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	<title>addiction Archives - Sehat Times | सेहत टाइम्स</title>
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	<description>Health news and updates &#124; Sehat Times</description>
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		<title>युवाओं को इंटरनेट की लत से बचाने के लिए समग्र और ठोस प्रयास करने की आवश्यकता</title>
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		<pubDate>Sat, 29 Aug 2026 20:13:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="448" height="202" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/11.jpeg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" fetchpriority="high" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/11.jpeg 448w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/11-300x135.jpeg 300w" sizes="(max-width: 448px) 100vw, 448px" /><p>-व्यसन मुक्ति अभियान के तहत आरोग्य भारती की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला  -एलोपैथी, होम्योपैथी और आयुर्वेदिक दृष्टिकोणों पर प्रस्तुत किये गये व्याख्यान सेहत टाइम्स लखनऊ।आरोग्य भारती द्वारा व्यसन मुक्ति के लिए चलाये जा रहे अभियान की शृंखला में लखनऊ में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में आयोजित व्याख्यानमाला में वक्ताओं ने मोबाइल फोन की लत को &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<img width="448" height="202" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/11.jpeg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" loading="lazy" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/11.jpeg 448w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/11-300x135.jpeg 300w" sizes="auto, (max-width: 448px) 100vw, 448px" /><h2><span style="color: #ff0000;"><strong>-व्यसन मुक्ति अभियान के तहत आरोग्य भारती की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला </strong></span></h2>
<h2><span style="color: #ff0000;"><strong>-एलोपैथी, होम्योपैथी और आयुर्वेदिक दृष्टिकोणों पर प्रस्तुत किये गये व्याख्यान</strong></span></h2>
<figure id="attachment_60985" aria-describedby="caption-attachment-60985" style="width: 1369px" class="wp-caption aligncenter"><img decoding="async" class="size-full wp-image-60985" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/Dr.-Bhatt-Dr.-Girish-Dr-Girendra.jpeg" alt="" width="1369" height="528" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/Dr.-Bhatt-Dr.-Girish-Dr-Girendra.jpeg 1369w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/Dr.-Bhatt-Dr.-Girish-Dr-Girendra-300x116.jpeg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/Dr.-Bhatt-Dr.-Girish-Dr-Girendra-1024x395.jpeg 1024w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/Dr.-Bhatt-Dr.-Girish-Dr-Girendra-768x296.jpeg 768w" sizes="(max-width: 1369px) 100vw, 1369px" /><figcaption id="caption-attachment-60985" class="wp-caption-text"><span style="color: #ff0000;"><em><strong>डॉ एमएलबी भट्ट, डॉ गिरीश गुप्ता, डॉ गिरेन्द्र सिंह तोमर</strong></em></span></figcaption></figure>
<p><strong>सेहत टाइम्स</strong></p>
<p><strong>लखनऊ।</strong>आरोग्य भारती द्वारा व्यसन मुक्ति के लिए चलाये जा रहे अभियान की शृंखला में लखनऊ में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में आयोजित व्याख्यानमाला में वक्ताओं ने मोबाइल फोन की लत को एक बड़ी समस्या बताते हुए इसके समाधान की दिशा में समग्र रूप से ठोस प्रयास करने पर जोर दिया है। वक्ताओं ने सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर परोसे जा रहे कंटेन्ट की बच्चों तक आसानी से पहुंच को रोकने की दिशा में ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका द्वारा उठाये गये कदम का जिक्र करते हुए भारत में भी इस तरह की रोक लगाये जाने की दिशा में कार्य करने की आवश्यकता बतायी है। खाद्य पदार्थों की लत को समाप्त करने के लिए काउंसिलिंग के साथ ही दवाओं से उपचार के बारे में जानकारी दी गयी।</p>
<p>यहां निराला नगर स्थित माधव सभागार में कार्यशाला के प्रथम दिन 29 अगस्त को डॉ गिरिराज सिंह गोहिल की अध्यक्षता मेें आयोजित सत्र में व्यसन मुक्ति पर उपचार के एलोपैथी, होम्योपैथी और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण के लिए व्याख्यान आयोजित किया गया। व्याख्यानमाला में अल्कोहल, सिगरेट, तम्बाकू, ड्रग्स जैसे नशे के साथ ही हाल के वर्षों में पैदा हुई मोबाइल की लत का मुद्दा छाया रहा। व्यसन मुक्ति विषय पर आधारित कार्यशाला में एलोपैथिक दृष्टिकोण के लिए कल्याण सिंह अतिविशिष्ट कैंसर संस्थान के निदेशक प्रो एमएलबी भट्ट को, होम्योपैथी उपचार के दृष्टिकोण के लिए गौरांग क्लीनिक एंड सेंटर फॉर होम्योपैथिक रिसर्च के संस्थापक डॉ गिरीश गुप्ता को और आयुर्वेदिक उपचार के दृष्टिकोण प्रस्तुत करने के लिए आयुर्वेदाचार्य प्रो गिरेन्द्र​ सिंह तोमर को आमंत्रित किया गया था।</p>
<p><img decoding="async" class=" wp-image-60980 aligncenter" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/12-1.jpg" alt="" width="701" height="631" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/12-1.jpg 1600w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/12-1-300x270.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/12-1-1024x922.jpg 1024w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/12-1-768x691.jpg 768w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2026/08/12-1-1536x1382.jpg 1536w" sizes="(max-width: 701px) 100vw, 701px" /></p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>हाल के वर्षों में बढ़ गयी हैं ऑनलाइन एक्टिविटीज : प्रो एमएलबी भट्ट</strong></span></h3>
<p>प्रो एमएलबी भट्ट ने कहा कि ड्रग के नशा दो प्रकार का होता है, हार्ड ड्रग नशा जिसमें इंजेक्शन, कोकीन आते हैं और सॉफ्ट ड्रग नशा, जिसमें गोलियां, शराब, सिगरेट, तम्बाकू आदि शामिल हैं। विश्व में 120 करोड़ लोग स्मोकर्स, 200 करोड़ अल्कोहल का प्रयोग करने वाले और 18.5 करोड़ लोग ड्रग्स का सेवन करते हैं। स्टूडेंट में खास रिस्क होता है। उन्होंने बताया कि 2015-16 में हुए सर्वे में देखा गया था कि लगभग 44 प्रतिशत किशोर सिगरेट का, 29 प्रतिशत आदमी तम्बाकू तथा लगभग 60 प्रतिशत अल्कोहल का प्रयोग करते हैं।</p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>ओवर कॉन्फिडेंस करा रहा दुर्घटनाएं</strong></span></h3>
<p>कारणों के बारे में बताया अल्कोहल के चलते कॉन्फीडेंस लेवल बढ़ जाता है, जिससे नशे की हालत में वाहन चलाते हुए दुर्घटनाएं बढ़ जाती हैं। 10 से 15 वर्षों में विशेषकर कोविड के बाद ऑनलाइन एक्टीविटीज बहुत बढ़ गयी है। युवा पीढ़ी में इसकी लत बढ़ती जा रही है, जिसके कारण अवसाद, नींद की कमी, कार्य के प्रदर्शन में गिरावट जैसी दिक्कतें हो रही हैं।</p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>प्राइमरी शिक्षा से ही पढ़ायें नशे के नुकसान</strong></span></h3>
<p>इस समस्या से निपटने के लिए जिन कदमों को उठाने की जरूरत है उनमें मल्टी स्टेक होल्डर्स टीम के गठन, साक्ष्य आधारित बचाव की रणनीति विशेषकर युवाओं के लिए तैयार की जानी चाहिये, इसके अलावा नाबालिगों के लिए लीगल और पॉलिसी एनवायरमेंट की आवश्यकता है। बचाव के​ लिए प्राइमरी और अपर प्राइमरी लेवल से ही बच्चों को इसकी शिक्षा देने की आवश्यकता है। अगर कोई विद्यार्थी नशे की लत में पड़ जाता है तो उसकी शीघ्र पहचान और विशेषज्ञों के हस्तक्षेप की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि डॉक्टरी-इंजीनियरिंग पढ़ाई करने वाले बहुत से लोग नशे के चक्कर में पड़ जाते हैं, जिससे उनका करियर समाप्त हो जाता है। उन्होंने बताया कि मैं अपनी जानकारी के आधार पर बताना चाहता हूं कि मेरे साथ ही केजीएमयू से डॉक्टरी की पढ़ाई करने वाले तीन चार डॉक्टर ऐसे हैं जो नशे के चक्कर में बर्बाद हो गये, किसी ने आत्महत्या कर ली, किसी की असमय मृत्यु हो गयी।</p>
<h2><span style="color: #ff0000;"><strong>शताब्दी का सबसे बड़ा एडिक्शन है मोबाइल फोन : डॉ गिरीश गुप्ता</strong></span></h2>
<p>अंतरराष्ट्रीय जगत में शोध को लेकर विशिष्ट स्थान रखने वाले वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ गिरीश गुप्ता ने अपने व्याख्यान में कहा कि आरोग्य भारती ने व्यसन मुक्ति के लिए जो चर्चा शुरू की है, वह समस्या ग्लोबली है। उन्होंने कहा कि इस शताब्दी में सबसे बड़ा एडिक्शन मोबाइल का सामने आया है। यह समस्या किस भयावह स्थिति में पहुंच रही है, इसे एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करते हुए उन्होंने पिछले दिनों महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजी नगर में घटी दिल दहला देने वाली घटना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि मोबाइल के लती 19 वर्षीय लड़के ने अपने माता-पिता से मोबाइल की मांग की, पिता ने उसे समझाने की कोशिश की लेकिन वह जिद पर अड़ा रहा और पहाड़ी पर चढ़ गया, वहां से कूदकर आत्महत्या करने की बात कहने लगा पुलिस भी आ गयी, सभी लोग उसे समझा रहे थे लेकिन वह अपनी जिद पर अड़ा रहा, बताया जाता है कि पिता ने उसे पकड़ने की कोशिश की लेकिन वह नीचे कूद गया, उसे बचाने के चक्कर में पिता भी पहाड़ी सें नीचे कूद गये। बेटे और पति की यह हालत देखकर महिला को भी सदमा लगा और उसने भी पहाड़ी से कूदकर अपनी जान दे दी, यानी एक मोबाइल की जिद ने एक ही परिवार के तीन सदस्यों को संसार से जुदा कर दिया। मोबाइल का एडिक्शन बहुत सीवियर हो गया है उन्होंने कहा कि मैंने एक खबर आज ही पढ़ी कि 82 प्रतिशत बच्चे खाना तब खाते हैं जब उन्हें मोबाइल देखने को मिलता है।</p>
<h3><span style="color: #ff0000;">महिला को नवजात से ज्यादा मोबाइल की फिक्र</span></h3>
<p>उन्होंने कहा कि मोबाइल के एडिक्शन को अगर कम कर पायें तो युवा पीढ़ी को हम बचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि मनोविज्ञानी बताते हैं कि बच्चों में जो ऑटिज्म होता है, उसका एक कारण मोबाइल भी है। जिसे वर्चुअल ऑटिज्म कहते हैं, इसमें बच्चे हाइपर एक्टिव हो जाते हैं, आक्रामक हो जाते हैं, उनके अंदर आत्महत्या की भावना आने लगती है। इसका दवाओं से कोई इलाज भी नहीं है, इसका इलाज सिर्फ माता-पिता की काउंसिलिंग, बच्चे की काउंसिलिंग करना ही है। एक और उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि किस तरह से एक महिला जो प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती थी, प्रसव के बाद जब वह थोड़ी होश में आयी तो उसने कहा कि वह कहां है, जाहिर सी बात है लोगों ने सोचा कि अपनी संतान के बारे में पूछ रही होगी, लेकिन ताज्जुब तो तब हुआ जब पता चला कि संतान नहीं, वह अपने मोबाइल के बारे में पूछ रही थी। इस लत से छुटकारा पाने में मुख्य रूप से मनोवैज्ञानिक अपनी भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने कहा कि मनोवैज्ञानिकों के साथ ही समाज सुधारकों और माता-पिता द्वारा बच्चों की काउंसिलिंग करना ही एक रास्ता दिख रहा है।</p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>नशीले खाद्य पदार्थों को छ़ुड़ाने की दवाएं हैं होम्योपैथी में</strong></span></h3>
<p>उन्होंने बताया कि जहां तक होम्योपैथी में नशीले पदार्थों की लत के शिकार लोगों के इलाज की बात है तो कुछ ऐसी होम्योपैथिक दवाएं हैं। उन्होंने कुछ दवाओं के नाम भी बताये। उन्होंने कहा कि जैसे तम्बाकू की आदत छुड़ाने की दवा है, और आपको जानकर ताज्जुब होगा कि वह दवा भी तम्बाकू से ही बनी है। उन्होंने कहा ​कि लेकिन इससे लिए जरूरी है कि नशा करने वाला व्यक्ति नशा छोड़ने की कोशिश करे। उन्होंने कहा कि हां अल्कोहल की आदत छुड़ाने की दवा जरूर माता-पिता ले गये और मरीज को दी, जिससे लाभ हुआ। उन्होंने बताया कि चूंकि मरीज को दवा बिना बताये दी गयी, लोग फॉलोअप नहीं करते, ऐेसे में हम कोई साक्ष्य नहीं प्रस्तुत कर सकते हैं, उनके परिजनों द्वारा दी गयी जानकारी के आधार पर ही हम यह बात कह रहे हैं। डॉ गिरीश ने कहा ​कि मैंने इस पर शोध तो नहीं किया है लेकिन मुझे इतना विश्वास है कि यदि किसी हॉस्पिटल जहां ऐसे मरीज आते हों वहां अगर होम्योपैथिक दवाओं की मरीजों के ऊपर स्टडी की जाये तो परिणाम आशातीत मिलेंगे। उन्होंने कहा कि आरोग्य भारती के इस मिशन में होम्योपैथी एक छोटी-मोटी भूमिका अदा कर सकती है।</p>
<h3><span style="color: #ff0000;"><strong>हर्बल गुटखे से छुड़ा रहे तम्बाकू वाला गुटखा : प्रो गिरेन्द्र​ सिंह </strong></span></h3>
<p>आयुर्वेद के चिकित्सक प्रो गिरेन्द्र​ सिंह तोमर ने भी पंचकर्म के माध्यम से नशे की लत छुड़ाने का उपचार किये जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि नशामुक्ति के पांच अनिवार्य स्तम्भों में शारीरिक शुद्धि, मानसिक शांति, औषधीय सहायता, दिनचर्या और पारिवारिक सहयोग शामिल हैं। उन्होंने गुटखे की लत से छुटकारा पाने के लिए खुद के द्वारा तैयार किये गये हर्बल गुटखे से किये जा रहे शोध के अबतक के आशातीत परिणामों के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि इस हर्बल गुटखे में उन्होंने सौंफ, सुपारी, काली मिर्च, छोटी इलायची, दालचीनी, धनिया, सौंठ, छोटी पिपल, बड़ी इलायची और लौंग का निश्चित मात्रा में प्रयोग किया है।</p>
<p>कार्यक्रम में आरोग्य भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ आरके पंडित, राष्ट्रीय सचिव डॉ अशोक वार्ष्णेय के साथ ही डॉ बीएन सिंह, डॉ सुनील अग्रवाल सहित अनेक विशिष्टजन उपस्थित रहे।</p>
<p>The post <a href="http://sehattimes.com/there-is-a-need-for-comprehensive-and-concrete-efforts-to-protect-the-youth-from-internet-addiction/60976">युवाओं को इंटरनेट की लत से बचाने के लिए समग्र और ठोस प्रयास करने की आवश्यकता</a> appeared first on <a href="http://sehattimes.com">Sehat Times | सेहत टाइम्स</a>.</p>
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