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	<title>Sabha &#8211; Sehat Times | सेहत टाइम्स</title>
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	<description>Health news and updates &#124; Sehat Times</description>
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		<title>राज्‍यसभा में होम्‍योपैथी व आयुर्वेद पर तथ्‍यात्‍मक भाषण से सुधांशु त्रिवेदी ने कर दी बोलती बंद</title>
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		<pubDate>Sun, 20 Sep 2020 10:59:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="259" height="170" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2020/09/Sudhanshu-Trivedi-1-1.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" />-भारतीय चिकित्‍सा केंद्रीय परिषद अधिनियम और होम्‍योपैथी केंद्रीय परिषद अधिनियम के पक्ष में रखे तर्क नयी दिल्‍ली/लखनऊ। राज्‍यसभा सांसद व भारतीय जनता पार्टी के राष्‍ट्रीय प्रवक्‍ता सुधांशु त्रिवेदी ने भारतीय चिकित्‍सा केंद्रीय परिषद अधिनियम, 1970 और होम्‍योपैथी केंद्रीय परिषद अधिनियम, 1973 पर चर्चा के समय बिल के समर्थन में जो भाषण दिया उसकी खास बात &#8230;]]></description>
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<p style="font-size:28px" class="has-text-color has-vivid-red-color"><strong>-भारतीय चिकित्&#x200d;सा केंद्रीय परिषद अधिनियम</strong><strong> </strong><strong>और होम्&#x200d;योपैथी केंद्रीय परिषद अधिनियम</strong><strong> </strong><strong>के पक्ष में रखे तर्क</strong><strong></strong></p>



<div class="wp-block-image"><figure class="aligncenter size-large"><img decoding="async" loading="lazy" width="518" height="340" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2020/09/Sudhanshu-Trivedi-3.png" alt="" class="wp-image-23110" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2020/09/Sudhanshu-Trivedi-3.png 518w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2020/09/Sudhanshu-Trivedi-3-300x197.png 300w" sizes="(max-width: 518px) 100vw, 518px" /></figure></div>



<p><strong>नयी दिल्&#x200d;ली/लखनऊ।</strong> राज्&#x200d;यसभा सांसद व भारतीय जनता पार्टी के राष्&#x200d;ट्रीय प्रवक्&#x200d;ता सुधांशु त्रिवेदी ने भारतीय चिकित्&#x200d;सा केंद्रीय परिषद अधिनियम, 1970 और होम्&#x200d;योपैथी केंद्रीय परिषद अधिनियम, 1973 पर चर्चा के समय बिल के समर्थन में जो भाषण दिया उसकी खास बात यह थी कि यह गैरराजनीतिक था और दूसरी बात इसमें दिये गये तर्क विज्ञान पर आधारित थे। भाषण में उन्&#x200d;होंने भारतीय चिकित्&#x200d;सा पद्धति व होम्&#x200d;योपैथिक पद्धति को वैकल्पिक चिकित्&#x200d;सा के रूप में प्रतिस्&#x200d;थापित करने पर जोर दिया। उनके इस भाषण की सर्वत्र सराहना हो रही है।</p>



<p>उन्&#x200d;होंने कहा कि&#x200d; आयुष के तहत आने वाली इन पद्धतियों के समन्&#x200d;वय के बारे में जब मैं कहता हूं तो लोग मुझसे कहते हैं कि आयुर्वेदिक और होम्&#x200d;योपैथिक को एक साथ रखने की वकालत मैं क्&#x200d;यों करता हूं, क्&#x200d;योंकि दोनों पैथी अलग-अलग हैं। इसके जवाब में उन्&#x200d;होंने कहा कि दोनों का सिद्धांत एक ही है कि विष को विष से ही खत्&#x200d;म किया जा सकता है। उन्&#x200d;होंने कहा कि आयुर्वेद में कहा गया है कि हम 100 वर्ष तक जीयें, 100 वर्ष तक देखें तथा 100 वर्ष तक रोग से मुक्त रहें, &nbsp;ऐसी व्यवस्था हमारी इन पद्धतियों को अपनाकर ही पायी जा सकती है।</p>



<p>सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि बहुत से लोग इन पद्धतियों का मजाक भी उड़ाते हैं, होम्&#x200d;योपैथिक दवा के बारे में कहा जाता है कि दो मीठी गोलियों, दो बूंद पानी से रोगों को कैसे ठीक कर सकता है, उन्&#x200d;होंने कहा कि इन नैनो टेक्&#x200d;नोलॉजी पर आधारित होम्&#x200d;योपैथिक दवाओं की दो बूंदों के पीछे की जो रिसर्च है, उसे लोग नहीं देख पाते थे। उन्&#x200d;होंने कहा कि विश्&#x200d;व में जो रिसर्च चल रही हैं उनमें इन रिसर्च के परिणाम जो आ रहे हैं, उसमें देखा गया है कि यदि पानी में हम कोई दवा या पदार्थ डालते हैं तो एक मात्रा के बाद डॉल्&#x200d;यूशन होने से उस सब्&#x200d;सटेंस की मेमोरी वहां मौजूद रहती है। नेशनल हेल्थ एंड मेडिकल रिसर्च काउंसिल ऑफ ऑस्ट्रेलिया की रिसर्च में आये परिणामों ने डाइल्&#x200d;यूशन के सिद्धांत पर मुहर लगायी गयी है। उन्&#x200d;होंने बताया कि इस बारे में होम्&#x200d;योपैथिक में यह कैसे डेवलप होते हैं इस बारे में लखनऊ में एक स्&#x200d;थापित होम्&#x200d;योपैथिक विशेषज्ञ ने उन्&#x200d;हें विस्&#x200d;तार से दिखाया था। इसके अलावा एक फ्रेंच वायरोलॉजिस्&#x200d;ट जिन्&#x200d;हें नोबल पुरस्&#x200d;कार भी मिल चुका है, ने भी इस बात की तस्दीक की है कि हाईली डॉल्&#x200d;यूटेड डॉल्&#x200d;यूशंस में ऐसे दिल्ली के अंदर ऐसे तत्&#x200d;व होते हैं जो औषधि की गुणवत्ता को बढ़ा देते हैं।</p>



<p>उन्&#x200d;होंने कहा कि ऐसा हमेशा से होता है कि जब कोई न आज जो रासायनिक सिद्धांतों के आधार पर दवा का प्रतिपादन है, वह जब नैनो टेक्&#x200d;नोलॉजी के आधार पर होगा तो मेरे विचार से इसमें एक नया स्&#x200d;वरूप आ सकता है। इसलिए इनको स्&#x200d;थापित करना जरूरी है। उन्&#x200d;होंने कहा कि यह इसलिए भी जरूरी है कि जब कुछ प्रकार की बीमारियों जिनका इलाज प्रतिपादित ऐलोपैथी में नहीं है, जैसे त्&#x200d;वचा रोग, ऑटोइम्&#x200d;यून डिजीजेस, लिवर-किडनी की बीमारियां, वायरल इनफेक्शन, एलर्जी जैसी बीमारियों से जब लोग प्रभावित हो रहे हैं और इन होम्&#x200d;योपैथिक दवाओं से लाभान्वित भी हो रहे हैं ऐसी स्थिति में आवश्यकता है कि उसे एक स्&#x200d;ट्रक्&#x200d;चर बेस्&#x200d;ड बनाया जाये ताकि लोगों को इसका लाभ मिल सके, और इस पर स्&#x200d;टडी करते हुए इसे और बेहतर बनाया जा सके और दुनिया के सामने बेहतर ढंग से हम अपनी बाता को रख सकें। एक स्पेशल बनाया जाए उसके ऊपर लोगों को लाभ मिल सके और आगे का प्रयोग करके दुनिया में बेहतर ढंग से अपनी बातों को रख सकें।</p>



<p>उन्&#x200d;होंने कहा कि चाहें एनिमल सोर्स हो,&nbsp; मिनरल सोर्स हो या फि&#x200d;र प्लांट सोर्स हो, उनसे मिलने वाली मेडिसिन हों, उनका एक व्&#x200d;यवस्थित साइंटिफि&#x200d;क स्&#x200d;वरूप सामने आना चाहिये, इसी लिए हमने आयुष मंत्रालय में इंटरडिसिप्लिनरी कोरिलेशन स्&#x200d;थापित करने की बात कही है। उन्&#x200d;होंने कहा&#x200d; कि जब हम इंटरडिसिप्लिनरी कोरिलेशन की बात कहते हैं तो लोगों का कहना होता है कि आप सिर्फ आयुर्वेदिक होम्योपैथिक को ही क्&#x200d;यों मिला रहे हैं, &nbsp;इनका आपस में क्या संबंध है, इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जाती है, इस पर मेरा जवाब होता है कि यह निर्णय सरकार ने बहुत ही सोचसमझ कर लिया है क्&#x200d;योंकि दोनों पैथी में कहा गया है कि समान पदार्थ ही समान पदार्थ का शमन करता है। विष का इलाज विष माना गया है।</p>



<p>इसके अलावा एक सामाजिक पक्ष भी है जब हम सबके लिए स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य की बात करते हैं तो जब तक आर्थिक दृष्टि से सहज और सुलभ पद्धतियां नहीं होगी तब तक सबके लिए स्&#x200d;वास्&#x200d;थ्&#x200d;य कैसे होगा। उन्&#x200d;होंने कहा कि होम्&#x200d;योपैथी के बारे में बात करें तो स्&#x200d;थापित मेडिसिन की अपेक्षा इसमें सिर्फ दस प्रतिशत मूल्&#x200d;य खर्च होता है, दूसरा इनको लेने का तरीका इतना आसान है कि एक छोटा बच्&#x200d;चा जो साल दो साल का हो या फि&#x200d;र बहुत बुजुर्ग हो, आसानी से ले सकता है, इसमें नुकसान की कोई बात नहीं है, इन दवाओं का एक आर्थिक पहलू यह भी है कि इनकी कोई एक्&#x200d;सपायरी डेट नहीं होती।</p>



<p>उन्&#x200d;होंने कहा कि कोविड के दौर में पहली बार ऐसा हुआ कि आधि&#x200d;कारिक रूप से सरकार ने आधिकारिक रूप से आयुर्वेदिक (च्&#x200d;यवनप्राश) और होम्योपैथिक दवा (आर्सेनिक एल्&#x200d;बम) को लेने की सलाह दी। उन्&#x200d;होंने कहा कि किसी भी बीमारी से बचने के दो तरीके हैं या तो वैक्&#x200d;सीन जो कि अभी है नहीं, और या फि&#x200d;र इम्&#x200d;युनिटी मजबूत कर ली जाये। चूंकि इम्&#x200d;युनिटी बढ़ाने के लिए सिर्फ आयुर्वेद और होम्&#x200d;योपैथी में ही दवायें हैं, ऐलोपैथी में उपलब्&#x200d;ध नहीं हैं, इसलिए सरकार ने इम्&#x200d;युनिटी बढ़ाने के लिए च्&#x200d;यवनप्राश और आर्सेनिक एल्&#x200d;बम को लेने की सलाह दी, साथ ही इस पर और रिसर्च करने की शुरुआत भी की। इसके बारे में मेरा मानना है कि आने वाले समय में देश के लिए बहुत महत्&#x200d;वपूर्ण होगी। यदि हमारे पास यह विचार पहले होता तो शायद आज हम और बेहतर स्थिति में &nbsp;होते। &nbsp;</p>



<p>उन्&#x200d;होंने कहा कि रवीन्&#x200d;द्रनाथ टैगोर ने शांति निकेतन में 1936 में कहा था कि होम्&#x200d;योपैथिक ने भारत में अच्&#x200d;छी जगह बना ली है। उन्&#x200d;होंने कहा कि रवीन्&#x200d;द्रनाथ टैगोर ने होम्&#x200d;योपैथी को भारत के माहौल में उपयोगी बताते हुए इसे बढ़ावा देने की बात कही थी। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि रवीन्&#x200d;द्रनाथ टैगोर की बात पर ध्&#x200d;यान देकर आजादी के बाद के वर्षों में अगर आयुर्वेद और होम्&#x200d;योपैथी के लिए कुछ रिसर्च सेंटर बनाये गये होते, और कुछ पेटेंट होते तो आज हम दुनिया में अलग ढंग से खड़े होते। &nbsp;उन्&#x200d;होंने कहा कि अगर हमें विश्&#x200d;व गुरु (वर्ल्&#x200d;ड लीडर) बनना है, तो हमें अल्&#x200d;टरनेटिव पैथीज की ओर बढ़ना होगा, स्&#x200d;थापित ऐलोपैथी को फॉलो करके हम फॉलोअर बन सकते हैं, लीडर नहीं। उन्&#x200d;होंने चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि जहां तक मुझे पता है कि चीन ने अपने पारम्&#x200d;परिक इलाज से मलेरिया की दवा बना ली जिसके लिए बाद में उसे नोबेल पुरस्कार मिला, हम लोग ऐसा क्यों नहीं कर पाए।</p>



<p>फि&#x200d;लहाल आयुष मंत्रालय से जुड़ा होम्&#x200d;योपैथी सेंट्रल काउंसिल संशोधन बिल 2020 राज्&#x200d;यसभा में दो दिन पूर्व पारित किया जा चुका है। आपको बता दें कि इससे पहले 14 सिंतबर को नेशनल कमीशन फॉर होम्योपैथी बिल 2020 और नेशनल कमीशन फॉर इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन बिल 2020 को लोकसभा में पास किया गया था। इन विधेयकों के पारित होने से भारतीय चिकित्&#x200d;सा पद्धति और होम्&#x200d;योपैथी की चिकित्&#x200d;सा शिक्षा में जबरदस्&#x200d;त सुधार की उम्&#x200d;मीद की जा रही है।</p>
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