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	<title>child sexual abuse &#8211; Sehat Times | सेहत टाइम्स</title>
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	<description>Health news and updates &#124; Sehat Times</description>
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		<title>&#8230;मां आपने मुझे बा‍हर वालों से बचने को आगाह किया था, लेकिन घर में भी बचना है यह क्‍यों नहीं बताया&#8230;?</title>
		<link>http://sehattimes.com/important-discussion-about-child-sexual-abuse-news-in-hindi/17575</link>
		
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		<pubDate>Sun, 16 Feb 2020 19:40:47 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="960" height="587" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2020/02/Dr.Piyali-Bhattacharya-11.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2020/02/Dr.Piyali-Bhattacharya-11.jpg 960w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2020/02/Dr.Piyali-Bhattacharya-11-300x183.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2020/02/Dr.Piyali-Bhattacharya-11-768x470.jpg 768w" sizes="(max-width: 960px) 100vw, 960px" />-बाल यौन शोषण को लेकर ‘अनहियर्ड सॉबिंग’ विषय पर चर्चा -एसजीपीजीआई की डॉ पियाली भट्टाचार्य ने बतायीं महत्‍वपूर्ण बातें -घरों में ही होते हैं 70 से 80 प्रतिशत बाल यौन शोषण के केस सेहत टाइम्‍स ब्‍यूरो लखनऊ। ‘मां आपने मुझे बाहर वालों से बचने के लिए तो आगाह किया था लेकिन घरवालों से भी बचना &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="960" height="587" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2020/02/Dr.Piyali-Bhattacharya-11.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2020/02/Dr.Piyali-Bhattacharya-11.jpg 960w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2020/02/Dr.Piyali-Bhattacharya-11-300x183.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2020/02/Dr.Piyali-Bhattacharya-11-768x470.jpg 768w" sizes="(max-width: 960px) 100vw, 960px" /><h5><span style="color: #0000ff;"><strong>-बाल यौन शोषण को लेकर </strong><strong>‘अनहियर्ड सॉबिंग’ विषय पर चर्चा</strong></span></h5>
<h5><span style="color: #0000ff;"><strong>-एसजीपीजीआई की डॉ पियाली भट्टाचार्य ने बतायीं महत्&#x200d;वपूर्ण बातें </strong></span></h5>
<h5><span style="color: #0000ff;"><strong>-घरों में ही होते हैं 70 से 80 प्रतिशत बाल यौन शोषण के केस</strong></span></h5>
<p><img decoding="async" loading="lazy" class="aligncenter size-full wp-image-17579" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2020/02/Dr.Piyali-Bhattacharya-11.jpg" alt="" width="960" height="587" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2020/02/Dr.Piyali-Bhattacharya-11.jpg 960w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2020/02/Dr.Piyali-Bhattacharya-11-300x183.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2020/02/Dr.Piyali-Bhattacharya-11-768x470.jpg 768w" sizes="(max-width: 960px) 100vw, 960px" /></p>
<p><strong>सेहत टाइम्&#x200d;स ब्&#x200d;यूरो</strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> ‘मां आपने मुझे बाहर वालों से बचने के लिए तो आगाह किया था लेकिन घरवालों से भी बचना हैं, यह नहीं बताया था।‘ यह वह सवाल है जो 13 वर्ष की किशोरी अपनी मां से पूछ रही थी। दरअसल इस किशोरी इसके अपने घर में ही अपनों ने छला था, जिसका नतीजा यह हुआ कि गुड्डा-गुड़ि&#x200d;या खेलने की उम्र में यह किशोरी गर्भवती हो गयी। यह तो सिर्फ एक उदाहरण है, ऐसी न जाने कितनी घटनायें हैं जो सामने आ ही नहीं पाती हैं। 70 से 80 प्रतिशत बच्&#x200d;चे यौन शोषण का शिकार घर में ही होते हैं।</p>
<p>यह महत्&#x200d;वपूर्ण जानकारी संजय गांधी पीजीआई की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ पियाली भट्टाचार्य ने रविवार को यहां गोमती नगर स्थित भारतेन्&#x200d;दु नाट्य अकादमी में आयोजित अवध कॉन्&#x200d;क्&#x200d;लेव में आयोजित एक चर्चा के दौरान  दी। चर्चा का विषय था ‘अनहर्ड सॉबिंग्&#x200d;स’ यानी न सुनायी देने वाला रोना। डॉ पियाली ने कहा कि बच्&#x200d;चों का अंतर्मन जब रोता है तो वह बाहर से नहीं दिखता उसकी पीड़ा वह बच्&#x200d;चा ही महसूस करता है। उन्&#x200d;होंने बताया कि बच्&#x200d;चों के साथ होने वाले यौन शोषण से उन्&#x200d;हें बचाने में सर्वाधिक महत्&#x200d;वूपूर्ण भूमिका बच्&#x200d;चे के माता-पिता निभा सकते हैं। विशेषकर लड़की है तो मां और लड़का है तो पिता। उन्&#x200d;होंने बताया कि प्राकृतिक रूप से मां तो केयर गिवर है, लेकिन बाप को देखभाल करने के लिए अपनी भूमिका तैयार करने में मेहनत करनी पड़ती है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उन्&#x200d;होंने बताया कि यौन शोषण का शिकार बच्&#x200d;चा जिस तरह की मानसिक अवस्&#x200d;था से गुजरता है वह उसकी पूरी जिंदगी को प्रभावित करता है, इसलिए आवश्&#x200d;यक है इसके प्रति युद्धस्&#x200d;तर पर जागरूक हुआ जाये। उन्&#x200d;होंने बताया कि कभी-कभी तो लम्&#x200d;बे समय तक यौन शोषण का का शिकार हुई बच्&#x200d;ची के मन में ऐसा सदमा बैठ जाता है कि बड़े होने पर भी सहमी रहती है। उन्&#x200d;होंने बताया कि ज्&#x200d;यादातर तो ऐसे मामले सामने ही नहीं आ पाते हैं क्योंकि पहले तो डरे-सहमे हुए बच्&#x200d;चे ही नहीं बताते हैं, छिपाते हैं, फि&#x200d;र अगर किसी तरह मां को पता चला तो मां फि&#x200d;र शर्म और लोकलाज के भय से इसे उजागर नहीं करती है, और इसी चुप्&#x200d;पी का फायदा बच्&#x200d;चों के साथ यह अनैतिक कार्य करने वाले लोग उठाते हैं।</p>
<h6><span style="color: #0000ff;"><strong>शक के दायरे में न आने वाले रिश्&#x200d;ते भी देते हैं धोखा</strong></span></h6>
<p>उन्&#x200d;होंने बताया कि देखा गया है कि घर में यौन शोषण करने वालों में वे रिश्&#x200d;ते भी शामिल हैं, जिन पर कोई जल्&#x200d;दी शक भी नहीं करता है, यही नहीं उम्र भी इसमें मायने नहीं रखती है। उन्&#x200d;होंने बताया कि यौन शोषण करने वाला बच्&#x200d;ची को पहले तैयार करता है इसके लिए पहले प्&#x200d;यार करना, चूमना करता है, फि&#x200d;र भरोसे में लेता है और फि&#x200d;र उसका यौन शोषण करता है। यही नहीं ऐसा करने वाले बच्&#x200d;चे को डरा कर भी रखते हैं वे जानते है कि बच्&#x200d;चा बतायेगा नहीं इसी का फायदा उठाते हैं। घर में होने वाला यौन शोषण बार-बार होता है, बच्&#x200d;चा हीनभावना से ग्रस्&#x200d;त हो जाता है, उसे कन्&#x200d;फ्यूजन होता है कि वह क्&#x200d;या करे। कुछ केस में ऐसा भी देखा गया है कि पहले प्&#x200d;यार से मनाते हैं, फि&#x200d;र विश्&#x200d;वास जताकर मनाते हैं और अगर फि&#x200d;र भी नहीं माना तो उत्&#x200d;पीड़न कर बच्&#x200d;ची का यौन शोषण करते हैं।</p>
<p><img decoding="async" loading="lazy" class="aligncenter wp-image-17578" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2020/02/Dr.Piyali-Bhattacharya-3.jpg" alt="" width="385" height="545" /></p>
<h6><span style="color: #0000ff;"><strong>इन परिस्थितियों में खुलते हैं बच्&#x200d;चों के यौन शोषण के मामले</strong></span></h6>
<p>डॉ पियाली ने बताया कि ऐसे मामले तब खुलते हैं जब बच्&#x200d;चों को कोई संक्रमण या अन्&#x200d;य शारीरिक दिक्&#x200d;कतें आती हैं। उन्&#x200d;होंने बताया&#x200d; कि 13 साल की बच्&#x200d;ची की प्रेगनेंसी का केस उनके पास पीजीआई में ही आया था। उन्&#x200d;होंने बताया कि&#x200d; कभी-कभी बच्&#x200d;चे में साइकोसोमेटिक लक्षण होते हैं यानी बच्&#x200d;चे का मानसिक कष्&#x200d;ट शारीरिक कष्&#x200d;ट के रूप में सामने आता है जैसे बार-बार पेट दर्द होना लेकिन पेट दर्द का कारण समझ में न आना, ऐसी हालत में जब माता-पिता बच्&#x200d;चे को दिखाने लाते हैं तो चिकित्&#x200d;सक समझते हैं कि ये साइकोसोमेटिक लक्षण हैं। इसके बाद चिकित्&#x200d;सक उस बच्&#x200d;चे से जब प्&#x200d;यार के साथ गहरायी से पूछता है तो ये सारी बातें सामने आती हैं। डॉ पियाली ने कहा कि वैसे भी बच्&#x200d;चे अपने साथ होने वाले यौन शोषण को किसी को भले ही न बताये लेकिन डॉक्&#x200d;टर को वह अपना दोस्&#x200d;त मानकर बता देता है बशर्ते डॉक्&#x200d;टर उसकी भावना को समझते हुए पूछताछ की कोशिश करे। उन्&#x200d;होंने बताया कि जेनाइटल फाइंडिंग में अगर सेक्&#x200d;सुअली ट्रांसमिशन बीमारियां आती हैं तो डॉक्&#x200d;टर को सस्&#x200d;पेक्&#x200d;ट करना पड़ता है, क्&#x200d;योंकि बिना सेक्&#x200d;स किये बच्&#x200d;चे के शरीर में आखिर यह बीमारियां कहां से आयीं। उन्&#x200d;होंने यह भी कहा कि हालांकि कानूनी दृष्टिकोण से डॉक्&#x200d;टर के लिए भी सभी बातें पूछना आसान नहीं होता है इसके लिए उसे बच्&#x200d;चे के घरवाले से सहमति लेनी पड़ती है।</p>
<h6><span style="color: #0000ff;"><strong>लड़की को मां और लड़के को पिता खुलकर समझायें सभी अंगों के बारे में</strong></span></h6>
<p>उन्&#x200d;होंने बताया कि लड़कियों को समझाने की जिम्&#x200d;मेदारी मां की है, उसे बचपन से ही गुड टच और बैड टच को समझाना चाहिये कि एक-एक अंग के बारे में समझाना चाहिये। यौन अंगों के बारे में भी जानकारी देना चाहिये। उसे समझायें कि अपने बिकि&#x200d;नी एरिया को अकेले मां के अतिरिक्&#x200d;त किसी को भी न छूने दें। पेशाब करने में दर्द हो तो बताये,  पैंटी में ब्&#x200d;लड आये तो बताये, किसी को देखकर डरे, सहम जाये तो ध्&#x200d;यान देना चाहिये। उन्&#x200d;होंने बताया कि आजकल तो स्&#x200d;कूलों में भी गुड टच-बैड टच बताया जाने लगा है। उन्&#x200d;होंने बताया कि इसी प्रकार एक बार एक बच्&#x200d;ची पांच साल बाद जब स्&#x200d;कूल में यह जागरूकता करायी गयी  तो घर आकर बच्&#x200d;ची ने बताया कि मुझे बचपन में ऐसे ही दादा (ममेरे भाई) ने टच किया था।</p>
<p>इसी प्रकार लड़कों के यौन शोषण के बारे में तो पता ही नहीं चलता है, क्&#x200d;योंकि लड़के सबसे ज्&#x200d;यादा शर्माते हैं, ऐसे में पिता और बेटे के बीच अच्&#x200d;छा रिलेशन होना चाहिये। पिता उसे बताये कि उम्र के साथ यौन अंगों में कैसा बदलाव आता है, उसे क्&#x200d;या करना चाहिये क्&#x200d;या नहीं, यही नहीं पोर्नोग्राफी से बच्&#x200d;चे बहुत बिगड़ते हैं तो इस बारे में अपनी तरफ से बच्&#x200d;चे को समझाना चाहिये कि असल जीवन में यह सत्&#x200d;य नहीं होता है। इन कलाकारों को तो पोर्नोग्राफी के लिए पैसे मिलते हैं।</p>
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