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	<title>event &#8211; Sehat Times | सेहत टाइम्स</title>
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	<description>Health news and updates &#124; Sehat Times</description>
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		<title>गठिया होने की स्थिति में दर्द बर्दाश्‍त करके खुश रहने की सलाह मानने की जरूरत नहीं</title>
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		<pubDate>Sat, 15 Sep 2018 20:14:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="1040" height="780" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/09/lu-2.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/09/lu-2.jpg 1040w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/09/lu-2-300x225.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/09/lu-2-768x576.jpg 768w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/09/lu-2-1024x768.jpg 1024w" sizes="(max-width: 1040px) 100vw, 1040px" />आवश्‍यकता है दर्द और सूजन की शुरुआत होते ही इलाज करवाने की, रिसर्च किये जाने की   लखनऊ। ऑस्टियो ऑर्थराइटिस या गठिया या संधिपात को बढ़ती उम्र की बीमारी मान कर उससे समझौता करना गलत है। लोगों की यह भी धारणा है कि इस बीमारी का कोई इलाज नहीं हो सकता है, इसमें कुछ करने की &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="1040" height="780" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/09/lu-2.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/09/lu-2.jpg 1040w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/09/lu-2-300x225.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/09/lu-2-768x576.jpg 768w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/09/lu-2-1024x768.jpg 1024w" sizes="(max-width: 1040px) 100vw, 1040px" /><p><span style="color: #0000ff;"><strong>आवश्&#x200d;यकता है दर्द और सूजन की शुरुआत होते ही इलाज करवाने की, रिसर्च किये जाने की  </strong></span></p>
<figure id="attachment_6821" aria-describedby="caption-attachment-6821" style="width: 300px" class="wp-caption aligncenter"><img decoding="async" loading="lazy" class="size-medium wp-image-6821" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/09/LU-1-300x225.jpg" alt="" width="300" height="225" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/09/LU-1-300x225.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/09/LU-1-768x576.jpg 768w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/09/LU-1-1024x768.jpg 1024w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/09/LU-1.jpg 1040w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><figcaption id="caption-attachment-6821" class="wp-caption-text"><strong>कार्यक्रम को सम्बोधित करते लखनऊ विश्व विद्यालय के कुलपति प्रो एसपी सिंह।</strong></figcaption></figure>
<p><span style="color: #000000;"><strong>लखनऊ।</strong></span> ऑस्टियो ऑर्थराइटिस या गठिया या संधिपात को बढ़ती उम्र की बीमारी मान कर उससे समझौता करना गलत है। लोगों की यह भी धारणा है कि इस बीमारी का कोई इलाज नहीं हो सकता है, इसमें कुछ करने की जरूरत नहीं है बस एक ही रास्&#x200d;ता है कि दर्द बर्दाश्&#x200d;त करो और खुश रहो। यह बात केजीएमयू के रिह्यूमेटोलॉजी विभाग के विभागाध्&#x200d;यक्ष प्रो सिद्धार्थ दास ने आज लखनऊ विश्&#x200d;व विद्यालय के जियोलॉजी विभाग में आयोजित व्&#x200d;याख्&#x200d;यान शृंखला के तहत अपने व्&#x200d;याख्&#x200d;यान ‘अटलजी और ऑस्टियोऑर्थराइटिस’ प्रस्&#x200d;तुत करते हुए कही।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उन्&#x200d;होंने कहा कि यह सोच जनता की ही नहीं डॉक्&#x200d;टरों की भी है। उन्&#x200d;होंने कहा कि डॉक्&#x200d;टर यह चेतावनी तो देते हैं कि दर्द की दवाओं से हार्ट डिजीज और किडनी डैमेज होने का डर बना रहता है, मरीज को यह समझा दिया जाता है कि दर्द से निजात के लिए प्रत्&#x200d;यारोपण के अलावा कोई रास्&#x200d;ता नहीं है। उन्&#x200d;होंने बताया कि चूंकि प्रत्&#x200d;यारोपण बहुत खर्चीला होता है, ऐसे में 99 प्रतिशत मरीज प्रत्&#x200d;यारोपण का रास्&#x200d;ता अपनाने में असमर्थ रहते हैं यानी सीधा सा मैसेज है कि दर्द में भी मुस्&#x200d;कुराकर खुश रहो।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उन्&#x200d;होंने कहा कि ऑस्टियो ऑर्थराइटिस की समस्&#x200d;या के प्रति हमें जागने की जरूरत है। इस पर रिसर्च किये जाने की जरूरत है, बल्कि मैं तो कहूंगा कि आम जनता को इस बीमारी के इलाज की खोज की मांग सरकार से करने की जरूरत है। उन्&#x200d;होंने कहा कि भारत सरकार के एक नोटिफि&#x200d;केशन में बताया गया है कि भारत में ऑस्टियो ऑर्थराइटिस दिव्&#x200d;यांगता का चौथा आम कारण है। हालांकि हमारे अनुमान के मुताबिक यह संख्&#x200d;या कम है क्&#x200d;योंकि यह देखा गया है कि ऑस्टियो ऑर्थराइटिस के 80 फीसदी से ज्&#x200d;यादा लोगों में दिव्&#x200d;यांगता आ जाती है। डॉ दास ने कहा कि ऑस्टियो ऑर्थराइटिस एक क्रॉनिक डिजीज है जिससे 9 करोड़ लोग ग्रस्&#x200d;त हैं जबकि डायबिटीज से 4 करोड़ लोग ग्रसित हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>घुटनों के जोड़ों में दर्द से शुरू होती है यह बीमारी</strong></span></p>
<p>उन्&#x200d;होंने बताया कि यह बीमारी घुटने के जोड़ों में दर्द से शुरू होती है और फि&#x200d;र दूसरे जोड़ों में भी अपना असर दिखाती है। शुरुआत में जोड़ों में सूजन होती है और इसका इलाज किया जा सकता है इसलिए आवश्&#x200d;यक यह है कि इसके प्रति जागरूक रहा जाये और लक्षण शुरू होते ही लापरवाही न बरतते हुए इलाज शुरू कर देना चाहिये। उन्&#x200d;होंने बताया कि मस्&#x200d;कुलर पेन होने पर जांच में पाया गया है कि 50 प्रतिशत संभावना ऑस्टियो ऑर्थराइटिस की रहती है जबकि 50 प्रतिशत संभावना साधारण दर्द की होती है।  उन्&#x200d;होंने कहा जिन मरीजों को हार्ट और डायबिटीज के साथ ऑस्टियो ऑर्थराइटिस की शिकायत होती है उनकी मौत की दर हार्ट और डायबिटीज से ज्&#x200d;यादा होती है। दिल की बीमारी के साथ ऑस्टियो ऑर्थराइटिस की शिकायत वाले मरीजों की मृत्&#x200d;यु दर सिर्फ दिल की बीमारी वाले लोगों की मृत्&#x200d;युदर से 1.5 से 1.7 गुना ज्&#x200d;यादा होती है। उन्&#x200d;होंने बताया कि दिक्&#x200d;कत यह होती है कि&#x200d; हार्ट का मरीज हो या डायबिटीज का उसे तेज चलने के लिए कहा जाता है, लेकिन ऑस्टियो ऑर्थराइटिस होने के कारण व्&#x200d;यक्ति तेज नहीं चल पाता है।</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>कैल्शियम के कण हो जाते हैं जमा</strong></span></p>
<p>डॉ दास ने बताया कि ऑस्टियो ऑर्थराइटिस और दिल की बीमारियों का सम्&#x200d;बन्&#x200d;ध सिर्फ आयु से नहीं है बल्कि जोड़ों और धमनियों में कैल्शियम के कण जमा होने से भी है। उन्&#x200d;होंने कहा कि इन कैल्शियम के कणों के जमने से इन दोनों बीमारियों के होने के खतरे पर उनके द्वारा स्&#x200d;टडी की गयी थी। स्&#x200d;टडी के बारे में उन्&#x200d;होंने बताया कि वह लखनऊ विश्&#x200d;व विद्यालय के जियोलॉजी विभाग में आये और डॉ सुरेन्&#x200d;द्र कुमार के साथ इस पर स्&#x200d;टडी की। उन्&#x200d;होंने बताया कि स्&#x200d;टडी में यह पाया गया कि ऑस्टियो ऑर्थराइटिस के मरीजों के जोड़ों में कैल्शियम के कण जमा हो जाते हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उन्&#x200d;होंने अटल जी की बीमारी के बारे में बताते हुए कहा कि मैंने उन्&#x200d;हें कभी नहीं देखा न ही उनका इलाज किया इसलिए उनकी बीमारी के बारे में मीडिया से पता चला कि उन्&#x200d;हें ऑस्टियो आर्थराइटिस की शिकायत थी। कहा जाता था कि ऑस्टियो ऑर्थराइटिस होने के बाद भी व़ह बिना किसी बड़ी कठिनाई के अपना कार्य करते थे, लेकिन एक दिन नागपुर के दौरे के समय अचानक बीमार पड़ गये, यहां तक कि सम्&#x200d;मेलन में भाषण देने के लिए भी वह खड़े नहीं हो सके क्&#x200d;योंकि वह घुटने के भीषण दर्द और सूजन से परेशान थे। डॉ दास ने कहा कि हो सकता है कि यह दिक्&#x200d;कत उन्&#x200d;हें ऑस्टियो ऑर्थराइटिस के कारण हुई हो लेकिन इस बारे में पक्&#x200d;के तौर पर मैं नहीं कह सकता क्&#x200d;योंकि मेरी उनसे कभी भी मुलाकात नहीं हुई थी। उन्&#x200d;होंने कहा कि इसके बाद घुटना प्रत्&#x200d;यारोपण ने उन्&#x200d;हें काफी हद तक अक्षम कर दिया और शायद उनके राजनीतिक जीवन के इतनी जल्&#x200d;दी समाप्&#x200d;त होने का यह एक बड़ा कारण बन गया।</p>
<figure id="attachment_6822" aria-describedby="caption-attachment-6822" style="width: 300px" class="wp-caption aligncenter"><img decoding="async" loading="lazy" class="size-medium wp-image-6822" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/09/lu-2-300x225.jpg" alt="" width="300" height="225" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/09/lu-2-300x225.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/09/lu-2-768x576.jpg 768w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/09/lu-2-1024x768.jpg 1024w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2018/09/lu-2.jpg 1040w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><figcaption id="caption-attachment-6822" class="wp-caption-text"><strong>गठिया रोग को लेकर डॉ सिद्धार्थ दास से प्रश्न पूछती छात्रा।</strong></figcaption></figure>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>सभी को ठीक नहीं कर पाता है घुटना प्रत्&#x200d;यारोपण </strong></span></p>
<p>उन्&#x200d;होंने बताया कि ऑस्टियो ऑर्थराइटिस के लिए रामबाण समझे जाने वाले इलाज घुटना प्रत्&#x200d;यारोपण से बहुत से ऐसे लोग हैं जिनकी दिक्&#x200d;कत खत्&#x200d;म नहीं होती हैं। सर्जरी के तुरंत बाद 20 प्रतिशत लोग प्रत्&#x200d;यारोपण से खुश नहीं होते हैं। उन्&#x200d;होंने बताया कि रिसर्च के अनुसार 5 साल के बाद 50 प्रतिशत लोग अपने प्रत्&#x200d;यारोपण से खुश नहीं होते हैं। उन्&#x200d;होंने कहा कि अगर मांसपेशियां मजबूत नहीं होंगी तो भी प्रत्&#x200d;यारोपण सफल नहीं रहता है, संभव है अटल बिहारी के साथ भी यही दिक्&#x200d;कत रही हो जिससे उनका प्रत्&#x200d;यारोपण सफल नहीं रहा। उन्&#x200d;होंने यह भी कहा कि यह जरूरी नहीं हैं कि प्रत्&#x200d;यारोपण की सफलता 100 प्रतिशत कभी नहीं रहती है यह 96 प्रतिशत हो सकती है, इसलिए संभव है चार लोगों का प्रत्&#x200d;यारोपण सफल न रहे। इस मौ&#x200d;के पर वहां उपस्थित कई लोगों ने गठिया के बारे में डॉ सिद्धार्थ दास से प्रश्&#x200d;न पूछकर अपनी जिज्ञासा शांत की।</p>
<p><span style="color: #0000ff;"><strong>‘बाजार भी था, बिकाऊ भी थे लेकिन खरीदार नहीं थे’</strong></span></p>
<p>इस कार्यक्रम में लखनऊ विश्&#x200d;वविद्यालय के पूर्व विभागाध्&#x200d;यक्ष डॉ शैलेन्&#x200d;द्र नाथ कपूर ने अटल बिहारी के भारतीय संस्&#x200d;कृति से जुड़ाव के बारे में अपना व्&#x200d;याख्&#x200d;यान दिया। उन्&#x200d;होंने बताया कि अटल बिहारी ने राजनीति के क्षेत्र में भी पूरी पावनता बरती। एक वोट कम रहने के कारण सरकार गिरने की घटना के बारे में बताया कि वह कितने संस्&#x200d;कृतिवान थे इसका अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री होने की स्थिति में भी उन्&#x200d;होंने प्रलोभन देकर किसी सांसद को अपनी तरफ करने की कोशिश नहीं की। डॉ कपूर ने बताया कि जब अटल की सरकार गिर गयी तो एक पत्रकार ने उनसे पूछा था कि आप एक सरकार में रहते हुए एक सांसद का इंतजाम नहीं कर सके क्&#x200d;या राजनीति के बाजार में कोई सांसद बिकाऊ नहीं था? इस पर अटल बिहारी ने जवाब दिया कि बाजार भी था, बिकाऊ भी था लेकिन खरीदार नहीं थे। इसके अलावा भी उन्&#x200d;होंने अटल बिहारी के साथ के कई संस्&#x200d;मरण सुनाये।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>कार्यक्रम के आयोजक सेंटर ऑफ एडवांस स्&#x200d;टडी इन जियोलॉजी के निदेशक डॉ ध्रुवसेन सिंह थे। इस मौके पर कुलपति प्रो एसपी सिंह ने भी सम्&#x200d;बोधित करते हुए कहा कि राष्&#x200d;ट्र बनता है व्&#x200d;यक्ति, परिवार, संस्&#x200d;था, राज्&#x200d;य से, इनमें किसी प्रकार का ऑर्थराइटिस नहीं होना चाहिये। उन्&#x200d;होंने कहा कि संस्&#x200d;था महत्&#x200d;वपूर्ण है व्&#x200d;यक्ति नहीं, संस्&#x200d;थाओं को जिन्&#x200d;दा रखना चाहिये। इस मौके पर प्रति कुलपति प्रो यूएन द्विवेदी व अन्&#x200d;य शिक्षक, और छात्र-छात्रायें उपस्थित रहे।</p>
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