारियों का मौसम कहें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। बरसात के इस मौसम में कालरा, पेचिस, उल्टी -दस्त, गैस्ट्रोइंट्राइटिस, फूड पॉयजनिंग, बदहजमी के साथ-साथ मलेरिया, वायरल फीवर, डेंगू, चिकुनगुनिया, कन्जेक्टवाइटिस, पीलिया, टाइफाइड बुखार, जापानी इन्सेफेलाइटिस, फोड़े-फुंसी एवं अन्य&nbsp; अनेक रोगों के आक्रमण की संभावना बढ़ जाती है। बरसात में मौसम में होने वाली बीमरियों से कुछ सावधानियां अपनाकर बचा जा सकता है क्योंकि सावधानी हटी बीमारियों की संभावना बढ़ी।</p>



<p>बरसात के मौसम में पानी के प्रदूषित होने की संभावना ज्यादा होती&nbsp; है। इस मौसम में बैक्टीरिया एवं वायरस भी तेजी के साथ पनपते हैं। भोजन बहुत जल्दी प्रदूषित हो जाता है। प्रदूषित पानी एवं खाने-पीने की चीजों से कालरा, गैस्ट्रोइंट्राइटिस, दस्त, पेचिस आदि गंभीर रोग हो सकते हैं, इससे बचाव के लिए साफ पानी पीयें, बासी भोजन, खुले एवं कटे फल, खुली चाट-पकौड़ी एवं भोजन आदि का प्रयोग न करें। बाजार के पैक्ड खाने पीने वाली वस्तुओं से बचें। दस्त आदि होने पर तत्काल ओ0आर0एस0 का घोल लेना प्रारंभ कर दें।</p>



<p>बरसात के मौसम में गंदगी एवं जल-भराव के कारण मच्छर तेजी के साथ पनपते हैं जिससे मलेरिया बुखार का खतरा बढ़ जाता है। मलेरिया बुखार से बचने के लिए आस-पास की साफ-सफाई पर ध्यान दें। आस-पास पानी व इकट्ठा न होने दें जिससे मच्छर न पनप सकें साथ ही मच्छरदानी लगाकर सोना चाहिए।</p>



<p>बरसात के मौसम में वायरल फीवर बहुत तेजी के साथ फैलता है। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है इसलिए इससे बचने के लिए रोगी व्यक्ति से सम्पर्क नहीं रखना चाहिए। बरसात के मौसम में डेंगू फैलने की सम्भावना ज्यादा रहती है। डेंगू बुखार वायरल बुखार है जो मानसून के दौरान मादा एडिज इजिप्टी नामक मच्छर द्वारा फैलता है। इसमें तेज बुखार सिर दर्द आंखों के पिछले हिस्से में दर्द, जी मिचलाना और उल्टी आना, जोड़ों और मांसपेसियों में ऐंठन और अकड़न, त्वचा पर चकत्&#x200d;ते उभरना शारीरिक कमजोरी एवं थकान आदि के लक्षण होते है। यह लक्षण पाये जाने पर तत्काल चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। इससे बचाव के लिए घर के गमलों को अच्छी तरह से साफ करें, घर में पानी न इकट्ठा होने दें, जिससे मच्छर न पनप सकें। शरीर पर पूरे कपड़े पहनें। इस मौसम में चिकुनगुनिया बुखार भी काफी फैलता है इसका वायरस भी एडिज मच्छर की एक प्रजाति द्वारा फैलता है। इसमें तेज बुखार जोड़ों में अकड़न तेज दर्द, यहां तक की चलना-फिरना भी मुश्किल हो जाता है। यह दर्द काफी दिन तक रहता है। इससे बचाव के लिए भी मच्छरों से बचाव जरूरी है। भीड़-भाड़ वाले इलाके से बचना चाहिए बरसात के मौसम में पानी में सालमोनेला टाइफी वैक्टीरिया का संक्रमण हो जाता है जिसके कारण टाइफाइड बुखार हो जाता है इससे बचाव के लिए पानी उबाल कर पीना चाहिए तथा साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बाहर के खाने से परहेज करना चाहिए । रोगी व्यक्ति को खुले में शौच नहीं करना चाहिए।</p>



<p>बरसात के मौसम में पीलिया का खतरा बढ़ जाता है। यह हेपेटाइटिस वायरस के संक्रमण के कारण होता है यह संक्रमण भी प्रदूषित भोजन एवं पानी, फल एवं पेय पदार्थी के कारण फैलता है। इससे बचने के लिए बाजार के खुले भोजन, कटे फल, प्रदूषित पेय पदार्थों से बचना चाहिए।</p>



<p>बरसात के मौसम में अपच, बदहजमी, गैस, खट्टी डकारें आदि की समस्या हो जाती है क्योंकि शारीरिक सक्रियता कम हो जाती है, साथ ही गरिष्ठ भोजन का प्रयोग बढ़ जाता है इससे बचने के लिए शारीरिक सक्रियता बनाये रखें, साथ ही हल्का व सुपाच्य भोजन करें।</p>



<p>बरसात के उमस एवं गंदगी भरे मौसम में बैक्टरिया, पैरासाइट, फंगस आदि त्वचा को संक्रमित कर देते हैं, जिसके कारण फोड़े-फुंसी, खुजली, दाद, फफोले, घमौरी, विषैले फोड़े आदि की संभावना ज्यादा रहती है। इससे बचने के लिए गंदे एवं प्रदूषित पानी से बचना चाहिए एवं साफ-सफाई पर पूरा ध्यान देना चाहिए। बरसात के मौसम में नेत्र प्रदाह (कन्जेक्टवाइटिस) ज्यादा तेजी के साथ फैलता है। इसमें आखों में जलन, दर्द, आखों का लाल होना, कीचड़ आना एवं आखों से पानी आने की समस्या हो जाती है। इससे बचने के लिए पीड़ित रोगी से व्यक्तिगत सम्पर्क एवं&nbsp; उसके कपड़ो जैसे रूमाल, तौलिया, के प्रयोग एवं हाथ मिलाने से बचना चाहिए। तेज धूप से बचना चाहिए, आखों को ठंडे पानी से बार-बार धोना चाहिए।</p>



<p>बरसात के मौसम में सर्दी-जुकाम, फ्लू आदि तेजी के साथ फैलता है। इससे बचने के लिए साफ-सफाई एवं व्यक्तिगत सम्पर्क से बचना चाहिए। बरसात के पानी से ज्यादा देर तक भीगने एवं भीगे कपड़े पहने रहने से बदन में दर्द आदि हो सकता है इसलिए भीगने के तुरन्त शरीर पोछ लेना चाहिए तथा तत्काल सूखे कपडे़ पहनने चाहिए।</p>



<p>बरसात के मौसम की ज्यादातर बीमारियां गन्दगी, संक्रमित भोजन एवं पानी के कारण फैलती है इसलिए यदि हम गन्दगी को दूर कर दें एवं प्रदूषित भोजन एवं पानी का प्रयोग न करें। बरसात के मौसम में पानी उबालकर पीयें। पत्तेदार सब्जियों को खाने से बचें। इस मौसम में सलाद खाने से भी बचें। बारिश के मौसम में तला भुना, पकौड़े, मसालेदार चाट आदि खाने से बचना चाहिए। बरसात के मौसम में सुपाच्य खाना खायें तथा कुछ अन्य सावधानियां अपना लें तो हमला करने से पहले बरसात की बीमारियों से बचा जा सकता है। यदि आपको बरसात कोई बीमारी हो जाये तो तुरन्त होम्योपैथिक चिकित्सक से सलाह लेना चाहिए क्योंकि बरसात की बीमारियों का होम्योपैथी द्वारा उपचार पूरी तरह संभव है।</p>



<p class="has-text-align-center has-vivid-red-color has-text-color has-medium-font-size"><strong><em>(लेखक डॉ अनुरुद्ध वर्मा वरिष्&#x200d;ठ होम्&#x200d;योपैथिक चिकित्&#x200d;सक हैं)</em></strong></p>
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