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	<title>fault &#8211; Sehat Times | सेहत टाइम्स</title>
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	<description>Health news and updates &#124; Sehat Times</description>
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		<title>बच्‍चे का यौन शोषण हुआ तो इसमें बच्‍चे की क्‍या गलती, क्‍यों छिपाते हैं दूसरों के कुकर्म</title>
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		<pubDate>Sun, 01 Sep 2019 11:47:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="877" height="658" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/09/Dr.Piyali-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/09/Dr.Piyali-1.jpg 877w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/09/Dr.Piyali-1-300x225.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/09/Dr.Piyali-1-768x576.jpg 768w" sizes="(max-width: 877px) 100vw, 877px" />-क्‍या बच्‍चे के जीवन से बढ़कर है इज्‍जत, समाज को नजरिया बदलना होगा -बाल यौन शोषण करने वाले 90 प्रतिशत दरिंदे परिवार या निकट सम्‍बन्‍धी होते हैं -यौन पीडि़त बच्‍चों का इलाज करने वाले चिकित्‍सकों को भी इसकी रिपोर्टिंग करना आवश्‍यक -बच्‍चों के साथ होने वाले यौन शोषण और चिकित्‍सकों की जिम्‍मेदारी पर कार्यशाला आयोजित &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="877" height="658" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/09/Dr.Piyali-1.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/09/Dr.Piyali-1.jpg 877w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/09/Dr.Piyali-1-300x225.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/09/Dr.Piyali-1-768x576.jpg 768w" sizes="(max-width: 877px) 100vw, 877px" /><h5><span style="color: #0000ff;"><strong>-क्&#x200d;या बच्&#x200d;चे के जीवन से बढ़कर है इज्&#x200d;जत</strong><strong>, </strong><strong>समाज को नजरिया बदलना होगा </strong></span></h5>
<h5><span style="color: #0000ff;"><strong>-बाल यौन शोषण करने वाले 90 प्रतिशत दरिंदे परिवार या निकट सम्&#x200d;बन्&#x200d;धी होते हैं </strong></span></h5>
<h5><span style="color: #0000ff;"><strong>-यौन पीडि़त बच्&#x200d;चों का इलाज करने वाले चिकित्&#x200d;सकों को भी इसकी रिपोर्टिंग करना आवश्&#x200d;यक</strong></span></h5>
<h5><span style="color: #0000ff;"><strong>-बच्&#x200d;चों के साथ होने वाले यौन शोषण और चिकित्&#x200d;सकों की जिम्&#x200d;मेदारी पर कार्यशाला आयोजित</strong></span></h5>
<p><img decoding="async" loading="lazy" class="aligncenter size-full wp-image-13676" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/09/Dr.Piyali-1.jpg" alt="" width="877" height="658" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/09/Dr.Piyali-1.jpg 877w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/09/Dr.Piyali-1-300x225.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/09/Dr.Piyali-1-768x576.jpg 768w" sizes="(max-width: 877px) 100vw, 877px" /></p>
<p><strong>धर्मेन्&#x200d;द्र सक्&#x200d;सेना</strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> तुम वहां करने क्&#x200d;या गयी थीं&#8230; अच्&#x200d;छा अब चुपचाप रहना इसका जिक्र किसी से करने की जरूरत नहीं है&#8230;ये वे चन्&#x200d;द जुमले हैं जो मां-बाप अपने बच्&#x200d;चे से उस समय कहते हैं जब उन बच्&#x200d;चों के साथ यौन शोषण हो जाता है। बच्&#x200d;चों को चुप नहीं मुखर करने की जरूरत है। झूठी शान और मान सम्&#x200d;मान के नाम पर बच्&#x200d;चे को चुप करके माता-पिता खुद भले ही अपनी इज्&#x200d;जत को सुरक्षित महसूस कर लें लेकिन इसका बच्&#x200d;चे के मन मस्तिष्&#x200d;क पर इतना गलत प्रभाव पड़ता है जो कि उसका पूरा जीवन खराब कर देता है, यौन शोषण के कारण शारीरिक चोटों के घाव तो भर जाते हैं लेकिन उसके मस्तिष्&#x200d;क में बैठी बात जीवन भर उसका पीछा नहीं छोड़ती है, जो आगे चलकर उसकी अपनी सामान्&#x200d;य और वैवाहिक जिन्&#x200d;दगी तक पर असर डालती है। वह अंदर ही अंदर घुटता रहता है।</p>
<p>यह बात संजय गांधी पीजीआई की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ पियाली भट्टाचार्य ने यहां इंदिरा नगर स्थित होटल बेबियन में लखनऊ अरबन एडीपी, वर्ल्&#x200d;ड विजन इंडिया के तत्&#x200d;वावधान में आयोजित एक कार्यशाला में शनिवार को अपने सम्&#x200d;बोधन में कही। अंडरस्&#x200d;टैंडिंग दि इशू ऑफ चाइल्&#x200d;ड सेक्&#x200d;सुअल एब्&#x200d;यूज एंड रिस्&#x200d;पॉन्&#x200d;सबिलिटीज ऑफॅ मेडिकल प्रैक्टिशनर्स विषय पर आयोजित कार्यशाला में बाल यौन शोषण के कानूनी पहलुओं से लेकर भावनात्&#x200d;मक पहलुओं पर दिन भर चली कार्यशाला में चिकित्&#x200d;सा और कानून क्षेत्र के विशेषज्ञों ने विस्&#x200d;तार से चर्चा की।</p>
<p>डॉ पियाली ने अपने सम्&#x200d;बोधन में कहा कि चूंकि बच्&#x200d;चे के साथ यौन शोषण हुआ तो इसमें गलती बच्&#x200d;चे की नहीं है, जरूरत इस बात की है कि यौन शोषण के समय ही माता-पिता का रवैया उनके प्रति सकारात्&#x200d;मक हो, हिम्&#x200d;मत दिलाने वाला हो, दोषी को सामने लाने वाला हो तो इससे न उस बच्&#x200d;चे को सामान्&#x200d;य जीवन जीने में मदद मिलेगी बल्कि दोषी व्&#x200d;यक्ति को सजा दिलाकर दूसरे बच्&#x200d;चों की जिन्&#x200d;दगी को भी बचाने में मदद मिलेगी, क्&#x200d;योंकि अक्&#x200d;सर देखा गया है कि यौन शोषण करने वालों के बारे में रिपोर्टिंग न होने से वह समाज में खुला और स्&#x200d;वछन्&#x200d;द तरीके से घूमता-फि&#x200d;रता है तथा अपनी इस गंदी मानसिकता से दूसरे बच्&#x200d;चों को भी शिकार बनाता रहता है।</p>
<p>डॉ पियाली ने बताया कि भारत सरकार का सर्वे बताता है कि 53 प्रतिशत बच्&#x200d;चे भारत में यौन शोषण के शिकार हैं। यही नहीं बच्&#x200d;चों के साथ होने वाले यौन शोषण के 90 प्रतिशत मामलों में यौन शोषण करने वाला बच्&#x200d;चे के परिवार या निकट का ही होता है। डॉ पियाली ने बताया कि होता यह है कि ऐसे मामले छिपा लिये जाते हैं, इसकी रिपोर्टिंग भी तब होती है जब घरवालों की मजबूरी हो जाती है जैसे बच्&#x200d;ची को ब्&#x200d;लीडिंग होने लगती है, बच्&#x200d;ची गर्भवती हो जाती है और तब बच्&#x200d;चे के अभिभावक चिकित्&#x200d;सक से सम्&#x200d;पर्क करते हैं। उन्&#x200d;होंने बताया कि हालांकि अब धीरे-धीरे ऐसे मामले सामने लाये जाने लगे हैं। एक केस का जिक्र करते हुए उन्&#x200d;होंने बताया कि एक ऐसा केस आया कि जिसमें पिता ही अपनी पु’त्री के साथ यौन शोषण करता रहा और बच्&#x200d;ची को उसकी मां ने चुप कर दिया, इसके बाद जब पिता ने पीडि़त पुत्री की छोटी बहन के साथ भी यह हरकत करनी शुरू की तो बड़ी बहन सामने आयी और कहा कि मेरे साथ जो आपने किया वह मैं अपनी बहन के साथ नहीं करने दूंगी।</p>
<p><img decoding="async" loading="lazy" class="aligncenter size-full wp-image-13677" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/09/Dr.Piyali-2.jpg" alt="" width="877" height="658" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/09/Dr.Piyali-2.jpg 877w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/09/Dr.Piyali-2-300x225.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/09/Dr.Piyali-2-768x576.jpg 768w" sizes="(max-width: 877px) 100vw, 877px" /></p>
<p>डॉ पियाली ने कहा इस तरह की स्थितियों से बचाने के लिए जहां बच्&#x200d;चों को चुप करने की नहीं बल्कि मुखर करने जरूरत है, वहीं बच्&#x200d;चों को यह जानकारी देना भी आवश्&#x200d;यक है कि वे ऐसी स्थिति में अपना बचाव कैसे करें, कैसे पहचानें कि उनको अंग विशेष को जब कोई टच करने की कोशिश करें तो किस तरह से शोर मचायें, और आसपास मौजूद लोगों को बतायें, कि यह आदमी उसके साथ छेड़छाड़ कर रहा है।</p>
<h6><span style="color: #0000ff;"><strong>माता-पिता बच्&#x200d;चे पर रखें गहरी नजर</strong></span></h6>
<p>डॉ पियाली ने कहा कि माता-पिता को चाहिये कि वह बच्&#x200d;ची के व्&#x200d;यवहार पर नजर रखें, अचानक बच्&#x200d;चे के व्&#x200d;यवहार में कोई बदलाव दिखे, गुमसुम रहे, किसी खास व्&#x200d;यक्ति को देखते ही सहम जाये, मां के पीछे छिपने लगे, बार-बार यूरीनरी इन्&#x200d;फेक्&#x200d;शन हो रहा हो, चोटें लग रही हों, शरीर पर चोटों के निशान दिखें तो ऐसे में माता-पिता को सतर्क हो जाना चाहिये और बच्&#x200d;चे से यह जानने की कोशिश करें कि आखिर ऐसा क्&#x200d;यों हो रहा है। बच्&#x200d;चे के साथ उनका व्&#x200d;यवहार गुस्&#x200d;से वाला न होकर उसकी सहायता और प्&#x200d;यार देने वाला होना चाहिये ताकि सहजता के साथ बच्&#x200d;चा पूरी बात माता-पिता को बता सके।</p>
<p>उन्&#x200d;होंने कहा कि ऐसे केस में जो माता-पिता डरते हैं कि उनकी बच्&#x200d;ची की बदनामी हो जायेगी, तो उनकी और पूरे परिवार की काउंसलिंग करके यह बात समझानी होती है कि इसके बारे में शिकायत करके दोषी व्&#x200d;यक्ति को सजा दिलायी जाये ताकि उनके बच्&#x200d;चे और दूसरों के बच्&#x200d;चों के साथ वह व्&#x200d;यक्ति ऐसा काम न कर सके। उन्&#x200d;होंने कहा कि इसके लिए समाज में भी मानसिकता बदलने की जरूरत है कि जो हुआ उसमें उस बच्&#x200d;ची का कोई कसूर नहीं है। इस मानसिकता के साथ जब लोग रहेंगे तो पीडि़त बच्चियों के प्रति समाज का नजरिया बदलेगा, और फि&#x200d;र जो मां-बाप बदनामी के डर से इन बातों को छिपाते हैं, वे भी ऐसी घटनाओं को सामने लाने में सहज महसूस करेंगे।</p>
<h6><span style="color: #0000ff;"><strong>एफआईआर लिखवाते समय ध्&#x200d;यान से करें शब्&#x200d;दों का चयन</strong></span></h6>
<p>कार्यशाला में आली से जुड़ी वूमेन राइट एक्टिविस्&#x200d;ट वकील रेनू मिश्रा ने अनेक कानूनी पहलुओं की जानकारियां दीं। उन्&#x200d;होंने कहा कि पॉक्&#x200d;सो एक्&#x200d;ट के तहत बाल यौन शोषण में सजा का कानून तो है लेकिन छोटी-छोटी चूक होने के कारण इसका लाभ पीडि़त को नहीं मिल पाता है और गुनहगार गुनाह करने के बाद भी आराम से बच जाता है। उन्&#x200d;होंने बताया कि अगर किसी बच्&#x200d;ची का यौन शोषण होता है तो पहली बात उसकी रिपोर्टिंग तो होनी ही चाहिये, साथ ही एफआईआर पीडि़त बच्&#x200d;ची की भाषा में ही लिखनी चाहिये क्&#x200d;योंकि कई बार एफआईआर में लिखी गयी शब्&#x200d;दावली के चलते आरोपी अदालत से छूट जाता है। क्&#x200d;योंकि अदालत में बच्&#x200d;चे के द्वारा प्रयोग की गयी शब्&#x200d;दावली से ही पुष्टि मानी जाती है, उन्&#x200d;होंने बताया कि अक्&#x200d;सर बोलचाल में हम लोग शब्&#x200d;द इस्&#x200d;तेमाल करते हैं कि फलां व्&#x200d;यक्ति ने फलां बच्&#x200d;चे के साथ गलत काम किया, गंदा काम किया, ऐसे में इन शब्&#x200d;दों का प्रयोग एफआईआर में भी किया जाता है। इसका नतीजा यह होता है कि गलत काम और गंदा काम की परिभाषा कोर्ट में आरोपी को बचाने वाला वकील अपने हिसाब से देता है और इस शब्&#x200d;द से यह सिद्ध नहीं हो पाता है कि आरोपी ने बच्&#x200d;ची के साथ शारीरिक संबंध बनाये, नतीजा कोर्ट से जो सजा मिलनी चाहिये थी, वह नहीं मिल पाती है।</p>
<h6><span style="color: #0000ff;"><strong>एफआईआर देर से लिखने के कारण का जरूर जिक्र करें</strong></span></h6>
<p>रेनू मिश्रा ने बताया कि इसी प्रकार एफआईआर में घटना होने और घटना की एफआईआर लिखाने के बीच का जो समय था, उसमें एफआईआर क्&#x200d;यों नहीं लिखायी गयी इसकी वजह एफआईआर में नहीं लिखी जाती है, जो कि गलत है, मान लीजिये बच्&#x200d;ची के साथ यौन शोषण होने के एक मा&#x200d;ह बाद अगर आपने एफआईआर दर्ज करायी तो उसके पीछे जो भी वजह हो उसका जिक्र एफआईआर में अवश्&#x200d;य करें कि इस कारण एफआईआर एक माह बाद लिखायी जा रही है। अगर देर से एफआईआर लिखाने की वजह नहीं लिखी होती है तो बचाव पक्ष इस खामी का फायदा उठाकर भी आरोपी को बचाने में कामयाब हो जाता है। उन्&#x200d;होंने कहा कि यौन शोषण का शिकार हो रहे बच्&#x200d;चों में कोई खास वर्ग या खास क्षेत्र नहीं है, सभी क्षेत्रों, सभी वर्गों में इस तरह के हादसे हो रहे हैं। आंकड़ों के नजरिये से देखें तो 10 में से 1 बच्&#x200d;चा यौन शोषण का शिकार होता है।</p>
<h6><span style="color: #0000ff;"><strong>बच्&#x200d;चे के साथ संवाद बनायें रखें</strong><strong>, </strong><strong>उसके मन को टटोलते रहें</strong></span></h6>
<p>कार्यशाला में चाइल्&#x200d;ड साइकोलॉजिस्&#x200d;ट डॉ मिर्जा वकार बेग ने बताया कि माता-पिता को बच्&#x200d;चे के साथ रोजाना थोड़ा समय निकाल कर बातचीत करते रहना चाहिये। इस तरह बातचीत करते रहने से बच्&#x200d;चे के दिल में क्&#x200d;या चल रहा है, माता-पिता को इसे जानने का अवसर मिलता है। उन्&#x200d;होंने कहा कि पहले के जमाने में बच्&#x200d;चों को साथ में लिटाकर कहानियां सुनाने का जो प्रचलन था, वह बहुत अच्&#x200d;छा था। उन्&#x200d;होंने कहा कि माता-पिता का प्&#x200d;यार बच्&#x200d;चे के लिए अनकंडीशनल होना चाहिये, कहने का अर्थ है कि यह नहीं होना चाहिये कि माता-पिता बच्&#x200d;चे से कहें कि देखो तुम ऐसे करोगे तो हम तुम्&#x200d;हें प्&#x200d;यार करेंगे वरना नहीं करेंगे, बल्कि उससे यह कहना चाहिये कि तुम जैसे भी हो मेरे हो, अपनी सारी बातें तुम मुझसे बता सकते हो, हम तुम्&#x200d;हें हमेशा प्&#x200d;यार करते रहेंगे, इससे यह होगा कि बच्&#x200d;चा माता-पिता के साथ खुलकर अपनी जिज्ञासाओं और बातों को कह सकेगा। उन्&#x200d;होंने बताया कि पॉक्&#x200d;सो एक्&#x200d;ट के तहत यह आवश्&#x200d;यक है कि जब चिकित्&#x200d;सक ऐसे बच्&#x200d;चे का इलाज करे तो उसके बारे में वह रिपोर्ट करे, ऐसा न करने पर डॉक्&#x200d;टर के खिलाफ कार्रवाई होगी। इसी प्रकार ऐसे पीडि़त बच्&#x200d;चे चिकित्&#x200d;सीय परीक्षण और इलाज और चिकित्&#x200d;सक को फ्री करने का भी प्रावधान है।</p>
<h6><span style="color: #ff0000;"><strong><a style="color: #ff0000;" href="http://sehattimes.com/pledge-to-end-sexual-abuse-of-children-video-in-hindi/13680">देखें वीडियो-बच्&#x200d;चों के साथ यौन शोषण की समाप्ति के लिए दिलायी गयी शपथ</a></strong></span></h6>
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