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	<title>Burning &#8211; Sehat Times | सेहत टाइम्स</title>
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	<description>Health news and updates &#124; Sehat Times</description>
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		<title>एक सुलगता प्रश्‍न : ऐसा करके स्किल की बेकद्री नहीं की जा रही ?</title>
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		<pubDate>Thu, 16 May 2019 05:12:52 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="266" height="232" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/05/arvind-nigam.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" />प्रतिभा को उचित सम्‍मान न दिये जाने से आक्रोशित है राज्‍य स्‍तरीय पुरस्‍कार विजेता   धर्मेन्‍द्र सक्‍सेना लखनऊ। एक तरफ जहां प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी स्किल को बेरोजगारी से जोड़कर प्रतिभाओं को उभारने का काम कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर उत्‍तर प्रदेश सरकार के अधिकारी अपने पास मौजूद प्रतिभाओं को सहेज नहीं पा रहे हैं, &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="266" height="232" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2019/05/arvind-nigam.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" /><p><span style="color: #0000ff;"><strong>प्रतिभा को उचित सम्&#x200d;मान न दिये जाने से आक्रोशित है राज्&#x200d;य स्&#x200d;तरीय पुरस्&#x200d;कार विजेता </strong></span></p>
<figure id="attachment_406" aria-describedby="caption-attachment-406" style="width: 266px" class="wp-caption aligncenter"><img decoding="async" loading="lazy" class="size-medium wp-image-406" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2017/02/arvind-nigam-266x300.jpg" alt="" width="266" height="300" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2017/02/arvind-nigam-266x300.jpg 266w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2017/02/arvind-nigam.jpg 513w" sizes="(max-width: 266px) 100vw, 266px" /><figcaption id="caption-attachment-406" class="wp-caption-text"><em><strong>अरविन्द कुमार निगम</strong></em></figcaption></figure>
<p><strong> </strong></p>
<p><strong>धर्मेन्&#x200d;द्र सक्&#x200d;सेना</strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> एक तरफ जहां प्रधानमंत्री नरेन्&#x200d;द्र मोदी स्किल को बेरोजगारी से जोड़कर प्रतिभाओं को उभारने का काम कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर उत्&#x200d;तर प्रदेश सरकार के अधिकारी अपने पास मौजूद प्रतिभाओं को सहेज नहीं पा रहे हैं, जिससे जनता को परेशानी के साथ-साथ ही राजस्&#x200d;व को भी नुकसान होने का संकट खड़ा हो रहा है। इसका ताजा उदाहरण केजीएमयू का डिपार्टमेंट ऑफ फि&#x200d;जिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन है। दिव्&#x200d;यांगों के लिए कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण बनाने वाले विभाग की वर्कशॉप के मैनेजर अरविन्&#x200d;द कुमार निगम रिटायरमेंट के कगार पर पहुंच गये हैं, अपनी रिसर्च से विभाग को लाखों के राजस्&#x200d;व के साथ ही दिव्&#x200d;यांगों के लिए मददगार बहुत कम कीमत वाले उपकरण बनाने वाले अरविन्&#x200d;द निगम एक माह बाद जून में रिटायर हो रहे हैं। राज्&#x200d;य स्&#x200d;तरीय पुरस्&#x200d;कार प्राप्&#x200d;त करने के नियमानुसार उन्&#x200d;हें जो सेवा विस्&#x200d;तार दिया जाना चाहिये वह नहीं दिया जा रहा है, काफी कोशिशों के बाद भी सेवा विस्&#x200d;तार का हक न मिलने के बाद इस लड़ाई को वह हाईकोर्ट में लड़ रहे हैं। उनका कहना है कि मेरा हक मुझे न देकर चूंकि मेरे सम्&#x200d;मान और अधिकार को ठेस पहुंची है इसलिए मजबूर होकर मुझे न्&#x200d;यायालय का रास्&#x200d;ता चुनना पड़ा है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>अपनी प्रतिभा को न्&#x200d;यायोचित सम्&#x200d;मान न मिलने से आक्रोश भरा दुख अपने अंदर समेटे अरविन्&#x200d;द कुमार निगम ने तथ्&#x200d;यों के साथ जो अपनी बात रखी वह चौंकाने वाली है। अरविन्&#x200d;द कुमार निगम बताते हैं कि दिव्&#x200d;यांगों के बीच कार्य करते-करते उनके दुखों को उन्&#x200d;होंने नजदीक से महसूस किया है, इसी अहसास ने उन्&#x200d;हें दिव्&#x200d;यांगों के लिए सस्&#x200d;ते और उपयोगी उपकरण बनाने की प्रेरणा दी। शोध के बाद उनके बनाये उपकरण की कद्र उत्&#x200d;तर प्रदेश सरकार ने भी की और वर्ष 2009 में उन्&#x200d;हें राज्&#x200d;य स्&#x200d;तरीय पुरस्&#x200d;कार से नवाजा गया। यह पहला मौका था जब यह पुरस्&#x200d;कार किसी गैर चिकित्&#x200d;सा शिक्षक को दिया गया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>अरविन्&#x200d;द कुमार निगम ने अपने शोध से जो उपकरण बनाये हैं, उनमें एक उपकरण एक ऐसी नी ब्रेस है जिसके पहनने से घुटने की शिकायत वाले लोग, जिनके पैर कमान की तरह टेढ़े हो जाते हैं, के पैर न सिर्फ सीधे हो जाते हैं बल्कि उन्&#x200d;हें चलने में बहुत आराम मिलता है और घुटना प्रत्&#x200d;यारोपण रुक जाता है। इस उपकरण की कीमत सिर्फ 1000 रुपये है जबकि मल्&#x200d;टी नेशनल कम्&#x200d;पनी की बनी इस ब्रेस की कीमत 27 से 30 हजार रुपये है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>आपको बता दें कि डीपीएमआर विभाग ने अरविन्&#x200d;द कुमार के सेवा विस्&#x200d;तार के लिए संस्&#x200d;थान के कुल&#x200d;सचिव को पत्र भी भेजा हुआ है, लेकिन सूत्रों के अनुसार यह पत्र अभी शासन को नहीं भेजा गया है। सूत्र बताते हैं कि इसका कारण यह बताया जा रहा है कि राज्&#x200d;य स्&#x200d;तरीय पुरस्&#x200d;कार के चलते सेवा विस्&#x200d;तार का लाभ अभी तक सिर्फ शिक्षकों को ही दिया गया है। इस पर अरविन्&#x200d;द का तर्क है कि यह प्रतिष्ठित पुरस्&#x200d;कार भी तो शिक्षकों को ही दिया जाता था, लेकिन उन्&#x200d;हें यह दिया गया तो इसका अर्थ यह है कि पुरस्&#x200d;कार चयन करने वाली कमेटी ने मेरे कार्यों का आकलन करके ही शिक्षकों को दिया जाने वाला पुरस्&#x200d;कार मुझे देने का फैसला किया तो ऐसे में पुरस्&#x200d;कार के एवज में मिलने वाले लाभ से मुझे क्&#x200d;यों वंचित रखा गया। इसके अतिरिक्&#x200d;त देखा जाये तो मैं शिक्षक की श्रेणी में भी आता हूं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>शिक्षक की कैटेगरी के लिए भी पात्र होने का दावा करने के पीछे अरविन्&#x200d;द कुमार निगम तर्क देते हैं कि उनकी प्रतिभा और योग्&#x200d;यता के अनुसार ही वर्ष 2015 में उन्&#x200d;हें डॉ शकुन्&#x200d;तला मिश्र राष्&#x200d;ट्रीय पुनर्वास विश्&#x200d;वविद्यालय में ऑर्थोटिक्&#x200d;स एंड प्रॉस्&#x200d;थेटिक्&#x200d;स के असिस्&#x200d;टेंट प्रोफेसर पद पर उनका चयन हो गया। लेकिन उचित माध्&#x200d;यम से आवेदन किये जाने के बावजूद केजीएमयू से उन्&#x200d;हें रिलीव नहीं किया गया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>अरविन्&#x200d;द कुमार बताते हैं कि इस समय भी वह डॉ शकुन्&#x200d;तला मिश्र राष्&#x200d;ट्रीय पुनर्वास विश्&#x200d;वविद्यालय में बेचलर ऑफ प्रॉस्&#x200d;थेटिक्&#x200d;स एंड ऑर्थोटिक्&#x200d;स के परीक्षक, मणिपाल यूनिवार्सिटी के ऑर्थोटिक्&#x200d;स एंड प्रॉस्&#x200d;थेटिक्&#x200d;स के परीक्षक, कानपुर यूनिवर्सिटी के बैचलर ऑफ फीजियोथैरेपी के परीक्षक हैं, इसके साथ ही वह केजीएमयू के एमबीबीएस द्वितीय वर्ष एवं पैरामेडिकल के छात्रों को  ऑर्थोटिक्&#x200d;स एंड प्रॉस्&#x200d;थेटिक्&#x200d;स की पढ़ाई भी करा रहे हैं।</p>
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<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
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<p><strong> </strong></p>
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