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	<title>Behavioral &#8211; Sehat Times | सेहत टाइम्स</title>
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		<title>बाइपोलर को मूड स्विंग या व्यावहारिक समस्या समझकर नजरंदाज न करें</title>
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		<pubDate>Mon, 30 Mar 2026 20:05:05 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="448" height="252" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/03/rml-22.jpeg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/03/rml-22.jpeg 448w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/03/rml-22-300x169.jpeg 300w" sizes="(max-width: 448px) 100vw, 448px" />-विश्व द्विध्रुवी दिवस (World Bipolar Day) पर डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित सेहत टाइम्स लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के मानसिक रोग विभाग द्वारा आज विश्व द्विध्रुवी (बाइपोलर) दिवस के अवसर पर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक प्रो. सी. एम. &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="448" height="252" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/03/rml-22.jpeg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/03/rml-22.jpeg 448w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/03/rml-22-300x169.jpeg 300w" sizes="(max-width: 448px) 100vw, 448px" /><h2><span style="color: #ff0000;"><strong>-विश्व द्विध्रुवी दिवस (World Bipolar Day) पर डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित</strong></span></h2>
<p><img decoding="async" loading="lazy" class="size-full wp-image-58668 aligncenter" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/03/rml-1.jpeg" alt="" width="1024" height="576" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/03/rml-1.jpeg 1024w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/03/rml-1-300x169.jpeg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/03/rml-1-768x432.jpeg 768w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></p>
<p><strong>सेहत टाइम्स</strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong> डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के मानसिक रोग विभाग द्वारा आज विश्व द्विध्रुवी (बाइपोलर) दिवस के अवसर पर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक प्रो. सी. एम. सिंह, डीन प्रो. प्रद्युम्न सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) प्रो. विक्रम सिंह, प्रो. रिचा चौधरी, प्रो. अजय कुमार वर्मा सहित विभाग के सभी चिकित्सक उपस्थित रहे। ज्ञात हो बाइपोलर में मरीज कभी मेनिया तो कभी डिप्रेशन का शिकार रहता है। चिकित्सकों का कहना है कि प्रॉपर इलाज से इस बीमारी को ठीक किया जा सकता है।</p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>समय रहते लेनी चाहिये चिकित्सीय मदद</strong></span></h3>
<p>कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्थान के निदेशक प्रो. सी. एम. सिंह ने द्विध्रुवी विकार (बाइपोलर डिसऑर्डर) की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि यह विकार मुख्यतः दो प्रकार का होता है – पहला मैनिया (उन्माद) और दूसरा डिप्रेशन (अवसाद)। उन्होंने दोनों अवस्थाओं के लक्षणों को विस्तार से समझाते हुए बताया कि उन्माद के लक्षणों में रोगी अत्यधिक उत्तेजित, प्रसन्नचित या चि़ड़चिड़ा हो जाता है। उसे नींद की आवश्यकता बहुत कम हो जाती है, वह असामान्य रूप से अधिक बोलने लगता है, विचारों की गति बहुत तेज हो जाती है, अपनी क्षमताओं का अत्यधिक आकलन करता है, फिजूलखर्ची करता है तथा बिना सोचे-समझे जोखिम भरे निर्णय लेता है। इस अवस्था में रोगी को यह भ्रम हो सकता है कि वह असाधारण शक्तियों से संपन्न है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि इसके विपरीत जब मरीज में डिप्रेशन (अवसाद) की स्थिति आती है तो रोगी लगातार उदास, निराश और खालीपन महसूस करता है। पूर्व में पसन्द रह चुकीं गतिविधियों में भी उसे कोई रुचि नहीं रहती। भूख कम लगना या अत्यधिक खाना, नींद न आना या अत्यधिक नींद आना, थकान, ऊर्जा की कमी, स्वयं को बेकार या अपराधी महसूस करना, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई तथा गंभीर मामलों में आत्महत्या के विचार आना शामिल हैं। प्रो. सिंह ने जोर देकर कहा कि इस बीमारी का उपचार सफलतापूर्वक संभव है और समय रहते चिकित्सकीय सहायता लेना अत्यंत आवश्यक है।</p>
<p><img decoding="async" loading="lazy" class="size-full wp-image-58669 aligncenter" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/03/rml-2.jpeg" alt="" width="1024" height="576" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/03/rml-2.jpeg 1024w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/03/rml-2-300x169.jpeg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/03/rml-2-768x432.jpeg 768w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>शुरुआती जांच महत्वपूर्ण</strong></span></h3>
<p>इसी क्रम में डीन प्रो. प्रद्युम्न सिंह ने इस बीमारी के शुरुआती चरण में ही पहचान (अर्ली डायग्नोसिस) के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि द्विध्रुवी विकार के लक्षणों को अक्सर परिवार वाले सामान्य मूड स्विंग या व्यवहारिक समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। जितनी जल्दी इसकी पहचान हो जाए, मरीज का इलाज उतना ही प्रभावी हो सकता है और वह सामान्य जीवन जी सकता है।</p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>समाज में व्याप्त कलंक को दूर करना जरूरी</strong></span></h3>
<p>मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. विक्रम सिंह ने कहा कि हमें अपने आस-पास यदि कोई व्यक्ति मानसिक रूप से ग्रस्त दिखे, तो उसे उपचार लेने की सलाह देनी चाहिए और उसकी सहायता करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मानसिक बीमारी को लेकर समाज में व्याप्त कलंक (स्टिग्मा) को दूर करना आवश्यक है, ताकि मरीज बिना झिझक इलाज करा सकें।</p>
<h2><span style="color: #ff0000;"><strong>महिलाओं को न करें नजरंदाज</strong></span></h2>
<p>प्रो. रिचा चौधरी और डॉ. आकांक्षा शर्मा ने महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य (विमेन मेंटल हेल्थ) पर विशेष संदेश दिया। उन्होंने बताया कि अक्सर समाज में महिलाओं की मानसिक बीमारियों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। घरेलू जिम्मेदारियों, मासिक धर्म, गर्भावस्था, प्रसवोत्तर अवस्था और रजोनिवृत्ति जैसे जैविक एवं सामाजिक कारणों से महिलाओं में मानसिक विकारों का खतरा अधिक होता है। उन्होंने कहा कि महिलाएं भी बिना किसी झिझक के उपचार के लिए आगे आएं और परिवार के सदस्यों को भी उनकी मानसिक समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए।</p>
<p>डॉ. जिलानी ने बताया कि द्विध्रुवी विकार लगभग 1 से 2 प्रतिशत आबादी को प्रभावित करता है। यह बीमारी अक्सर किशोरावस्था या युवावस्था के शुरुआती दौर में ही शुरू हो जाती है। यदि समय रहते इसकी पहचान कर इलाज शुरू न किया जाए, तो यह रोगी की पढ़ाई, करियर, नौकरी और व्यक्तिगत संबंधों को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि यदि उनके बच्चों के व्यवहार में अचानक असामान्य परिवर्तन दिखे, तो उसे नजरअंदाज न करें और विशेषज्ञ की सलाह लें।</p>
<p>डॉ. अनुरंजन विश्वकर्मा और डॉ. शांतनु शुक्ला ने द्विध्रुवी रोगियों में होने वाली नशे की लत के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस विकार से ग्रस्त मरीजों में शराब, तम्बाकू या अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करने की प्रवृत्ति सामान्य लोगों की तुलना में अधिक होती है। कई बार मरीज अपने मूड को ठीक करने के लिए नशे का सहारा लेते हैं, जिससे स्थिति और जटिल हो जाती है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में नशा मुक्ति के साथ-साथ मानसिक उपचार दोनों एक साथ आवश्यक हैं।</p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>दवा और काउंसलिंग दोनों जरूरी</strong></span></h3>
<p>डॉ. क्रिस्टोफर पीटर और डॉ. विशाखा श्रीवास्तव ने दवा के साथ-साथ काउंसलिंग (परामर्श) के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने समझाया कि यह बीमारी दीर्घकालिक होती है और इसमें दवा का सेवन लंबे समय तक चलता है, ठीक उसी तरह जैसे उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) और मधुमेह (डायबिटीज) जैसी पुरानी बीमारियों में रोगियों को नियमित रूप से दवा लेनी पड़ती है। उन्होंने बताया कि दवा के साथ-साथ मनोचिकित्सा (साइकोथेरेपी) और परिवार की काउंसलिंग से मरीज को बीमारी को समझने, दवा के प्रति अनुपालन बढ़ाने और दोबारा बीमारी होने से रोकने में बहुत सहायता मिलती है।</p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>पल्मोनरी रोगों में मानसिक बीमारियों का खतरा ज्यादा</strong></span></h3>
<p>प्रो. अजय कुमार वर्मा ने बताया कि फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों (पल्मोनरी रोग) जैसे दमा, सीओपीडी आदि से पीड़ित लोगों में भी मानसिक बीमारियों का खतरा अधिक होता है। उन्होंने कहा कि अक्सर ऐसे रोगियों में अवसाद और चिंता विकार देखने को मिलते हैं, जिससे उनकी शारीरिक बीमारी का इलाज भी प्रभावित होता है। ऐसे रोगियों को समय रहते मानसिक रोग ओपीडी में रेफर करने की आवश्यकता होती है, ताकि उनका समग्र (होलिस्टिक) उपचार हो सके।</p>
<p>इस अवसर पर सभी अतिथियों ने एक रोगी सूचना पत्रक (रोगी सूचना पत्र) का विमोचन किया। इस पत्रक में द्विध्रुवी विकार के लक्षण, कारण, उपचार के विकल्प, बचाव के तरीके तथा इस बीमारी में परिवार की क्या भूमिका होनी चाहिए, इन सभी विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई है। यह पत्रक संस्थान की मानसिक रोग ओपीडी में आने वाले रोगियों एवं उनके परिजनों को वितरित किया जाएगा, ताकि वे बीमारी को बेहतर ढंग से समझ सकें और उपचार में सक्रिय सहयोग कर सकें। कार्यक्रम के समापन पर डॉ. जिलानी ने उपस्थित सभी अतिथियों, चिकित्सकों एवं कर्मचारियों का आभार व्यक्त किया।</p>
<p>इस अवसर पर मानसिक रोग विभाग के सभी चिकित्सकों डॉ. जिलानी, डॉ. आकांक्षा शर्मा, डॉ. अनुरंजन विश्वकर्मा, डॉ. शांतनु शुक्ला, डॉ. क्रिस्टोफर पीटर, डॉ. विशाखा श्रीवास्तव, डॉ. विवेक और डॉ. नेहा ने अपना भरपूर योगदान देकर कार्यक्रम को सफल बनाया।</p>
<p>&nbsp;</p>
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