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	<title>Ixy Tisa &#8211; Sehat Times | सेहत टाइम्स</title>
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	<description>Health news and updates &#124; Sehat Times</description>
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		<title>पिता न बन पा रहे पुरुषों के लिए वरदान है इक्‍सी टीसा विधि</title>
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		<pubDate>Fri, 19 Apr 2019 15:44:04 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="668" height="423" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/04/Dr.Sunita-Chandra-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/04/Dr.Sunita-Chandra-1.jpg 668w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/04/Dr.Sunita-Chandra-1-300x190.jpg 300w" sizes="(max-width: 668px) 100vw, 668px" />बांझ रोग कारण और निवारण विषय पर आयोजित हो रही एक दिवसीय कार्यशाला   लखनऊ। संतानहीनता के लिए जिम्‍मेदार महिला और पुरुष दोनों बराबर-बराबर होते हैं। बांझपन के लिए 40 फीसदी महिलायें और 40 फीसदी ही पुरुष तथा 20 प्रतिशत दोनों जिम्‍मेदार होते हैं। इसलिए जब भी संतानहीनता की जांच कराने जायें तो पति-प‍त्‍नी दोनों &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="668" height="423" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/04/Dr.Sunita-Chandra-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/04/Dr.Sunita-Chandra-1.jpg 668w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/04/Dr.Sunita-Chandra-1-300x190.jpg 300w" sizes="(max-width: 668px) 100vw, 668px" /><p><span style="color: #0000ff;"><strong>बांझ रोग कारण और निवारण विषय पर आयोजित हो रही एक दिवसीय कार्यशाला</strong></span></p>
<p><strong><img decoding="async" loading="lazy" class="wp-image-10890 aligncenter" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/04/Dr.Sunita-Chandra-300x225.jpg" alt="" width="331" height="248" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/04/Dr.Sunita-Chandra-300x225.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/04/Dr.Sunita-Chandra-768x576.jpg 768w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/04/Dr.Sunita-Chandra.jpg 835w" sizes="(max-width: 331px) 100vw, 331px" /> </strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> संतानहीनता के लिए जिम्&#x200d;मेदार महिला और पुरुष दोनों बराबर-बराबर होते हैं। बांझपन के लिए 40 फीसदी महिलायें और 40 फीसदी ही पुरुष तथा 20 प्रतिशत दोनों जिम्&#x200d;मेदार होते हैं। इसलिए जब भी संतानहीनता की जांच कराने जायें तो पति-प&#x200d;त्&#x200d;नी दोनों जायें। संतानहीनता के कारणों की अगर बात करें तो महिलाओं में हारमोनल खराबी, फेलोपियन ट्यूब में खराबी, यौन रोग, अंडों का न बनना है जबकि पुरुषों में पाये जाने वाले कारणों में सेमेन में स्&#x200d;पर्म न होना या फि&#x200d;र कम होना होता है, लेकिन ऐसे पुरुषों को भी अब निराश होने की जरूरत नहीं है, वे भी इक्सी टीसा  विधि से अपनी संतान होने का सुख प्राप्&#x200d;त कर सकते हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>यह जानकारी बांझ रोग विशेषज्ञ डॉ सुनीता चन्&#x200d;द्रा ने होटल फॉर्च्&#x200d;यून में आयोजित पत्रकार वार्ता में दी। पत्रकार वार्ता का आयोजन लखनऊ ऑब्स एंड गायनेकोलॉजिस्ट सोसाइटी और मॉर्फिअस लखनऊ  फर्टिलिटी सेंटर के तत्वावधान में  बांझ रोग कारण और निवारण विषय पर 20 अप्रैल को आयोजित होने वाली एक दिवसीय कार्यशाला की जानकारी देने के लिए किया गया था। पत्रकार वार्ता में मॉर्फिअस फर्टिलिटी सेंटर मुम्&#x200d;बई से आये रवीन्&#x200d;द्र भी उपस्थित थे। डॉ सुनीता चन्&#x200d;द्रा ने इक्सी टीसा  विधि के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि दरअसल कुदरती रूप से पुरुषों में शुक्राणु बनते रहते हैं लेकिन किसी कारण वे स्&#x200d;वाभाविक प्रक्रिया के दौरान शरीर से निकल नहीं पाते हैं या कम मात्रा में निकलते हैं। ऐसी स्थिति में इक्&#x200d;सी टीसा विधि के तहत पति के अंडकोष से सीधे ही शुक्राणुओं को निकालकर लैब में पत्&#x200d;नी के अंडों से निषेचित कराकर भ्रूण तैयार होने के बाद भ्रूण को गर्भाशय में प्रवेश करा&#x200d; दिया जाता है। यानी निल या अति अल्प शुक्राणु रिपोर्ट वाले पुरुष जिन्हें पहले किसी अन्य पुरूष के शुक्राणुओं को लेने की विवशता होती थी, अब टीसा-इक्सी विधि से वो पुरुष भी अपने स्वयं के शुक्राणु से पिता बन सकते है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>बच्&#x200d;चा न चाहने के चलते गर्भपात कराना पड़ सकता है महंगा</strong></span></p>
<p><strong> </strong></p>
<p>डा सुनीता ने बताया कि आज की लाइफ स्&#x200d;टाइल के चलते संतानहीनता हमारे समाज की बहुत बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। इसका कारण है कि आज के समय मे शादी की उम्र बढ़ती जा रही है। उसमें भी बहुत से पति-पत्&#x200d;नी तुरंत बच्&#x200d;चा नहीं चाहते हैं यानी 4-5 साल इसी तरह निकल जाते हैं, फि&#x200d;र उसके बाद जब दोनों माता-पिता बनने की प्&#x200d;लानिंग करते हैं तो महिला की उम्र और ज्&#x200d;यादा हो चुकी होती है। उन्&#x200d;होंने बताया कि 30 वर्ष की आयु के बाद जितना भी समय बढ़ता जाता है उतनी ही महिला के अंडों की गुणवत्&#x200d;ता, संख्&#x200d;या कम होती जाती है। उन्&#x200d;होंने बताया कि अक्&#x200d;सर पति-पत्&#x200d;नी एक गलती करते हैं कि विवाह के बाद जब पत्&#x200d;नी गर्भवती हो जाती है तो बच्&#x200d;चा इतनी जल्&#x200d;दी न चाहने के चलते गर्भपात करा देते हैं, उन्&#x200d;होंने बताया कि यह बहुत गलत बात है, बच्&#x200d;चा न चाहने के लिए गर्भनिरोध के जब इतने साधन मौजूद हैं तो पति-पत्&#x200d;नी को उनका प्रयोग करना चाहिये। उन्&#x200d;होंने बताया कि इसका नतीजा यह होता है गर्भपात कराने से संक्रमण के चलते फि&#x200d;र से पत्&#x200d;नी को गर्भधारण करने में कठिनाई हो जाती है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>संतानहीनता होने पर जांच के लिए पति-पत्&#x200d;नी दोनों जायें</strong></span></p>
<p>उन्&#x200d;होंने बताया कि शादी के बाद जब पति-पत्&#x200d;नी संतान के लिए प्रयत्&#x200d;न करें लेकिन प्रयत्&#x200d;न के एक साल बाद भी अगर महिला गर्भवती न हो तो दोनों को डॉक्&#x200d;टर के पास सलाह लेने और जांच कराने जरूर जाना चाहिये। जबकि परेशानी की बात यह है कि आज भी बहुत सारे दम्पति डॉक्टर के पास तब आते है जब उपचार की सफलता का कीमती समय निकल चुका होता है। 30 साल से अधिक उम्र की महिलाओं के अंडे बनने कम हो जाते है, इसके साथ ही अंडो की क्वालिटी भी अच्छी नही रहती है। इससे गर्भपात और होने वाले बच्चे में जन्मजात खराबी आने का खतरा रहता है। इसके समाधान के लिए विज्ञान ने कई अच्छे तरीके निकाल लिए है। जांच के बाद यह तय किया जाता है कि गर्भधारण करने के लिए किस तरह के इलाज की जरूरत होगी। सही उम्र में डॉक्टर के पास आने पर उचित उपचार से संतान प्राप्ति हो सकती है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>उसाइटडोनेशन विधि का उपयोग ओलिगो स्&#x200d;पेर्मिया में भी</strong></span></p>
<p>संतानहीनता की सबसे बड़ी वजह महिलाओं में हारमोनल खराबी, फेलोपियन ट्यूब में खराबी,यौन रोग,अंडों का न बनना और पुरुषों में शुक्राणुओं का न बनना या कम होना है। आई.वी.एफ. व इक्सी इसका एक आधुनिक इलाज है। इस इलाज में महिला की ओवरी से अंडे निकाल कर उसे प्रयोगशाला में स्पर्म से निषेचित कराया जाता है। भ्रूण बनने के बाद महिला के गर्भाशय में ट्रांसफर कर दिया जाता है, इसमे पति व पत्नी के अपने अंडे और शुक्राणु का उपयोग किया जाता है। जिन महिलाओं में अंडे नही बन पाते हैं उसमे उसाइटडोनेशन विधि का उपयोग किया जाता है। पहले इस विधि का प्रयोग उस समय किया जाता था जब महिला की फैलोपियन ट्यूब खराब हो। अब संतानहीनता के अन्य कारणों में जैसे ओलिगो स्पेर्मिया में भी इस उन्नत तकनीक का सफलतापूर्वक प्रयोग किया जाता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>अंडे-शुक्राणु प्रिजर्व करायें फि&#x200d;र कैंसर का इलाज करायें</strong></span></p>
<p>एक अन्&#x200d;य महत्&#x200d;वपूर्ण जानकारी देते हुए उन्&#x200d;होंने बताया कि यदि महिला या पुरुष कैंसर से ग्रस्&#x200d;त होकर उसका इलाज कराने जा रहा है और बाद में वह संतान चाहता है तो पुरुष अपने स्&#x200d;पर्म और महिला अपने अंडों के साथ ही निषेचित भ्रूण क्रायो प्रिजर्वेशन विधि से लंबे समय तक पुनः उपयोग के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है। उन्&#x200d;होंने बताया कि यह सुविधा लखनऊ फर्टिलिटी सेंटर में भी उपलब्ध है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>एक दिवसीय कार्यशाला के बारे में उन्&#x200d;होंने बताया कि इस कार्यशाला में देश के जाने माने विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं, इनमें डॉक्टर मोहन राउत मुम्बई, डॉ जयश्री सिरधर इंदौर,  डॉ विवेक वी हैदराबाद, डॉ सौरभ अग्रवाल (सीनिअर यूरोलोजिस्ट) लखनऊ  व लखनऊ के मेडिकल कॉलेज की प्रोफेसर डॉ अंजू अग्रवाल, प्रोफेसर डॉ अमित पांडेय, सहायक प्रोफेसर डॉ वंदना सोलंकी आदि  डॉक्टर अपने विचार और अनुभव साझा करेंगे।</p>
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