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	<title>our children &#8211; Sehat Times | सेहत टाइम्स</title>
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	<description>Health news and updates &#124; Sehat Times</description>
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		<title>डायबिटीज तो अपने बच्‍चों को हम खुद ‘प्‍लेट में परोसकर’ दे रहे हैं : प्रो सूर्यकांत</title>
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		<pubDate>Tue, 13 Nov 2018 21:02:16 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="768" height="432" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/11/IMA.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/11/IMA.jpg 768w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/11/IMA-300x169.jpg 300w" sizes="(max-width: 768px) 100vw, 768px" />आईएमए में लगा वर्ल्‍ड डायबिटीज डे के उपलक्ष्‍य में फ्री जांच शिविर लखनऊ। जीवन शैली से लेकर खानपान तक अनेक कारणों से पिछले कुछ वर्षों से डायबिटीज ने अपने पांव तेजी से पसारे हैं। ऐसी स्थिति में यह जान लेना जरूरी है कि इस बीमारी से अपने परिवार को कैसे बचाया जा सकता है क्‍योंकि &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="768" height="432" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/11/IMA.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/11/IMA.jpg 768w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/11/IMA-300x169.jpg 300w" sizes="(max-width: 768px) 100vw, 768px" /><p><span style="color: #0000ff;"><strong>आईएमए में लगा वर्ल्&#x200d;ड डायबिटीज डे के उपलक्ष्&#x200d;य में फ्री जांच शिविर</strong></span></p>
<p><img decoding="async" loading="lazy" class="size-medium wp-image-7611 aligncenter" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/11/IMA-300x169.jpg" alt="" width="300" height="169" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/11/IMA-300x169.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/11/IMA.jpg 768w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> जीवन शैली से लेकर खानपान तक अनेक कारणों से पिछले कुछ वर्षों से डायबिटीज ने अपने पांव तेजी से पसारे हैं। ऐसी स्थिति में यह जान लेना जरूरी है कि इस बीमारी से अपने परिवार को कैसे बचाया जा सकता है क्&#x200d;योंकि आंकड़े बताते हैं कि जिन बच्&#x200d;चों के माता या पिता किसी एक को अगर डायबिटीज है तो बच्&#x200d;चे को डायबिटीज होने की आशंका 25 फीसदी है और अगर मां-बाप दोनों को डायबिटीज है तो बच्&#x200d;चों को होने की संभावना 50 फीसदी है। दरअसल डायबिटीज एक अनुवांशिक रोग है। इन सबसे ज्&#x200d;यादा महत्&#x200d;वपूर्ण बात यह है कि आखिर हम बच्&#x200d;चों को डायबिटीज से बचा किस तरह सकते हैं। क्&#x200d;योंकि अगर देखा जाये तो यह बात कड़वी जरूर है लेकिन सत्&#x200d;य है कि बच्&#x200d;चों को हम डायबिटीज रोग प्&#x200d;लेट में रख देने का इंतजाम कर रहे हैं, इसलिए यह जानना जरूरी है कि आखिर वे क्&#x200d;या कारण हैं जिनसे डायबिटीज होने का खतरा हम जाने-अनजाने पाल रहे हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>यह बात इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की लखनऊ शाखा के अध्&#x200d;यक्ष प्रो सूर्यकांत ने आईएमए भवन में एसोसिएशन द्वारा लगाये गये फ्री डायबिटीज जांच एवं सलाह कैम्&#x200d;प के बाद पत्रकार वार्ता में कही। प्रो सूर्यकांत ने बताया कि विश्&#x200d;व डायबिटीज दिवस की इस साल और अगले साल की थीम ‘परिवार और डायबिटीज’ है। यानी डायबिटीज रोगी के परिवार को डायबिटीज से किस तरह से बचाया जा सकता है। उन्&#x200d;होंने कहा कि सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि डायबिटीज के रोगियों की संख्&#x200d;या बढ़ने का कारण क्&#x200d;या है। उन्&#x200d;होंने बताया कि पिछले 30 साल से हमारा खानपान और जीवन शैली बदल गयी है, यानी बर्गर, पिज्&#x200d;जा जैसे फास्&#x200d;ट फूड खाने के शौकीन हो गये हैं। दूसरा कारण है मोबाइल, पिछले लगभग 20 साल से जब से मोबाइल आ गया है तब से बच्&#x200d;चों की सक्रियता कम हो गयी है अपने बच्&#x200d;चों को हम मोबाइल थमा रहे हैं जिससे उसकी भौतिक गतिविधि समाप्&#x200d;त सी हो गयी है जबकि पहले बच्&#x200d;चे कबड्डी, खो-खो, लुका-छिपी जैसे तमाम खेल होते थे जिनमें शरीर की कसरत अपने आप हो जाया करती थी। यहां तक कि गणित के पहाड़े भी बच्&#x200d;चों के ग्रुप में घूम-घूम कर बच्&#x200d;चे याद कर लिया करते थे।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>तीसरा बड़ा कारण है तनाव, हम अपने बच्&#x200d;चों को बच्&#x200d;पन से ही तनाव देना शुरू कर देते हैं। चौथा कारण है कि अब हम लोग खुलकर हंसना, स्&#x200d;वस्&#x200d;थ मनोरंजन नहीं कर पाते हैं, अपने आप को हमने ऐसा रोबोटिक बना दिया है कि अपने और अपने परिवार के लिए खुशी के वे पल जिनमें ठहाके लगाकर, प्रफुल्लित रहते थे, जबकि ऐसे पल अब कितनी बार आते हैं, और पांचवां कारण है उगने वाला अनाज जो 40 वर्षों पहले गोबर की खाद के इस्&#x200d;तेमाल से पैदा होता था, अब केमिकलयुक्&#x200d;त खादों से उग रहा है। उन्&#x200d;होंने कहा कि पिछले 40 वर्षों से अमेरिका जैसा देश ऑर्गेनिक खाद अपना रहा है और केमिकलयुक्&#x200d;त खाद पर टिक गये हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उन्&#x200d;होंने बताया कि अगर शुरुआत से बात करें तो बच्&#x200d;चा जैसे ही मां के गर्भ में आता है उसी समय से अगर उचित ध्&#x200d;यान न रखा जाये तो भी डायबिटीज जैसे रोग शिशु को होने की संभावना रहती है। जैसे गर्भ ठहरते ही परिजन गर्भवती को जरूरत से ज्&#x200d;यादा आराम देना शुरू कर देते हैं, दूसरे शब्&#x200d;दों में अगर कहा जाये तो गर्भवती को छुई-मुई बना देते हैं, इसी प्रकार गर्भावस्&#x200d;था का समय जैसे-जैसे बढ़ता जाता है वैसे-वैसे महिला को इतना ज्&#x200d;यादा आराम दे दिया जाता है कि उसकी बच्&#x200d;चेदानी के आस पास की मसल्&#x200d;स ढीली नहीं पड़ पाती हैं नतीजा सिजेरियन से बच्&#x200d;चा पैदा होता है। डॉ सूर्यकांत ने कहा कि पहले आजकल की तरह दो-ढाई साल में बच्&#x200d;चे का स्&#x200d;कूल में एडमिशन नहीं करवाया जाता था लेकिन आजकल दो-ढाई साल की उम्र में ही एडमिशन करवा दिया जाता है यानी बच्&#x200d;चे का तनाव शुरू, उसके बाद माता -पिता उसे अच्&#x200d;छे नम्&#x200d;बरों से पास होने का तनाव देना शुरू कर देते हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इस कैम्&#x200d;प का आयोजन आईएमए के साथ डायबिटीज सपोर्ट वेलफेयर सोसाइटी के संयुक्&#x200d;त तत्&#x200d;वावधान में किया गया। शिविर में आये हुए लोगों की शुगर की जांच रिपोर्ट देखकर डायबिटीज विशेषज्ञ व डायबिटीज सपोर्ट वेलफेयर सोसाइटी के सेक्रेटरी डॉ अरुण पाण्&#x200d;डेय ने उन्&#x200d;हें उचित सलाह एवं दवाएं दीं। कृष्&#x200d;णा होलिस्टिक लाइफ स्&#x200d;टाइल के अध्&#x200d;यक्ष एवं हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ राकेश सिंह ने जीवन शैली के महत्&#x200d;व को बताते हुए कहा कि कम से कम 30 मिनट तक रोज टहलना बहुत जरूरी है। इस मौके पर डॉ जगदीश, कृष्&#x200d;णा होलिस्टिक लाइफ स्&#x200d;टाइल के डॉ एसके श्रीवास्&#x200d;तव, संजय निगम, लायन संजय मेहरोत्रा, लायनेस रचना मेहरोत्रा, स्&#x200d;टेला सहित लायन्&#x200d;स और रोटरी क्&#x200d;लब के अनेक सदस्&#x200d;य भी उपस्थित रहे।</p>
<p>&nbsp;</p>
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