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	<title>सेहत टाइम्स &#8211; Sehat Times | सेहत टाइम्स</title>
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	<description>Health news and updates &#124; Sehat Times</description>
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		<title>अब नहीं तो आखिर कब&#8230;क्‍योंकि जान है हमारी, ये नहीं है सरकारी&#8230;</title>
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		<pubDate>Thu, 08 Apr 2021 21:14:57 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<img width="249" height="185" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2021/02/Drishtikon.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" />-कोरोना को लेकर तेजी से खराब हो रहे मौजूदा हालातों पर ‘सेहत टाइम्‍स‘ का दृष्टिकोण धर्मेन्‍द्र सक्‍सेना बीते दो दिनों से लखनऊ ने एक ऐसी दर्दनाक तस्‍वीर देखी है जिसे देखने वाले तो अंदर ही अंदर हिल गये, साथ ही जिसने सुना और उन तस्‍वीरों को देखा वे भी विचलित हो गये। दर्द और चिंता &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<img width="249" height="185" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2021/02/Drishtikon.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" decoding="async" loading="lazy" style="display: block; margin-bottom: 5px; clear:both;max-width: 100%;" link_thumbnail="" />
<p class="has-vivid-red-color has-text-color" style="font-size:28px"><strong>-कोरोना को लेकर तेजी से खराब हो रहे मौजूदा हालातों पर </strong><strong>‘</strong><strong>सेहत टाइम्&#x200d;स</strong><strong>‘</strong><strong> का दृष्टिकोण </strong><strong></strong></p>



<div class="wp-block-image"><figure class="aligncenter size-large is-resized"><img decoding="async" loading="lazy" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2021/04/death-2-1024x622.jpg" alt="" class="wp-image-27972" width="536" height="325" srcset="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2021/04/death-2-1024x622.jpg 1024w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2021/04/death-2-300x182.jpg 300w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2021/04/death-2-768x466.jpg 768w, http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2021/04/death-2.jpg 1280w" sizes="(max-width: 536px) 100vw, 536px" /><figcaption>                                                                                                 <strong><em>फोटो साभार</em></strong></figcaption></figure></div>



<p><strong>धर्मेन्&#x200d;द्र सक्&#x200d;सेना</strong><strong></strong></p>



<p><strong>बीते</strong> दो दिनों से लखनऊ ने एक ऐसी दर्दनाक तस्&#x200d;वीर देखी है जिसे देखने वाले तो अंदर ही अंदर हिल गये, साथ ही जिसने सुना और उन तस्&#x200d;वीरों को देखा वे भी विचलित हो गये। </p>



<p><strong><span class="has-inline-color has-vivid-red-color">दर्द और चिंता भरा दृश्&#x200d;य एक-</span></strong> दरअसल गोमती नदी के किनारे बने श्&#x200d;मशान घाट बैकुंठ धाम पर कोरोना से हुई मौत के बाद शव के अंतिम संस्&#x200d;कार के लिए आयी गाडि़यों की कतारें, उसके अंदर रखे शवों को लेकर आये लोग टोकन लेकर प्रतीक्षा कर रहे थे कि उनके शव के अंतिम संस्&#x200d;कार का नम्&#x200d;बर कब आयेगा। </p>



<p><strong><span class="has-inline-color has-vivid-red-color">दर्द और चिंता भरा दृश्&#x200d;य दो &#8211;</span></strong> एक बड़े अस्&#x200d;पताल के सर्जन के पिता को कोरोना होने के बाद शहर के किसी अस्&#x200d;पताल में समय पर इलाज नहीं मिल सका, और वे परलोक सिधार गये&#8230;</p>



<p><strong><span class="has-inline-color has-vivid-red-color">दर्द और चिंता भरा दृश्&#x200d;य तीन-</span></strong> केजीएमयू जैसे विश्&#x200d;वस्&#x200d;तरीय शिक्षण व चिकित्&#x200d;सा संस्&#x200d;थान जहां मरीज ठीक होने की आस लेकर आता है, उस मरीज की चिकित्&#x200d;सा करने वाले चिकित्&#x200d;सक स्&#x200d;वयं बड़ी संख्&#x200d;या में कोरोना की गिरफ्त में आ गये हैं, यानी 15 दिन के लिए उनकी सेवायें मरीजों के लिए बंद, न सिर्फ केजीएमयू दूसरे संस्&#x200d;थानों में भी कमोवेश ऐसी ही स्थिति है। कुछ नहीं है तो कोरोना के चलते सुरक्षा के तहत ओपीडी के सख्&#x200d;त नियम बना दिये गये हैं, जिस कारण डॉक्&#x200d;टर तक पहुंचना एक बड़ी बाधा हो गया है।</p>



<div class="wp-block-image"><figure class="alignleft size-large is-resized"><img decoding="async" loading="lazy" src="http://sehattimes.com/wp-content/uploads/2021/02/Drishtikon.jpg" alt="" class="wp-image-26347" width="349" height="259"/></figure></div>



<p>यहां ये तीन उदाहरण देकर कोरोना की बढ़ती भयावहता को दिखाने की कोशिश की गयी है। कोरोना की दूसरी लहर ने अपने पिछले सारे रिकॉर्ड को ध्&#x200d;वस्&#x200d;त करते हुए तेजी से पांव पसारने शुरू कर दिये हैं। इसके चलते मृत्&#x200d;यु का आंकड़ा भी बढ़ा है, चूंकि कोविड से हुई मौत के बाद शव के विद्युत शवदाह गृह में ही अंतिम संस्&#x200d;कार का प्रोटोकॉल है, इसलिए जब मौतें बढ़ीं तो यहां पहुंचने वाले शवों की संख्&#x200d;या भी बढ़ गयी। कल्&#x200d;पना मात्र से हृदय द्रवित हो उठता है कि पहले तो प्रियजन का यूं अचानक चले जाना ही घरवालों को काफी तकलीफ देता है, उसके उपरांत इस तरह की स्थिति और भी रुलाती है, इस दुख को जो सहता है, वही समझता है।</p>



<p>अभी हाल की ही तो बात है जब नये निकलने वाले मरीजों के आंकड़े 50 से कम आ गये थे, लग रहा था कि धीरे-धीरे सब कुछ सामान्&#x200d;य हो जायेगा, लेकिन चूंकि कोरोना समाप्&#x200d;त नहीं हुआ था इसलिए जैसे ही लोग सावधानी बरतने को लेकर ढीले पड़े, बस वायरस को मौका मिल गया। मैं ज्&#x200d;यादा टेक्निकलिटी में नहीं जाना चाहता हूं कि इस कोरोना का वेरियेंट पहले वाले से अलग है, यह तेजी से फैलता है, वगैरह-वगैरह&#8230; वेरियंट कोई भी हो, कोरोना वह भी था, कोरोना यह भी है। वो भी खतरनाक था, ये भी खतरनाक है, वो भी जानलेवा था, यह भी जानलेवा है। लेकिन हमें क्&#x200d;या हो गया, हम क्&#x200d;यों लापरवाह बन गये, क्&#x200d;यों नहीं हमने लॉकडाउन के वे दिन याद नहीं रखे जब घर में काम करने मेड तक नहीं आ पाती थी। हम फ्री होकर बाहर निकलने को तरस रहे थे&#8230;</p>



<p>यह सही है कि सरकार ने जब धीरे-धीरे सब कुछ अनलॉक किया तभी हम भी सामान्&#x200d;य जीवन की ओर बढ़े लेकिन सरकार ने अनलॉक ही तो किया था, यह तो न तो सरकार ने और न ही किसी डॉक्&#x200d;टर या अन्&#x200d;य विशेषज्ञ ने कभी नहीं कहा कि कोरोना से बचने के लिए बने नियमों का पालन करना छोड़ दें, यह तो पिछले सवा साल से सिखाया जा रहा है कि बाहर निकलें तो मास्&#x200d;क अवश्&#x200d;य लगायें, सोशल डिस्&#x200d;टेंसिंग का पालन करें, तो हमने इसक ध्&#x200d;यान क्&#x200d;यों नहीं रखा। क्&#x200d;यों कोरोना को पनपने का मौका दिया। और शर्मनाक तो यह है कि आज जब कोरोना की त्रासदी अपने सारे रिकॉर्ड तोड़ती हुई आगे बढ़ रही है, तब भी हम में से अनेक लोग अब भी गंभीर नहीं हैं, वे आज भी मास्&#x200d;क नहीं लगाते हैं, न ही सोशल डिस्&#x200d;टेंसिंग का पालन करते हैं। ऐसा नहीं है कि सभी लोग इन नियमों की अनदेखी करते हैं, ऐसे भी लोग हैं जो सुरक्षा के इन नियमों का पालन शुरू से लगातार कर रहे हैं।</p>



<p>दरअसल बात कड़वी है लेकिन सत्&#x200d;य है कि ज्&#x200d;यादातर लोगों की आदत यह बन चुकी है कि जब तक उनके साथ सख्&#x200d;ती न बरती जाये तब तक नहीं समझ में आता है। लेकिन यहां गौर करने की बात यह है कि इन सुरक्षा को अपनाने के लिए सख्&#x200d;ती करने के पीछे उद्देश्&#x200d;य है, हमारी, हमारे अपनों की जान बचाना। यहां मैं एक और उदाहरण देना चाहूंगा कि यह तो कोरोना संक्रमण का मामला है जिसमें एक व्&#x200d;यक्ति की लापरवाही दूसरे व्&#x200d;यक्ति के लिए भी घातक है, लेकिन हम तो हेलमेट लगाने, सीट बेल्&#x200d;ट बांधने में भी लापरवाही करते थे, जबकि उसमें दुर्घटना होने की स्थिति में नुकसान खुद का ही होना था। हम में से अनेक लोगों ने यह देखा होगा कि बहुत से लोग चौराहा आने से पहले हेलमेट लगा लेते हैं और चौराहा पार करने के बाद फि&#x200d;र से हेलमेट उतार देते हैं, ऐसा करके वे धोखा किसे देते हैं, सरकारी तंत्र को कि अपने आप को&#8230;कहने का अर्थ है कि हम अपनी जान बचाने के लिए भी अगर गंभीर नहीं हैं तो फि&#x200d;र क्&#x200d;या कहा जाये&#8230;</p>



<p>अक्&#x200d;सर लोगों की बातों से यह भाव निकलते हैं कि संक्रमण को रोकने की जिम्&#x200d;मेदारी सरकार की है, लेकिन ऐसे लोगों ने कभी सोचा है कि जीवन तो उनका है, सरकार का तो नहीं है, और अगर जीवन को कोई नुकसान पहुंचा तो सरकार के लिए तो नुकसान का सिर्फ एक आंकड़ा बढ़ जायेगा, लेकिन व्&#x200d;यक्ति के न रहने की पीड़ा तो उनके परिजन ही भुगतेंगे।</p>



<p>खैर जो हुआ सो हुआ, इस संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए जोर सभी को लगाना होगा, हम अगर अपनी, अपने परिजनों को ही बचाव के सभी साधन अपनाने का प्रण ले लेंगे तो संक्रमण की चेन टूट सकती है। इसके लिए सरकार की ओर से कदम उठाये जाने की प्रतीक्षा मत कीजिये। सरकार को कोई भी कदम उठाने के लिए अनेक दृष्टिकोण से सोचना पड़ता है, जबकि हमें सिर्फ हमारे दृष्टिकोण से सोचना है, इसलिए कोरोना को हराने के लिए सरकार और विशेषज्ञों द्वारा बताये गये नियमों का ईमानदारी से पालन सुनिश्चित कीजिये। हम अगर अब नहीं जागेंगे तो कब जागेंगे, श्&#x200d;मशान घाट पर दिख रहे ऐसे-ऐसे अप्रिय दृश्&#x200d;यों को देखते रहना किसी भी हालत में उचित नहीं कहा जा सकता&#8230;</p>
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