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	<title>new medical colleges in UP Archives - Sehat Times | सेहत टाइम्स</title>
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	<description>Health news and updates &#124; Sehat Times</description>
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		<title>नये डॉक्टरों के लिए अनिवार्य हो सकती है ग्रामीण इलाकों में दो साल सेवा</title>
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		<pubDate>Wed, 05 Apr 2017 17:43:19 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="1600" height="1066" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2017/04/kgmu-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2017/04/kgmu-1.jpg 1600w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2017/04/kgmu-1-300x200.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2017/04/kgmu-1-768x512.jpg 768w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2017/04/kgmu-1-1024x682.jpg 1024w" sizes="(max-width: 1600px) 100vw, 1600px" /><p>लखनऊ। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने आज चिकित्सकों को नैतिकता का पाठ पढ़ाते हुए कई नसीहतों के साथ गांवों में कम से कम दो वर्ष कार्य करना अनिवार्य करने की चेतावनी भी दे डाली, साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में जरूरत के हिसाब से पांच लाख डॉक्टरों की कमी है। यही नहीं उन्होंने प्रदेश &#8230;</p>
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<p>लखनऊ। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने आज चिकित्सकों को नैतिकता का पाठ पढ़ाते हुए कई नसीहतों के साथ गांवों में कम से कम दो वर्ष कार्य करना अनिवार्य करने की चेतावनी भी दे डाली, साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में जरूरत के हिसाब से पांच लाख डॉक्टरों की कमी है। यही नहीं उन्होंने प्रदेश भर के मेडिकल कॉलेजों को केजीएमयू से जोडऩे पर अपनी सहमति जताते हुए केजीएमयू को एम्स का दर्जा दिये जाने की बात कहते हुए इसे मिलाकर प्रदेश में छह एम्स जैसे संस्थान और 25 मेडिकल कॉलेज बनाने की घोषणा की।</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>केजीएमयू में 56 नये वेंटीलेटर्स का लोकापर्ण किया मुख्यमंत्री ने</strong></span></p>
<p>मुख्यमंत्री ने आज यहां किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्व विद्यालय में 56 नये वेंटीलेटर्स का लोकार्पण भी किया। अब यहां वेंटीलेटरों की कुल संख्या 144 हो गयी है। 56 नये वेेंटीलेटर्स में चार कार्डियोलॉजी में, क्रिटिकल केयर में 20, सीटीवीएस में 4, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में दो, बाल शल्य विभाग में दो, पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर विभाग में 16 तथा टीवीयू में 8 शामिल किये गये हैं।</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>केजीएमयू को मिलेगा एम्स का दर्जा, 25 नये मेडिकल कॉलेज भी</strong></span></p>
<p>केजीएमयू के सेल्बी हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने केजीएमयू को एम्स का दर्जा देने के लिए उन्होंने चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन से प्रस्ताव तैयार करने को कहा। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में 25 नये मेडिकल कॉलेज भी खोलने की घोषणा की। उन्होंने यह भी कहा कि नये मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी को लाना एक चुनौती जरूर है लेकिन हमारी सरकार इस ओर कार्य करेगी। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा मंत्री से कहा कि ऐसा प्रयास करें कि एक वर्ष में मेडिकल कॉलेजों में शतप्रतिशत फैकल्टी पूरी हो जाये।</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>संवेदनशीलता खो रहे हैं चिकित्सक</strong></span></p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि केजीएमयू का एक गरिमामयी इतिहास है, यहां से डॉक्टरी पढऩे वाले चिकित्सक भारत ही नहीं विदेशों में भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि 4000 बेड, 15 लाख मरीज ओपीडी में देखने वाले तथा भर्ती कर 90 हजार से 1 लाख मरीजों की सेवा करने वाले केजीएमयू के डॉक्टर चाहें तो गरीबों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि इधर यह देखा जा रहा है कि चिकित्सकों में संवेदनशीलता का अभाव हो रहा है। उन्होंने कहा कि चिकित्सक अगर प्यार से अपने मरीज से बात कर लें तो मरीज का आधा रोग ऐसे ही दूर हो जाता है।</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>सरकारी सेवा के साथ निजी प्रैक्टिस ठीक नहीं</strong></span></p>
<p>उन्होंने कहा कि यह भी देखा जा रहा है कि कुछ ऐसे चिकित्सक भी हैं जो सरकारी सेवा में रहकर भी तनख्वाह ले रहे हैं साथ ही निजी प्रैक्टिस से भी कमाई कर रहे हैं, जो ठीक नहीं है। मुख्यमंत्री यहीं नहीं रुके उन्होंने जांचों में होने वाले कमीशन के खेल का भी जिक्र करते हुए कहा कि चिकित्सक मोटे कमीशन के लिए चिन्हित केंद्रों पर जांच के लिए मरीज को भेजते हैं। उन्होंने बताया कि पूर्व में गोरखपुर में हमने एक अस्पताल खोला था तो उस दौरान ज्ञात हुआ कि जो सीटी स्कैन 450-600 रुपये में हो जाता है उसके लिए मरीज से 1800 से 4000 रुपये लिये जा रहे हैं, क्योंकि इसमें चिकित्सकों को कमीशन भी शामिल होता है। उन्होंने कहा कि गरीब व्यक्ति आपको पैसा भले ही न दे पाये लेकिन दुआ जरूर देता है और इस दुआ को असर बहुत होता है।</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>योगी ने नसीहतों के साथ ही चेतावनी भी दी डॉक्टरों को</strong> </span></p>
<p>आदित्यनाथ योगी ने अपनी पहली क्लास में चिकित्सकों को नैतिकता का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि दूरदराज गांवों में रह रहे लोगों तक चिकित्सा पहुंचे, इसके लिए आवश्यक है कि एमबीबीएस, पीजी की पढ़ाई करने के बाद दो-तीन साल तक चिकित्सक  अपनी सेवायें इन इलाकों में दें। इससे जहां केजीएमयू जैसे संस्थानों पर बोझ कम होगा वहीं लोगों को चिकित्सा की सुविधायें अपने घर के नजदीक मिल सकेंगी। उन्होंने कहा कि अगर डॉक्टर सरकार से सहयोग चाहते हैं तो उन्हें शुरुआत में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में जाकर सेवा करनी होगी। मुख्यमंत्री ने यह भी जोड़ा कि अच्छा तो यही होगा कि चिकित्सक इस पर खुद विचार करें क्योंकि जहां तक कानून बनाकर कार्य करने की बात है तो कोशिश यह करें कि हमें कानून न बनाना पड़े।</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>अगले साल से एक फरवरी को आयेगा उत्तर प्रदेश का बजट</strong></span></p>
<p>उन्होंने कहा कि समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में मैंने देखा कि 31 मार्च को अनेक पत्रावली बजट के लिए आखिरी दिन तक लम्बित थीं। इस पर उन्होंने आपत्ति जताते हुए कहा कि बजट का पैसा उस मद में खर्च न हो पाये यह प्रदेश की जनता के साथ धोखा है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ऐसी व्यवस्था कर रही है कि अगले वर्ष से प्रदेश का बजट 1 फरवरी को पेश हो। उन्होंने शोध कार्य पर जोर देते हुए कहा कि केजीएमयू की फैकल्टी को चाहिये कि मरीज के इलाज के प्रपत्रों का लेखाजोखा अपने पास रखें इससे उन्हें शोध कार्य में मदद मिलेगी।</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>उपकरणों का वार्षिक रखरखाव न होना ठीक नहीं</strong></span></p>
<p>मुख्यमंत्री ने अस्पतालों के लिए की जाने वाली उपकरणों की खरीद व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाते हुए कहा कि देखा गया है कि महंगे से महंगे उपकरणों की खरीद तो कर ली जाती है लेकिन उन मशीनों के वार्षिक रखरखाव के लिए करार नहीं किया जाता है नतीजा यह होता है कि साल भर कहा जाता है कि मशीन तो खराब है अब जांच कैसे की जाये। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था करें कि पांच साल तक उपकरण का प्रयोग जरूर किया जाये।</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>18 घंटे काम करते हैं मुख्यमंत्री : आशुतोष टंडन</strong></span></p>
<p>इससे पूर्व चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने कहा कि आज केजीएमयू में एक नया अध्याय जुड़ गया है। उन्होंने कहा कि वेंटीलेटर की आवश्यकता का महत्व काफी है क्योंकि इसका कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने चिकित्सकों से कहा कि पेशेंट केयर पर ध्यान देना होगा, इसमें सुधार की गुंजाइश है।  उन्होंने मुख्यमंत्री की कार्यशैली और लगन की सराहना करते हुए कहा कि वे 18-18 घंटे कार्य करते हैं, और हम लोगों को भी जुटाये रखते हैं, जो यह सिद्ध करता है कि न सोऊंगा और न सोने दूंगा। यह सुनकर मुख्यमंत्री भी मुस्कुराये बिना नहीं रह सके।</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>अपनी उपलब्धियां गिनायीं कुलपति ने</strong></span></p>
<p>इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए कुलपति प्रो रविकांत ने अपने कार्यकाल में किये गये कार्यों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने केजीएमयू को एम्स के बराबर का दर्जा देने की मांग की थी। उन्होंने हरियाणा, पश्चिम बंगाल, हिमाचल आदि कई राज्यों में एक यूनिवर्सिटी से सम्बद्ध करने का जिक्र करते हुए मांग की कि उत्तर प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों को भी केजीएमयू से सम्बद्ध कर दिया जाना चाहिये। उन्होंने बताया कि जिस तरह मां अपने बच्चे को पढ़ाती है उसी प्रकार हम यहां टीचिंग दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि पहले 40 विभाग थे जो अब बढक़र 80 हो गये हैं। ट्रॉमा-1 में दो तलों का निर्माण हो चुका है तथा ट्रॉमा-2 हम संचालित कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सोशल आउट रीच प्रोग्राम के तहत हमने शिविर लगाकर लगभग 1100 मरीजों को चिकित्सा उपलब्ध करायी है। कार्यक्रम में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह, चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री संदीप सिंह, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री महेन्द्र सिंह, अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा अनीता भटनागर जैन भी उपस्थित रहीं।</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>पुरोहित की भूमिका निभायी डॉ. संदीप ने</strong> </span></p>
<p>कार्यक्रम का संचालन कर रहे सर्जन डॉ संदीप तिवारी ने आज पुरोहित की भूमिका भी अच्छे ढंग से निभायी। दरअसल हुआ यूं कि सेल्बी हॉल में जैसे ही मुख्यमंत्री ने प्रवेश किया तो उनका स्वागत शंखनाद करके किया गया, शंख बजाने की जिम्मेदारी निभायी डॉ संदीप तिवारी ने। इसी प्रकार जब दीप प्रज्ज्वलन जब हो रहा था उस समय संस्कृत में मंत्र और मां सरस्वती की प्रार्थना भी डां संदीप ने प्रस्तुत की।</p>
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