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	<title>drishtikon Archives - Sehat Times | सेहत टाइम्स</title>
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	<description>Health news and updates &#124; Sehat Times</description>
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		<title>समझदारी इसी में है कि दूसरों के अनुभव से सीखा जाये, खुद झेलकर नहीं&#8230;</title>
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		<pubDate>Sun, 21 Feb 2021 11:49:53 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="249" height="185" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2021/02/Drishtikon.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" /><p>‘सेहत टाइम्‍स’ का साप्‍ताहिक दृष्टिकोण धर्मेन्‍द्र सक्‍सेना विदेशों के साथ ही अब देश के पांच राज्‍यों महाराष्‍ट्र, पंजाब, केरल, छत्‍तीसगढ़ और मध्‍य प्रदेश में कोरोना वायरस के नये केस बढ़ने लगे हैं, कुछ जगहों पर कर्फ्यू तो कुछ स्‍थानों पर लॉकडाउन की नौबत भी आ चुकी है। कोरोना वायरस की इस लहर पर केंद्र सरकार &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="249" height="185" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2021/02/Drishtikon.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" />
<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:28px"><strong>‘सेहत टाइम्&#x200d;स’ का साप्&#x200d;ताहिक दृष्टिकोण</strong></p>



<div class="wp-block-image"><figure class="alignleft size-large"><img decoding="async" width="249" height="185" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2021/02/Drishtikon.jpg" alt="" class="wp-image-26347"/></figure></div>



<p><strong><em>धर्मेन्&#x200d;द्र सक्&#x200d;सेना </em></strong></p>



<p>विदेशों के साथ ही अब देश के पांच राज्&#x200d;यों महाराष्&#x200d;ट्र, पंजाब, केरल, छत्&#x200d;तीसगढ़ और मध्&#x200d;य प्रदेश में कोरोना वायरस के नये केस बढ़ने लगे हैं, कुछ जगहों पर कर्फ्यू तो कुछ स्&#x200d;थानों पर लॉकडाउन की नौबत भी आ चुकी है। कोरोना वायरस की इस लहर पर केंद्र सरकार ने चिंता जतायी है। केंद्र सरकार की चिंता जायज है, क्&#x200d;योंकि कोरोना के फैलाव की एकाएक बढ़ी रफ्तार देश ने पिछले साल मार्च से देखी थी। इस त्रासदी की यादें ताजा करना जरूरी हैं, डरने के लिए बल्कि सम्&#x200d;भलने के लिए। किस तरह हम अपने ही घर में कैद होकर रह गये थे, जिन्&#x200d;हें आवश्&#x200d;यक सेवाओं के लिए निकलना पड़ता था, उनका और उनके परिजनों का दिल ही जानता है कि जान हथेली पर लेकर घूमना क्&#x200d;या होता है।</p>



<p>सरकार की सख्&#x200d;ती और लोगों के प्रयास का नतीजा यह हुआ कि हम कोरोना को अपने से दूर रखने में सफल हो पाये हैं। देश के जिन पांच राज्&#x200d;यों में कोरोना ने अपना सिर फि&#x200d;र से उठाया है, वहां से दूसरे राज्&#x200d;यों में पहुंचने में समय नहीं लगेगा, अगर हमने सावधानी न बरती। देखा यह जा रहा है कि केस कम निकलने से लोग बचाव के प्रति लापरवाह बन गये हैं, मास्&#x200d;क लगाना, हाथ धोना, लोगों से उचित दूरी बनाकर रहना जैसे बचाने वाले हथियारों को भुला दे रहे हैं लेकिन ऐसा नहीं करना है। बचाव के कदम पूरे समुदाय के प्रति लाभप्रद होंगे। सरकार तो बराबर समझा रही है, लेकिन हममें से अधिकांश लोग इस बात को तवज्&#x200d;जो नहीं दे रहे हैं।</p>



<p>सोच कर देखिये बीते महीनों में काम-धंधा चौपट होने की वजह से आर्थिक मार हम आज तक झेल रहे हैं। पिछले साल जब कोविड का कहर टूटा और लॉकडाउन हुआ तो लोअर मीडियम क्&#x200d;लास के पास जो भी बचत थी उसके दम पर इस लॉकडाउन के पीरियड को झेल सके, गरीब वर्ग की बात करें तो सरकार ने उन्&#x200d;हें मुफ्त अनाज बंटवाया, लेकिन अब जब लोगों की अर्थव्&#x200d;यवस्&#x200d;था धीरे-धीरे पटरी पर लाने क प्रयास किया जा रहा है तो क्&#x200d;या फि&#x200d;र से लॉकडाउन वाली स्थिति आसानी से झेल पायेंगे &nbsp;? चिंता वाली बात यह है कि प्राइवेट कार्य करने वालों का एक वर्ग ऐसा भी है जो गरीबी की सरकारी परिभाषा में आता नहीं है, यानी सरकारी मदद से वंचित रहता है, उसकी निर्भरता तो अपने छोटे-मोटे व्&#x200d;यवसाय पर होती है, ऐसे में लॉकडाउन जैसी स्थिति इस वर्ग के लिए अत्&#x200d;यन्&#x200d;त मुसीबत भरी होती है। बेहतर है कर्फ्यू या लॉकडाउन जैसी स्थितियां पैदा न हों, क्&#x200d;योंकि संक्रमण फैला तो सिर्फ आर्थिक नुकसान ही नहीं, शारीरिक नुकसान भी तो होगा जिसकी भरपायी कैसे होगी ? कोविड का स्&#x200d;वरूप बदला हुआ है, यानी उसके बारे में अभी यह नहीं पता है कि यह किस तेजी से संक्रमण फैलाने की क्षमता रखता है।</p>



<p>समझदारी इसी में है कि जो हमारे पास घट रहा है, हम उससे सबक लें, तात्&#x200d;पर्य यह है कि कोविड को लेकर जो समाचार पांच राज्&#x200d;यों के बारे में बताये जा रहे हैं उसे देखकर, सुनकर सावधान हो जायें, समझदारी इसी में है कि दूसरों के अनुभव से सीखा जाये न कि उस अनुभव को झेलकर सीखने का इंतजार करें।</p>



<p>इन सभी बातों को ध्&#x200d;यान में रखते हुए सभी का टीकाकरण होने तक अभी सिर्फ और सिर्फ बचाव पर ध्&#x200d;यान देने की जरूरत है। जैसा कि विशेषज्ञ बताते हैं कि जब तक कम से कम 60 प्रतिशत लोगों को टीका न लग जाये त&#x200d;ब तक हर्ड इम्&#x200d;युनिटी की स्थिति नहीं पैदा होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि टीका लगवा चुके लोगों और लगवाने से बाकी बचे लोगों को एक-दूसरे से दूरी, सफाई और मास्&#x200d;क जैसी सावधानियों को अपनाना ही होगा। क्&#x200d;योंकि टीका लगवा चुका व्&#x200d;यक्ति स्&#x200d;वयं तो बच सकता है लेकिन कोविड वायरस का कैरियर बन कर बिना टीका लगवाये व्&#x200d;यक्ति के सम्&#x200d;पर्क में आने पर उसे संक्रमण दे सकता है। विशेषकर बच्&#x200d;चों को बचाना बहु&#x200d;त आवश्&#x200d;यक है क्&#x200d;योंकि उन्&#x200d;हें टीका लगाने की अभी कोई योजना नहीं तैयार है।  </p>
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